मुजफ्फरनगर हिंसा के बीच दिखा भाईचारा, जाट प्रधान ने अपने घर में दी 150 मुस्लिमों को शरण
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में भड़की हिंसा अबतक शांत नहीं हुई है। जो लोग इससे पहले तक एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर रहते थे वहीं आज एक-दूसरे को मारने पर आमादा हो चुके है। सरकार निर्बल हो चुकी है। चप्पे-चप्पे पर सेना तैनात है। बावजूद इसके दंगे में मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग है जो इस हिंसा में भाईचारे की मिशाल पेश कर रहे है।
मुजफ्फरनगर के खरड़ गांव के प्रधान बीजेन्द्र सिंह ने भाईचारे की अनूठी मिशाल पेश की है। दंगाईयों से बचाने के लिए इन्होंने अपने घर को आश्रय बना दिया। पड़ोस के गाव के रहने वाले 150 मुस्लिम परिवारों को बचाने के लिए उन्होंने अपने घर में आश्रय दिया। अपने परिवारवालों की जिंदगी दांव पर लगाकर विरेन्द्र सिंह ने इनसबको अपने घर में दो दिन तक सुरक्षित रखा। अपने खर्चे पर इनसबकों दो दिन तक खिलाया-पिलाया। 150 मुस्लिमों में ज्यादातर महिलाए और बच्चे शामिल थे।

खुद बीजेन्द्र सिंह असम सेना के राइफल को फोन कर इस बात की जानकारी दी और उन्हें सुरक्षित निकालकर ले जाने का अनुराध किया। वीरेन्द्र सिंह और उनके परिवार को इन दो दिनों में मौत के मुंह से होकर गुजरना पड़ा। बार-बार दंगाई उसके घरों को दरवाजे खटखटाते, दीवार लांधकर घर में घुसने की कोशिश करते। शरणार्थी मुस्लिम परिवारों को बाहर निकालने की धमकी देते, लेकिन प्रदान इन सबसे नहीं डरे और ना ही दंगाईयों ने उनके घर में घुसने की कोशिश की।
सोमवार को जब सेना उनके घर पहुंची तक जातक सबने राहत की सांस दी। सेना के जवानों ने सबकों सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। जहां पूरा इलाका जातीय हिंसा के कुचक्र में फंसा हुआ है तो वहीं गांव के प्रधान ने 150 मुस्लिम परिवारों की मदद कर उन्हें नया जीवन दिया और लोगों के सामने भाईचारे की नयी मिशान कायम की। दुल्हेड़ा गांव निवासी मोहम्मद दिलशाद के मुताबिक उनके गांव के प्रधान संजीव बलयान ने उनके परिवार को 200 लोगों की भीड़ के हमले से बचाया। ग्राम प्रधान का साथ कई ग्रामीणों ने दिया। दूसरे संप्रदाय के होते हुए भी उन्हें सुरक्षित उनके घर पहुंचाया गया और सुरक्षा, भोजन व शरण दी गई।












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