अखिलेश-शिवपाल को एक साथ आने में 6 साल लग गए, जानिए दोनों के गठबंधन से कितनी सीटों पर पड़ेगा असर

लखनऊ, 17 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे-वैसे राजनीतिक उठापटक भी तेज हो गई है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गुरुवार को अपने चाचा शिवपाल यादव से मिलने उनके घर पहुंचे थे। इस बैठक का उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुत महत्व है। 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हुई और चुनाव के बाद शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी से नाता तोड़ लिया और अपनी खुद की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाई। इसके बाद तमाम उतार चढ़ाव के बाद अब लगभग 6 साल बाद दोनों एक साथ आ गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अगर शिवपाल-अखिलेश एक साथ मिलकर चुनाव लड़े तो करीब 80 विधानसभा सीटों पर इसका असर पड़ सकता है।

अलग-अलग होने का खामियाजा दोनों को भुगतना पड़ा

अलग-अलग होने का खामियाजा दोनों को भुगतना पड़ा

पिछले विधानसभा चुनाव में वर्चस्व की इस लड़ाई का खामियाजा समाजवादी पार्टी और इन दोनों नेताओं को भुगतना पड़ा है। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में इन दोनों नेताओं को अलगाव का खामियाजा भुगतना पड़ा। हालांकि, उसके बाद से शिवपाल यादव के व्यवहार में नरमी आई है और वह पिछले दो साल से समाजवादी पार्टी में वापसी और अपनी पार्टी का सपा में विलय करने के लिए बेताब हैं। हालांकि अखिलेश यादव इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे, लेकिन माना जा रहा है कि अब वह अपने चाचा को अपने साथ ला सकते हैं।

 चुनाव से पहले अखिलेश की नजर छोटे दलों पर

चुनाव से पहले अखिलेश की नजर छोटे दलों पर

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव छोटे-छोटे राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन कर बीजेपी के जीत रथ को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञ प्रगतिशील समाजवादी पार्टी और चाचा शिवपाल को साथ लेने के दावे करते रहे हैं। हालांकि कई मौकों पर अखिलेश लगातार इस बात से परहेज कर रहे थे. लेकिन पिछले दिनों अखिलेश ने चाचा को फिर साथ लाने का इशारा किया था।

जब अखिलेश ने चाचा को साथ लाने के दिए संकेत

जब अखिलेश ने चाचा को साथ लाने के दिए संकेत

अखिलेश यादव ने अपने झांसी दौरे के दौरान संकेत दिया था कि वह शिवपाल से हाथ मिला सकते हैं। झांसी में भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा था, "सीएम ने पीएम से हमारे चाचा द्वारा किए गए कार्यों का उद्घाटन करवाया।" अखिलेश के इस बयान का निशाना भले ही बीजेपी हो, लेकिन इसके जरिए उन्होंने चाचा शिवपाल को साथ लाने के संकेत भी दिए थे। अब अखिलेश यादव चाचा शिवपाल यादव के घर चले गए हैं, जिसके बाद एक बार फिर सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि समाजवादी पार्टी से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव एक बार फिर से हाथ मिलाएंगे. समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा में चुनाव में जा सकते हैं। वहीं उनकी पार्टी का भी समाजवादी पार्टी में विलय हो सकता है।

6 साल बाद एक दूसरे साथ बैठे चाचा- भतीजा

6 साल बाद एक दूसरे साथ बैठे चाचा- भतीजा

वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज कहते हैं कि अखिलेश और शिवपाल के बीच लगातार मनमुटाव चल रहा था। राजनीतिक महात्वाकांक्षाओं को लेकर दोनों में दूरियां बढ़ती चली गईं। करीब 6 साल बाद दोनों एक दूसरे से मिले हैं। शिवपाल यादव पश्चिम, अवध और बुंदेलखंड के करीब 10 जिलों की 70 सीटों पर असर रखते हैं। इसके पीछे वजह ये है कि उनका अभी भी सहकारी समितियों पर कब्जा है। साथ ही वह अपने कोर वोट बैंक यादव को भी सहेज कर चल रहे हैं। उनकी पकड़ यूपी के 9% यादव वोट बैंक पर है।

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