IPS Rajesh Pandey: कुछ दशकों में कितनी बदली कानून व्यवस्था? हैरान कर देंगी IPS अधिकारी की ये बातें
IPS Rajesh Pandey Latest News Hindi Gorakhpur Uttar Pradesh: कुछ दशकों की बात करें तो यह पाते हैं कि 20 वर्षों और उससे पहले की कानून व्यवस्था और तत्कालीन कानून व्यवस्था में बहुत अंतर है। पिछले कुछ दशकों में क्या कुछ परिवर्तन कानून व्यवस्था में हुआ है यह जानेंगे पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय से। आप वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के नोडल सिक्योरिटी ऑफिसर हैं। वर्चस्व सहित कई पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। अपने कार्यकाल में इन्होंने 70 एनकाउंटर किए है जिसमें श्री प्रकाश शुक्ल जैसे बड़े अपराधी शामिल हैं। वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने IPS राजेश पांडेय से खास बातचीत की।
पहले इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस नहीं था मान्य
पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय बताते हैं कि अगर हम 2004 से पहले की बात करें तो उस समय इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस नहीं माने जाते थे। ना तो मोबाइल का इतना चलन था। अपराधियों तक पहुंचने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। ना ही सीसीटीवी कैमरे हुआ करते थे जिससे अपराधियों का सुराग आसानी से मिल जाए। कोर्ट उस समय किसी इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस को साक्ष्य नहीं मानती थी।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी को पुलिस ने किया ग्रहण
समय के साथ धीरे -धीरे विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने जैसे - जैसे प्रगति की उसे पुलिस विभाग ने भी अपनाया।

मोबाइल, सीडीआर और सीसीटीवी कैमरे से पुलिस को मिली मजबूती
पहले हम लोग पीसीओ से काल किया करते थे। अपराधियों का पता लगाने के लिए पीसीओ की कॉल डिटेल भी देखते थे। समय बदला और मोबाइल आया। शुरूआत में तो कम चलन में था। धीरे धीरे इसकी डिमांड बढ़ती गई और आज मोबाइल सबकी जरूरत बन गया है। मोबाइल ने पुलिस को और मजबूर कर दिया। अपराधियों का लोकेशन जानने, उनके चैट से मुजरिम तक पहुंचने में आसानी हो गई । आज सभी के हाथ में मोबाइल है । कही भी किसी भी जगह रील बनाना, वीडियो बनाना आसान हो गया है। जिससे बड़े से बड़े खुलासे तत्काल हो जा रहे हैं। आज इलेक्ट्रानिक एविडेंस को साक्ष्य माना जा रहा है। इसी आधार पर उन्हें सजा भी मिल रही है। सीडीआर यानी काल डिटेल रिकॉर्ड आज अपराधियों तक पहुंचने का सशक्त माध्यम बन चुका है। अपराधियों तक पहुंचने और उन्हें सजा दिलाने का काम पुलिस सीडीआर के आधार पर कर रही है। सीसीटीवी कैमरों ने सिस्टम को और मजबूत करने का काम किया है। पहले अपराधी अपराध करते और भाग जाते। उनकी एक तस्वीर भी मिलना कठिन कार्य था। आज के समय में हर प्रमुख चौराहों, प्रमुख भवनों के साथ के साथ अधिकांश घरों पर इसे देखा जा सकता है। सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस अपराधियों तक पहुंच रही है और उन्हें सजा दिलाने का काम कर रही है।
जनता के बीच तत्काल पहुंच रही है पुलिस
उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में पुलिस ने आमजन में अपनी शीघ्र पहुंच बनाई है। डायल 112 कुछ मिनटों में मौके पर पहुंचकर आमजन की समस्याओं का निदान कर रहा है।
मोबाइल ने सभी को साक्षर बना दिया
राजेश पांडेय ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान छानबीन करते हम एक गांव में पहुंचे। जानकारी लेने एक घर पहुंचे तो वहां बुजुर्ग दंपति थे। पढ़े लिखे भी नहीं थे। उनके पास मोबाइल था। मैने पूछा आप कैसे जान पाते हैं कि किसका फोन है? उन्होंने बताया कि ज्यादा फोन से मतलब तो नहीं रहता है बेटों का नंबर है। हम अक्षर देख कर जान जाते हैं कि फोन बड़े बेटे का है या छोटे बेटे का। जब्बात करनी होती है तब एक नंबर डायल कर कॉल कर देते हैं। मुझे तब एहसास हुआ कि मोबाइल ने सभी को साक्षर बना दिया है।
कानून व्यवस्था में हुआ बेहतरीन बदलाव
राजेश पांडेय कहते हैं कि हम बिना किसी संदेह के यह कह सकते हैं कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पहले से बहुत बेहतर हुई है। आज अपराधियों में कानून का भय है। सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हुआ है।
साइबर क्राइम पर पकड़ बनाने की जरूरत
उन्होंने बताया कि पुलिस को अभी भी साइबर अपराधियों पर और काम करने की जरूरत है। मुझे लगता है आने वाले 2 से 3 सालों में पुलिस इस पर भी पूरी तरह रोक लगा दी।












Click it and Unblock the Notifications