IIT-BHU की छात्रा गैंगरेप केस के दो आरोपी जमानत पर जेल से हुए रिहा, लोगों का फूटा गुस्सा
IIT-BHU student Gang rape case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चर्चित IIT-BHU की छात्रा से गैंगरेप के मामले में दो आरोपियों को सशर्त जमानत दे दी है। कुणाल पांडेय और आनंद उर्फ अभिषेक चौहान जो पिछले सात महीनों से जेल में थे, वो आज शनिवार को जेल से रिहा हो गए।
दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूंट पड़ा है, वहीं इस फैसले के बाद भाजपा एक बार विपक्षियों के निशाने पर आ चुकी है।

भाजपा से दोनों आरोपियों का क्या है नाता?
बता दें कुणाल पांडेय भाजपा आईटी सेल वाराणसी के संयोजक थे और आनंद उर्फ अभिषेक चौहान भाजपा के वाराणसी आईटी सेल के कार्य समिति सदस्य थे। कुणाल और आनंद पर आरोप था कि उन्होंने एक छात्रा के साथ गैंगरेप किया था। इस घटना के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था और तब से वे जेल में थे।
किस आधार पर मिली जमानत
हाईकोर्ट ने यह फैसला सबूतों की कमी के आधार पर लिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके। इन दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा "दोनों आरोपियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे पहली बार किसी अपराध में फंसे हैं। इसके चलते उन्हें जमानत दी गई है।"
पीड़िता का बयान
बता दें बीएचयू की पीड़िता छात्रा ने अपने बयान में कहा था कि कुणाल और आनंद ने उसे जबरन अपने कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। उसने यह भी बताया था कि घटना के समय वह अकेली थी और मदद के लिए चिल्लाने पर भी कोई नहीं आया।
जमानत मिलने पर निराध हुआ परिवार
पीड़िता के परिवार ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि न्याय की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।
जमानत मिलने पर गुस्साएं लोग
गैंगरेप जैसे जध्नय अपराध संबधी केस के दोनों आरोपियों को जमानत दिए जाने पर समाज में गुस्सा और आक्रोश पैदा कर दिया है। कई सामाजिक संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है और इसे न्याय का मजाक बताया है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
सोशल मीडिया पर लोगों पर शंका जाहिर की है कि दोनों जमानत पर रिहा होने के बाद केस से जुड़े सबूतों को नष्ट कर सकते हैं। कई लोगों का मानना है कि इस तरह के फैसले से अपराधियों का हौसला बढ़ता है और पीड़िताओं को न्याय नहीं मिल पाता।












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