गोवा में तिलमिलाई कांग्रेस, खुद भी ऐसे ही बना चुकी है सरकारें
गोवा में भाजपा की सरकार बनने से कांग्रेस चाहें कितना नाराज हो लेकिन ऐसे कई राज्य रहे हैं, जब उसने भी यही किया था। पढ़िए कब-कब और किन राज्यों में हो चुका है ऐसा।
नई दिल्ली। गोवा और मणिपुर में सरकार बनाने में पिछड़ने के बाद तिलमिलाई कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंची है। हालांकि लोकतंत्र की दुहाई देने वाली कांग्रेस खुद भी इससे पहले कई बार ऐसा कर चुकी है।
शनिवार को आए पांच राज्यों के फैसले में कांग्रेस को जहां पंजाब में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ, वहीं गोवा और मणिपुर में सबसे ज्यादा सीट हासिल करने वाली पार्टी बनी। कांग्रेस दोनों राज्यों में सरकार बनाने का दावा पेश करती, उससे पहले ही भाजपा अन्य दलों के साथ मिलकर अपना दावा कर चुकी है।

बहुमत न होने के बावजूद कांग्रेस को आपत्ति है कि दावा पेश करने का मौका उसे मिलना चाहिए। इसी मुद्दे पर कांग्रेस याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट जा पहुंची, जहां उसे निराशा ही हाथ लगी। लेकिन उससे पहले समझिए कि जिसका विरोध खुद कांग्रेस कर रही है, कैसे पूर्व में इसी तरह उसने कई राज्यों में अपनी सरकार बनाई है।
1. कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2004
20 अप्रैल से 26 अप्रैल 2004 के बीच कर्नाटक में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। 13 मई 2004 के दिन मतगणना हुई और जो फैसला आया उसमें किसी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ। मतगणना के बाद भारतीय जनता पार्टी 79 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जबकि कांग्रेस को 65 सीटें ही हासिल हुई। एचडी देवेगौड़ा की जनता दल (सेक्यूलर) ने 58 सीटों पर जीत हासिल की, तो वहीं जनता दल (यूनाइटेड) को 5 और अन्य को 17 सीटें हासिल हुईं।
सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा की जगह कांग्रेस और जनता दल (सेक्यूलर) ने गठबंधन कर अपना दावा पेश किया और सरकार बनाई। इस गठबंधन के मुख्यमंत्री कांग्रेस के धर्म सिंह बने। ये सरकार राज्य की पहली गठबंधन सरकार थी।
2. जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 2002
सितंबर से अक्टूबर 2002 के बीच चार चरणों में जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए। मतगणना के बाद जो फैसला आया, उसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस को 28 सीटें, कांग्रेस को 20 और पीडीपी को 16 सीटें मिली थीं। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस और पीडीपी में गठबंधन हुआ। इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद पहले और फिर गठबंधन की शर्तों के मुताबिक गुलाम नबी आजाद प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
3. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013
सबसे ताजा उदाहरण दिल्ली विधानसभा चुनाव का था। जहां भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटें 31, आम आदमी पार्टी ने 28 और कांग्रेस ने 8 सीटें जीती थीं। लंबे राजनीतिक ड्रामे के बाद कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बाहर से समर्थन दिया। इस गठबंधन की सरकार 49 दिनों तक चली और केजरीवाल पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।

4. झारखंड विधानसभा चुनाव 2005
साल 2005 से 2010 तक के बीच झारखंड जबरदस्त राजनीतिक अस्थिरता से गुजरा था। 5 साल के दौरान झारखंड में 4 मुख्यमंत्रियों की अदला-बदली हुई।
2005 के चुनाव में 32 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, झारखंड मुक्ति मोर्चा को 12, कांग्रेस को 11, आरजेडी को 9 और जेडीयू को 8 सीटें मिलीं। जबकि अन्य को 9 सीटें मिलीं। पहले शिबू सोरेन ने दूसरे नंबर पर होने के बावजूद सरकार बनाने का दावा पेश किया लेकिन 10 दिन में ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद डेढ़ साल तक अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बने।
अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री पद से हटे तो निर्दलीय मधु कोड़ा, JMM के समर्थन से करीब पौने दो साल मुख्यमंत्री रहे। उसके बाद शिबू सोरेन ने कोड़ा से समर्थन वापस ले लिया और फिर मुख्यमंत्री बन गए। सोरेन 144 दिनों तक मुख्यमंत्री रहे।












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