HC ने रद्द की HIV पॉजिटिव महिला कांस्टेबल की बर्खास्तगी, CRPF को देनी होगी नौकरी
ट्रेनिंग पर जब मेडिकल जांच हुई तो महिला कांस्टेबल का एचआईवी टेस्ट पॉजिटिव निकला। इस पर सीआरपीएफ ने महिला कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया। इसी फैसले को महिला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चैलेंज किया था।
इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांस्टेबल के एचआईवी पॉजिटिव होने पर सीआरपीएफ द्वारा नौकरी से बर्खास्त किए जाने का आदेश रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि एचआईवी पॉजिटिव होने से किसी को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। दरअसल पति की मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे के तहत महिला की नियुक्ति कांस्टेबल पद पर हुई थी। लेकिन ट्रेनिंग पर जब मेडिकल जांच हुई तो महिला कांस्टेबल का एचआईवी टेस्ट पॉजिटिव निकला। इस पर सीआरपीएफ ने महिला कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया। इसी फैसले को महिला कांस्टेबल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चैलेंज किया था। जिसमें हाईकोर्ट ने महिला कांस्टेबल को राहत देते हुए उन्हें फिर से नौकरी पर रखे जाने का आदेश दिया है।

बहस में ये बातें आई सामने
इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने शुरू की तो अदालत के सामने सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला रखा गया जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि एचआईवी पॉजिटिव होने पर पुलिस की नौकरी नहीं दी जा सकती। लेकिन अन्य सेवाओं में संबंधित को रखा जा सकता है। जबकि महिला कांस्टेबल ने नियम 6 के तहत बर्खास्तगी पर सवाल उठाए कि जब कांस्टेबल की अक्षमता स्थाई प्रकृति की नहीं है। तब उसे स्थाई तौर पर अयोग्य मानकर कैसे निकाला जा सकता है?


दलीले सुनने के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक स्थाई अक्षमता न हो, तब तक बर्खास्तगी गलत है। केवल एचआईवी पॉजिटिव होने से नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कांस्टेबल की बर्खास्तगी रद्द करते हुए मेडिकल बोर्ड को नए सिरे से परीक्षण करने का भी आदेश दिया है। नए परीक्षण में कांस्टेबल की कार्य क्षमता को माफ कर वापस नौकरी पर रखा जाएगा। हालांकि अब मेडिकल परीक्षण और निर्णय सीआरपीएफ मेडिकल बोर्ड करेगा।












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