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Hathras Stampede Update: यूपी पुलिस ने 3,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, हादसे में गई थी 121 लोगों की जान

Hathras Stampede Update: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 2 जुलाई 2024, को हुए भगदड़ मामले में पुलिस ने अदालत में 3,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस हादसे में 121 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं।

चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं, जो इस कार्यक्रम के परमिट प्राप्त करने के लिए जिम्मेदार थे। अदालत ने चार्जशीट की प्रतियां आरोपियों को वितरित करने के लिए 4 अक्टूबर की तारीख तय की है।

Hathras Stampede Update

अदालत में पेश हुए आरोपी
इस भगदड़ मामले में मुख्य आयोजक और धन संग्रहकर्ता देव प्रकाश मधुकर समेत दस आरोपी अदालत में पेश हुए। इन आरोपियों को अलीगढ़ जिला जेल से हाथरस जिला अदालत लाया गया। एक अन्य आरोपी, मंजू यादव, इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जमानत पर रिहा हैं। मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है, जबकि एक अलग न्यायिक जांच भी जारी है।

क्या है पूरा मामला?
भगदड़ 2 जुलाई को हाथरस के सिकंदरा राव क्षेत्र के फुलराई गांव में हुई थी, जहां सूरजपाल, जिन्हें नारायण सकार हरी या भोले बाबा के नाम से भी जाना जाता है, ने सत्संग का आयोजन किया था। इस धार्मिक सभा में अनुमानित 2,50,000 लोग पहुंचे थे, जबकि परमिट केवल 80,000 लोगों के लिए था। अधिक भीड़ और अव्यवस्था के कारण भगदड़ मची, जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई। सरकारी एजेंसियों ने इस घटना के लिए आयोजकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।

आरोप और बचाव
हालांकि, आरोपियों के वकील का कहना है कि भगदड़ की असली वजह किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भीड़ में विषैला पदार्थ छिड़कना थी, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। 2 जुलाई को इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें गैर-इरादतन हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।

जांच और कानूनी कार्यवाही
इस मामले में नारायण सकार हरी उर्फ ​​भोले बाबा को आरोपी नहीं बनाया गया है। घटना के तुरंत बाद, 3 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस त्रासदी की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया। इस आयोग का नेतृत्व एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य इस घटना के पीछे की साजिश और सुरक्षा प्रबंधों की जांच करना है।

हाथरस भगदड़ मामले की जांच और कानूनी कार्यवाही अभी भी जारी है। SIT और न्यायिक आयोग दोनों इस बात की जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कौन सी चूक हुई और किसकी लापरवाही से यह दर्दनाक हादसा हुआ। जांच पूरी होने के बाद, यह साफ हो सकेगा कि कौन लोग इस त्रासदी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।

इस घटना ने बड़ी धार्मिक सभाओं में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की गंभीरता को उजागर किया है। भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए कड़े नियम और सुरक्षा उपाय अपनाने की जरूरत है ताकि इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो।

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