ज्ञानवापी मस्जिद केस: टीम को नहीं जाने दिया गया अंदर, बिना सर्वे किए वापस लौटी
वाराणसी, 07 मई: वाराणसी ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी सर्वे मामले में बड़ी खबर सामने आई है। ज्ञानवापी परिसर पहुंची कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी को रोक दिया गया। टीम के सदस्य हरिशंकर जैन और विष्णु जैन ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में दाखिल होने के लिए गए थे लेकिन टीम को मस्जिद के अंदर नहीं घुसने दिया गया। इनके साथ वीडियोग्राफर और फोटोग्राफर को भी मस्जिद परिसर में दाखिल होना था। सर्वे टीम बिना सर्वे किए ही वापस लौट आई।

सर्वे को लेकर हिंदू पक्ष के वकील ने दावा किया कि टीम को मस्जिद के अंदर नहीं जाने दिया गया। जिससे आज फोटोग्राफी नहीं हो पाई है। आरोप है कि मुस्लिम पक्ष ने सहयोग नहीं किया। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए मस्जिद के गेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। शुक्रवार को वाराणसी में काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर में मां श्रृंगार गौरी स्थल के वीडियोग्राफी सर्वेक्षण और निरीक्षण के विरोध में सैकड़ों मुसलमानों द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद वाराणसी में तनाव बढ़ गया।
इससे पहले हिंदू पक्ष के वकीलों के साथ काशी विश्वनाथ धाम गेट नंबर चार पर बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे। मुस्लिम पक्ष के वकील ने बयान दिया कि अभी हम सर्वे में सहयोग नहीं करेंगे क्योंकि सुनवाई की तारीख आगे लगी है। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता रईद अहमद ने कहा: "हमने (कोर्ट) कमिश्नर के खिलाफ एक आवेदन दायर किया क्योंकि वह पक्षपाती हैं और उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। अदालत आवेदन पर सुनवाई करेगी। और उसके आदेशों का पालन किया जाएगा।
मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में मांग की गई कि कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को हटाकर माननीय न्यायालय स्वयं या उनकी जगह किसी दूसरे वरिष्ठ वकील को नियुक्त करे, ताकि निष्पक्ष न्याय हो। इस मामले में कोर्ट ने 9 मई की तारीख मुकर्रर की है। वहीं अजय मिश्रा ही सर्वे कर रहे थे लेकिन टीम को मस्दिज के अंदर दाखिल नहीं होने दिया गया। प्रार्थना पत्र में ये भी कहा गया है कि सूर्यास्त के बाद वकील कमिश्नर मस्जिद के अंदर जाने की जिद कर रहे थे, जबकि ऐसा कोई आदेश माननीय न्यायालय ने नहीं दिया है।












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