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Ghoshi By-election: इन 5 बड़ी चुनौतियों से पार पायेंगे बीजेपी उम्मीदवार दारा सिंह चौहान?

उत्तर प्रदेश के घोषी में चल रहे विधानसभा उपचुनाव में पांच सितम्बर को मतदान होना है। इस चुनाव ने दारा चौहान की मुसीबतें बढ़ा दी हैं।

Dara Singh Chauhan: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में घोषी विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासत गरमाती जा रही है। बीजेपी के उम्मीदवार दारा सिंह चौहान सपा से इस्तीफा देकर दोबारा भाजपा से चुनावी मैदान में हैं लेकिन इस बार उनकी जीत उतनी आसान नहीं है जितनी पिछली बार थी। इस उपचुनाव में कई चुनौतियां हैं जिनसे पार पाने के बाद ही उनको सफलता मिलने की संभावना है। हालांकि उनको जिताने के लिए बीजेपी काफी जोर लगा रही है।

दारा सिंह चौहान

बाहरी उम्मीदवार का लगा टैग

बीजेपी के उम्मीदवार दारा सिंह चौहान इस बार जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं लेकिन विरोधी उनके उपर बाहरी होने का टैग लगा रहे हैं। दारा सिंह मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले हैं और वह मऊ आकर अपनी सियासत को अंजाम देते रहे हैं। कभी मधुबन तो कभी घोषी से चुनाव लड़ते हैं लेकिन इस बार बाहरी मुद्दा बड़ी तेजी से चुनाव में हावी हो रहा है जिससे उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

एंटी इनकम्बेंसी का सता रहा डर

दारा चौहान जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। लेकिन यहां एंटी एनकम्बेंसी का असर भी देखा जा रहा है। इसका असर भी पड़ने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि इस उपचुनाव में सत्ता विरोधी लहर भी महसूस की जा रही है। इसको लेकर भी चौहान को सावधान रहना होगा। चौहान को पता है कि इस बार चुनाव जीतना है तो एंटी इनकम्बेंसी से पार पाना होगा।

लगातार दल बदलने से विश्वास का संकट

पूर्व सांसद और मंत्री दारा सिंह चौहान के सामने सबसे बड़ा संकट विश्वास का है। स्थानीय लोग बताते हैं कि वह अपने राजनीतिक करियर में करीब 6 बार दल बदल चुके हैं। अपने निजी फायदे के लिए वह कभी सपा तो कभी बसपा और अब बीजपी में अपनी राजनीतिक पारी चला रहे हैं। लेकिन स्थानीय सूत्र बताते हैं कि इस बार चौहान के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता के बीच अपना विश्वास कायम करना है।

बीजेपी के भीतर भी भीतरघात की आशंका

सपा छोड़कर बीजेपी में आए दारा के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के भितरघात से निपटने की है। दारा सिंह चौहान यूं तो बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं लेकिन जिस तरह से उनके आने से यहां के स्थानीय बीजेपी नेताओं की भावनाओं को पर तुषारापात हुआ है वो उनपर भारी पड़ सकता है। बीजेपी के कई नेता घोषी से अपनी चुनावी संभावनाएं देख रहे थे और ऐसा लग रहा था कि उनको ही टिकट मिलेगा लेकिन ऐन मौके पर दारा के पैंतरे के आगे सबकी उम्मीदें धरी की धरी रह गईं। बहुत लोग ऐसे हैं जो न चाहते हुए भी अब दारा के प्रचार के लिए घूमने को मजबूर हो रहे हैं।

फ़ायदे के लिए बदलते हैं विधानसभा सीट

दारा सिंह पर हमेशा से ये आरोप लगता रहा है कि वो अपने फायदे के लिए सीट बदलकर चुनाव लड़ते हैं। आजमगढ़ के रहने वाले दारा सिंह चौहान कभी मधुबन से तो कभी घोषी से चुनाव लड़ते हैं। घोषी में फागू चौहान के बेटे अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में हैं वहीं पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर भी इसी इलाके में राजनीति करते हैं लेकिन दारा का यहां आना इनको रास नहीं आ रहा है।

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