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Ghaziabad Triple Death: दोनों पत्नियों के अलावा कोई और भी था उस रात! गाजियाबाद केस के इस राज ने किया हैरान

Ghaziabad Triple Death: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी की नौवीं मंजिल से तीन सगी बहनों की मौत का मामला हर गुजरते घंटे के साथ और अधिक पेचीदा होता जा रहा है। अब तक की जांच में यह बात सामने आ रही थी कि बच्चियां 'कोरियन गेम' और डिजिटल एडिक्शन की शिकार थीं, लेकिन पुलिस की नई तफ्तीश ने एक ऐसे मोड़ पर दस्तक दी है जिसने सबको चौंका दिया है।

जांच में एक बेहद संवेदनशील और अहम तथ्य सामने आया है। घटना वाली रात उस फ्लैट में सिर्फ चेतन कुमार और उनकी दोनों पत्नियां और बच्चे ही नहीं थे, बल्कि घर में एक और सदस्य मौजूद था।

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क्या उस रात घर में कोई बहस या घटना हुई?

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस सूत्रों के अनुसार, उस रात चेतन की सबसे छोटी साली (पत्नियों की छोटी बहन) भी वहीं रुकी हुई थी। हालांकि पुलिस फिलहाल इसे सीधे तौर पर संदेह की नजर से नहीं देख रही है, लेकिन यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या उस रात घर में कोई ऐसी बहस या घटना हुई थी, जिसने बच्चियों को इस खौफनाक कदम की ओर धकेल दिया?

पिता के बयानों में बदलाव और 30 लाख का 'घाटा'

बच्चियों के पिता चेतन कुमार, जो शेयर ट्रेडिंग का काम करते हैं, उनके बयानों ने जांच की दिशा बदल दी है। उन्होंने स्वीकार किया है कि पिछले कुछ समय में उन्हें 20 से 30 लाख रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। हालांकि चेतन का दावा है कि यह नुकसान इतना बड़ा नहीं था कि बच्चियां जान दे दें, लेकिन पुलिस इसे 'आर्थिक दबाव' और 'घर के माहौल' से जोड़कर देख रही है।

'इंडियन' शब्द से नफरत और 'कोरियन' पहचान का जुनून

पुलिस को मिली डायरी और जांच से रोंगटे खड़े कर देने वाली हकीकत सामने आई है।

  • पहचान का संकट: तीनों बहनों ने अपने नाम बदलकर 'कोरियन' रख लिए थे। अगर मोबाइल से उनकी वह डीपी हटाई जाती जिस पर उनका नया नाम था, तो वे खाना तक नहीं खाती थीं।
  • भारत से नाराजगी: बच्चियां 'इंडियन' शब्द सुनकर भड़क जाती थीं। उन्होंने सुसाइड नोट में साफ लिखा- 'इंडियन आदमी से शादी कभी नहीं। हम कोरिया जाना चाहते थे।'
  • मोबाइल का तनाव: घटना से 10 दिन पहले पिता ने उनका सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर मोबाइल छीन लिया था। घटना वाली रात 10 बजे मोबाइल वापस मिला, 12 बजे मां ने फिर छीन लिया, और इसके बाद ही मौत का खौफनाक खेल शुरू हुआ।

एक साथ छलांग नहीं, पैटर्न था अलग

जांच में एक चौंकाने वाला पैटर्न दिखा है। दो बहनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर साथ छलांग लगाई, जबकि तीसरी बहन ने कुछ पल बाद पूजा वाली जगह की खिड़की से अकेले मौत को गले लगाया। यह दिखाता है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी मानसिक तैयारी थी।

सुसाइड नोट के वो आखिरी शब्द

पॉकेट डायरी में बच्चियों ने लिखा: 'We love Korean...love, love, love. कोरियन हमारी जान थी, जितना उन्हें चाहते थे, उतना घरवालों को भी नहीं। आपने हमें हमारे जीवन (कोरियन कल्चर) से अलग करने की हिम्मत कैसे की? अब सबूत देख लो।'

जांच अब 'मल्टी-डायमेंशनल'

उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी और डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देशन में अब इस केस को सिर्फ आत्महत्या नहीं माना जा रहा है। पुलिस कोरियन टास्क-बेस्ड गेम, मोबाइल चैट, और उस रात घर में मौजूद हर सदस्य की भूमिका की जांच कर रही है। दो साल से स्कूल से दूरी और डिजिटल दुनिया में खुद को 'कोरियन' मान लेना, इस केस को भारत के सबसे पेचीदा मनोवैज्ञानिक मामलों में से एक बना रहा है।

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