Flashback 2022 : UP Congress के लिए निराशाजनक रहा साल 2022, नहीं चले प्रियंका के नए प्रयोग
यूपी कांग्रेस के लिए साल 2022 काफी निराशाजनक रहा। विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी की कोशिशें भी पार्टी को जीत नहीं दिला पाईं। कांग्रेस के सामने चुनौती औ बड़ी होगी जब उसे बीजेपी के सामने 2024 के रण में उतरेगी।

Flashback 2022 : उत्तर प्रदेश में साल 2022 की शुरुआत के दौरान ही यूपी में विधानसभा (UP Assembly Election) का चुनावी शोर शुरू हो चुका था। इस शोर में सबसे ज्यादा निगाहें यूपी में कांग्रेस (Uttar Pradesh Congress) और यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) पर टिकी हुईं थीं। चुनाव के ऐलान के साथ ही एक तरफ जहां कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी वहीं दूसरी ओर प्रियंका गांधी ने अपने फैसलों से राजनीति की दशा और दिशा बदलने की कोशिश की। उन्होंने अपने चुनावी घोषणापत्र में कई फैसले किए लेकिन इसका जनता पर कोई असर नहीं हुआ और जब नतीजे आए तो कांग्रेस के लिए निराशा से भरे हुए थे। कांग्रेस को केवल दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। हालांकि इस मुश्किल दौर के बाद कांग्रेस ने यूपी में हुए उपचुनावों में हिस्सा नहीं लिया लेकिन यूपी में जल्द होने जा रहे नगर निकाय के चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर अपने वजूद की थाह लेगी।

विधानसभा चुनाव में नहीं चले प्रियंका के प्रयोग
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने विधानसभा चुनाव के दौरान लखनऊ में पार्टी का घोषणापत्र जारी किया था। इसे 'उन्नति विधान जन घोषणा पत्र 2022' नाम दिया गया। कांग्रेस ने यूपी चुनाव के जारी किए इस घोषणापत्र में किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए कई बड़े वादे किए थे। लखनऊ में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा था कि, 'हमने दूसरी पार्टियों की तरह अन्य पार्टियों के सुझाव लेकर अपने घोषणापत्र में नहीं डाले, हमने इसमें जो भी डाला है वो जनता की ही आवाज है।'

महिलाओं को आरक्षण से लेकर किसानों की कर्जमाफी का वादा
प्रियंका ने वादा किया कि कांग्रेस की सरकार बनने पर 10 दिन में किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। जिन लोगों को आवारा पशुओं की वजह से हुए नुकसान को झेलना पड़ा उन्हें 3,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और गोधन न्याय योजना शुरू की जाएगी। प्रियंका गांधी ने घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा था कि सरकार बनने पर बिजली बिल माफ होंगे, कोविड प्रभावित परिवारों को 25,000 रुपए दिए जाएंगे। हम 20 लाख सरकारी नौकरियां देंगे।

प्रियंका की प्रतिज्ञा यात्राएं भी नहीं दिला पाई जीत
कांग्रेस को यूपी के हर घर में ले जाने के लिए पार्टी 'हम वचन निभाएंगे' के संकल्प के साथ 12,000 किलोमीटर लंबी प्रतिज्ञा यात्रा निकाली गई थी। इस यात्रा के माध्यम से पार्टी को जनता के करीब आने और जीतने की उम्मीद जगी थी। पार्टी की राज्य इकाई की सलाहकार और रणनीति समिति के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद, प्रियंका गांधी ने दौरे के मार्ग, मुद्दों को कवर किया और इसके दौरान होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय की गई थी लेकिन ये यात्राएं भी कांग्रेस के सीटों की संख्या को नहीं बढ़ा पाईं।

चुनाव के बाद बदला यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष
विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ महीने बाद कांग्रेस के आलाकमान ने यूपी में बसपा से आए दलित नेता बृजलाल खाबरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया। कांग्रेस की हार का आलम यह था कि तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी चुनाव नहीं जीत पाए थे। केवल दो सीटें फरेंदा और रामपर खास ही कांग्रेस जीतने में सफल रही थी। हालांकि नए प्रदेश अध्यक्ष खाबरी के लिए भी कांग्रेस को विनिंग ट्रैक पर लाना इतना आसान नहीं है। उनकी पहली अग्निपरीक्षा नगर निकाय के चुनाव हैं जिसमें उनपर अपेक्षित परिणाम देने का दबाव रहेगा।

दलित पर दांव लगाकर 2024 को साधने की कोशिश
इस हार के बाद कांग्रेस की निराशा और बढ़ गई। हार के बाद पार्टी में बगावत के सुर भी उठने लगे थे। पार्टी के एक धड़े ने अंदरखाने प्रियंका गांधी का विरोध करना शुरू कर दिया था। कांग्रेस के नेताओं की माने तो राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में सिर्फ उन्हीं लोगों को शामिल किया गया जो प्रियंका के करीबी थे। लगभग सभी बड़े नेताओं को दरकिनार कर दिया गया। इस बीच नए प्रदेश अध्यक्ष के सामने निकाय चुनाव के अलावा 2024 में होने वाले आम चुनाव में दलितों को पार्टी के साथ जोड़ना है। पार्टी को लगता है कि मायावती की पकड़ दलित वोट बैंक पर ढीली हो रही है जिसका लाभ पार्टी उठा सकती है।












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