15 वर्षीय शार्दूल ने एशियाड गेम्स में भारत को दिलाया पदक, 2017 में जीते थे एक ही दिन में चार गोल्ड मेडल
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ की माटी से एक से बढ़कर एक नगीने निकल कर सामने आ रहे हैं। मेरठ के कक्षा 10 के एक छात्र ने एशियाड गेम्स में रजत पदक हासिल कर परिवार और देश का नाम रोशन किया है। शूटिंग की डबल ट्रैप में शार्दूल विहान ने ऐसा निशाना लगाया कि देश की झोली में एक और रजत पदक आ गिरा। शार्दूल के घर मे आज जश्न का माहौल है सब अपनी अपनी खुशी का इजहार कर रहे हैं।

मेरठ के सिवाया गांव में रहने वाले दीपक विहान का बेटा केवल 15 साल का है। जकार्ता में हो रहे एशियाड गेम्स के डबल ट्रैप में शार्दूल विहान ने सिल्वर मेडल हासिल किया है। किसान परिवार के इस बालक ने इसकी तैयारी कई साल पहले शुरू कर दी थी। जिसका नतीजा ये है कि शार्दूल आज देश के लिए एक पदक ले आया।
सिर्फ 9 साल की उम्र में उन्होंने मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में निशानेबाजी सीखनी शुरू की। शार्दुल के पहले कोच वेद पाल सिंह ने कहा, 'बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जो इतनी छोटी उम्र में अपने लक्ष्य को हासिल करने को लेकर गंभीर होते हैं। शार्दुल उनमें से एक था और उसने इतनी कम उम्र में एशियाड गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर यह साबित कर दिया है।'

शार्दुल फिलहाल एशियन चैंपियनशिप में डबल ट्रैप गोल्ड मेडलिस्ट अनवर सुल्तान से ट्रेनिंग ले रहे हैं। शार्दुल ने 2017 में एक ही दिन में चार गोल्ड मेडल जीते थे। 61वें नैशनल शॉर्टगन चैंपियनशिप में उन्होंने पुरुषों के जूनियर और सीनियर दोनों लेवल पर डबल ट्रैप के व्यक्तिगत और टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था। वह 2017 में आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में छठे स्थान पर रहे थे।
वहीं अगर बात शार्दूल की मां की करें तो उनका कहना है कि शार्दूल जब गया था तो मां के पैर छूकर गया था। उसने कहा था कि वो देश के लिए पदक लेकर आएगा। जैसा उसने कहा वैसा उसने करके दिखाया है।
पेशे से बिल्डर शार्दुल के पिता दीपक विहान ने कहा, 'उसने पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि उसके जुनून का मैंने हमेशा साथ दिया।' शार्दुल के दादा गन्ने के किसान हैं।












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