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खेती किसानी : धान की फसलों को 'गंधी कीट' कर देता है बर्बाद, जानिए इस कीट के बारे में और बचाव के उपाय

वाराणसी समेत पूर्वांचल में धान की फसल में अब बालियां लगना प्रारंभ हो गई हैं, ऐसे में फसलों में गंधी कीट का प्रकोप भी देखने को मिल रहा है इस कीट के चलते धान की पैदावार 20 से 30 फ़ीसदी तक कम हो जाती है
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वाराणसी समेत पूर्वांचल में धान की फसल में अब बालियां लगना प्रारंभ हो गई हैं, ऐसे में फसलों में गंधी कीट भी आक्रमण कर रहे हैं। गंधी कीट के चलते धान की पैदावार 20 से 30 फ़ीसदी तक कम हो जाती है। वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, भदोही, मिर्जापुर समेत पूरे पूर्वांचल में धान के खेतों में गंधी कीट लगना प्रारंभ हो गए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा समय पर दवा का छिड़काव करने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसलों में समय पर यदि दवा का छिड़काव कर दिया जाए तो धान की फसल को गंधी कीट से बचाया जा सकता है।

क्या होते हैं गंधी कीट, कैसे पहुंचाते हैं हानि

क्या होते हैं गंधी कीट, कैसे पहुंचाते हैं हानि

गंधी कीट के शरीर में से हमेशा गंध आता रहता है, जिसके चलते इसका नाम गंधी कीट रखा गया है। गंधी कीट को Rice Earhead Bug के नाम से भी जाना जाता है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि जिस खेत में सर्वाधिक कीट रहते हैं उस खेत से भी गंध आने लगती है। यह कीट धान की बालियों में दूध से दाना बनते समय ही दूध को पी जाते हैं। ऐसा करने के बाद धान की बालियों में लगे दानें सूख जाते हैं और उनमें चावल नहीं बन पाता है।

एक मादा कीट 250 से 300 अंडे देती है

एक मादा कीट 250 से 300 अंडे देती है

विशेषज्ञ बताते हैं कि गंधी कीट की संख्या तेजी से बढ़ने के पिछे सबसे बड़ा कारण होता है कि मादा कीट द्वारा एक बार में एक दर्जन से तीन दर्जन के बीच अंडे दिए जाते हैं। मादा कीट धान के पत्तियों पर ही अंडे दे देती हैं। यह भी बता दें कि एक मादा कीट अपने जीवन काल में 250 से 300 तक अंडे देती है। धान में जब बालियां लगने लगती हैं उसी समय ये कीट प्रजनन भी करते हैं और थोड़े ही दिन में इन अंड़ों से बच्चे निकल आते हैं। इस तरह इस कीट का प्रकोप काफी तेजी से बढ़ता है।

सूख रहे धान की बालियों में लगे दाने

सूख रहे धान की बालियों में लगे दाने

वाराणसी जिले के हरहुआ, आराजी लाइन, सेवापुरी, काशी विद्यापीठ, चोलापुर, पिंडरा, बड़ागांव, चिरईगांव विकास क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव के किसानों के खेतों में गंधी कीट लग रहे हैं। किसान रामदुलार यादव, पवन पांडेय, सुरेंद्र यादव, लालमणि पटेल , मंजीत पटेल सहित अन्य किसानों ने बताया कि धान के फसल में अब बालियां लगना शुरू हुई हैं और इसी समय कीट भी खेतों में दिखाई देने लगे हैं। लोगों ने यह भी कहा कि धान की बालियों में लगे दानें सूख रहे हैं। यदि ऐसी ही स्थिति रही तो धान की पैदावार बहुत ज्यादा प्रभावित होगी।

खेत से आने लगे गंध तो तुरंत करें उपाय

खेत से आने लगे गंध तो तुरंत करें उपाय

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि धान के खेतों से जब गंध आने लगे तो किसानों को देर नहीं करनी चाहिए। कृषि विशेषज्ञ देवमणि त्रिपाठी ने कहा कि जिन किसानों के खेतों से गंध आने शुरू हो गए हैं उन किसानों को यह समझ लेने चाहिए कि गंधी कीट उनके खेत में प्रवेश कर चुके हैं। इससे बचने और कीटों के रोकथाम के लिए किसान मिथाइल पैराथियान डस्ट और इमिडाक्लोरोप्रिड नामक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें। इसके साथ ही खेतों से खर पतवार को निकाल दें और खेत के किनारे मेड़ से भी खर परवार साफ कर दें जिससे ये कीट वहां भी न रहने पाएं। उन्‍होंने यह भी कहा कि आसपास के किसानों को भी अपने फसल में इस कीटनाशक के छिड़काव करने के बारे में जरूर जानकारी दें।

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English summary
Farmers save paddy crop from 'gandhi keet' in this way
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