इलाहाबाद: IERT में 9 करोड़ का घोटाला, क्राइम ब्रांच ने 4 अधिकारियों को गिरफ्तार

इलाहाबाद। सपा सरकार में घोटाला करने के बाद ठंडे बस्ते में चल रही फाइल को योगी सरकार द्वारा फिर से पलटते ही आईईआरटी कॉलेज में हुए घोटाले का भूत सामने आ गया है। चार साल पुराने आईईआरटी घोटाले मामले में क्राइम ब्रांच ने परियोजना अधिकारी विजय वालिया समेत 4 लोगों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उनके खिलाफ धोखाधड़ी और करोड़ों की सरकारी धनराशि हड़पने का मुकदमा था लेकिन सत्ता से पकड़ के चलते यह अभी तक गिरफ्तारी से बचे थे। इनके रसूख का ही असर था कि आईईआरटी में उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।

इलाहाबाद: IERT में 9 करोड़ का घोटाला, क्राइम ब्रांच ने 4 अधिकारियों को गिरफ्तार

क्या है मामला
आईईआरटी इलाहाबाद में वर्ष 2013 में कई योजनाएं शुरू करने के लिये करोड़ो का बजट आया। कुछ काम शुरू हुये। कुछ बिना शुरू हुये खत्म हो गये । आधे अधूरे काम में ही बजट पूरा खत्म हो गया। मामले कि शिकायत हुई जिसके बाद आईईआरटी के नियंत्रक तत्कालीन कमिश्नर ने जांच के आदेश दिये। जांच रिपोर्ट के बाद लेखाविभाग से ऑडिट हुआ तो लगभग 9 करोड़ रुपये डकार जाने की पोल खुल गई। घोटाले में तत्काल प्रभाव से तत्कालीन निदेशक पीके सिंह को निलंबित कर नील रतन भाटिया को निदेशक बना दिया गया। भाटिया ने मामले में आईईआरटी प्रशासन के 8 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया। जिसमे सिर्फ निदेशक पीके सिंह की गिरफ्तार हुई। बाकि सब ने अपने रसूख पर मामला दबा दिया।

यूपी में योगी सरकार के आते ही सपा सरकार की तमाम योजनाओं में घोटाले की जांच के लिये जब सीएम योगी ने पहल शुरू की थी उसी वक्त आईईआरटी घोटाले मामले को भी सीएम के सामने रखा गया था। दो महीने पहले क्राइम ब्रांच के तेज तर्रार दरोगा इंस्पेक्टर भगवती सिंह को इस घोटाले की जांच फाइल मिली। आरोपियों की तलाश शुरू हुई तो हड़कंप मचा। आरोपियों ने फिर से बचने का प्रयास किया। लेकिन इस बार क्राइम ब्रांच ने परियोजना अधिकारी विजय वालिया, गोपीकृष्ण चतुर्वेदी और गौरीकांत टंडन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

दर्ज हुए हैं आठ मुकदमे
मामले में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर भगवती सिंह ने बताया कि नील रतन भाटिया की तहरीर पर कर्नलगंज थाने में आठ अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं। इसमे पूर्व निदेशक पीके सिंह, परियोजना अधिकारी विजय वालिया, प्रोफेसर गोपी कृष्ण चतुर्वेदी, वरिष्ठ लिपिक गौरीकांत टंडन, प्रोफेसर देवेन्द्र सक्सेना , टेक्नीशियन संतोष कुमार गुप्ता, ओम प्रकाश गुप्ता आदि पर गबन की अलग राशि का मुकदमा दर्ज है। घोटाले की कुल राशि लगभग 9 करोड़ के आस पास बताई जा रही है। मुकदमों में जांच के दौरान संतोष और ओम प्रकाश गुप्ता को क्लीन चिट दे दी गई है जबकि देवेन्द्र सक्सेना फरार है।

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