Manish Dubey: 'अक्ल से पैदल, मूर्ख अधिकारी', जानें कमांडेंट मनीष दुबे पर क्यों भड़के लोग?
Commandant Manish Dubey: एसडीएम ज्योति मौर्य के बाद अब उनके तथाकथित प्रेमी कमांडेंट मनीष दुबे लोगों के निशाने पर आ गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनके ऊपर जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। कोई उन्हें अक्ल से पैदल कह रहा तो कोई मूर्ख अधिकारी बता रहा है। तो चलिए जानते हैं आखिर कमांडेंट मनीष दुबे ने ऐसा क्या बयान दे दिया है कि लोग उनके ऊपर भड़क रहे हैं।
मनीष दुबे की बातों पर भड़के लोग
दरअसल, कमांडेंट मनीष दुबे (Manish Dubey) ने एसडीएम ज्योति मौर्य के पति आलोक मौर्य पर तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति ज्योति मौर्य को पढ़ाने का दावा कर रहा है क्या उसे यह भी पता है कि परीक्षा में कितने पेपर होते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे हैरानी होती है लोग इस चीज को इतना क्यों बढ़ावा दे रहे हैं। आलोक मौर्य को यह भी पता है कि हमलोग इस कुर्सी पर कितनी मेहनत से पहुंचे हैं। बस मनीष दुबे के इसी बयान पर लोग भड़क गए हैं। नीचे पढ़ें आखिर मनीष दुबे पर कैसे भड़के लोग। (Commandant Manish Dubey)

सोशल मीडिया पर जमकर भड़ास निकाल रहे लोग
Rs kushwah नाम के यूजर ने कहा कि जो मां बाप हमें बचपन से पढ़ाते हैं,ज्यादातर लोगों के मां-बाप को ही नहीं पता होता है कि हमारा बच्चा कौन सा पेपर दे रहा है और कितने पेपर दे रहा है।कल अपने ही मां बाप ये सवाल मत करना की आपने मुझे पढ़ाया है, तो कितने पेपर होते है।
वहीं दिनेश कुमार नाम के एक ट्विटर यूजर ने कहा कि एक क्या घटिया सफाई दे रहे हो भाई । तुम किसी की जिंदगी उजाड़ रहे हो । सुना है उसके बच्चे भी है, वो नहीं दिखता ? इस पद पर बैठ कर ऐसे ही निर्णय लोगे तो तुम इस पद के काबिल नहीं हो । पढ़ाई के साथ इंसानियत छोड़ दी क्या ? ज्यादातर पढ़ाने वालों को कितने और क्या पेपर होते है नहीं पता होता।
ज्ञानेंद्र कुमार नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा कि अरे भाई इसको कामंडेंट कौन बना दिया है कैसी बेतुकी बातें कर रहा है,इस बेवकूफ अधिकारी को इतना नहीं पता है कि किसी के मां बाप यदि पढ़े लिखे नहीं हैं तो वो भी अपने बच्चों को शिक्षा देता है तो क्या उन मां बाप से भी पूछा जा सकता है कि कितने पेपर होते हैं परीक्षा में । मूर्ख कहिं का
अनुपमा सिंह नाम की यूजर लिखती हैं कि ये महाशय बिल्कुल अक्ल से पैदल हैं ये क्या बोल रहे हैं खुद नहीं समझते हैं। यदि मां बाप बच्चों को पढ़ाते हैं तो क्या उनको उनके पेपर याद करना पड़ेगा यदि कोई किसी को पढ़ने में सहयोग करता है तो इसका मतलब उसे उसका पूरा पेपर , सेलेब्स याद करना चाहिए।
वहीं पीडी राठौर नाम के यूजर ने लिखा कि पढ़ाने का मतलब अगर बचपन से पढ़ाना है तो फिर आपके अनुसार विवाहोपरांत जो एफर्ट ससुराल वाले करें या पत्नी पति के लिए करे तो सब शून्य है। क्या परिभाषा महोदय। पढ़े लिखे हैं तो हमारा सामाजिक पारिवारिक ढांचा तो समझते हैं जिसमे स्वतंत्रता के साथ साथ वफादारी भी कुछ होती है।
मुकेश पाठक नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा कि यह धूर्त व्यक्ति गलत तर्क दे रहा है। पढ़ाने लिखाने का मतलब यह नहीं है कि वह उसे ट्यूशन पढ़ाता था जो उसे विषय ज्ञान होना आवश्यक है। इसका अर्थ यह है कि वह उसके पढ़ाने में अपना श्रम लगाता था। यह आदमी ऊंचे पद पर बैठकर मनमानी कर रहा है। सबसे पहले तो इसे सस्पेंड करना चाहिए। व्याभिचार कर रहा है। एक सरकारी पद पर रहते हुए किसी दूसरी महिला से प्रेम प्रसंग बनाए बैठा है।












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