कांशीराम की पुण्यतिथि पर मायावती ने किया शक्ति प्रदर्शन, बोलीं- BJP, SP और कांग्रेस के वादों में नहीं है दम
कांशीराम की पुण्यतिथि पर मायावती ने किया शक्ति प्रदर्शन, बोलीं- BJP, SP और कांग्रेस के वादों में नहीं है दम
लखनऊ, 09 अक्टूबर: बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशी राम की 15वीं पुण्यतिथि पर यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए चुनावी शंखनाद कर दिया। पूर्व सीएम मायावती ने महरौली में जनता को संबोधित करते हुए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर और पूर्व की सपा सरकार पर जमकर हमला बोला। मायावती ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बीजेपी और सपा सरकार में काफी ज्यादा दुखी रही है। जनता सत्ता परिवर्तन करने के लिए काफी हद तक अपना मन बना चुकी है।

मायावती ने जनता को संबोधित करते हुए कहा,
बीजेपी, एसपी, कांग्रेस और आप वोट के लिए जनता से वादे कर रही हैं जो हवा हवाई है। उनमें रत्तीभर भी दम नहीं है। विरोधी पार्टियां चुनावी घोषणापत्रों में प्रलोभन भरे चुनावी वादे करने वाली हैं। कहा कि हमारी सरकार बनने पर इस बार सबसे ज़्यादा जोर यहां के गरीब और बेरोज़गार नौजवानों को रोटी रोजी के साधन उपलब्ध कराने पर होगा। इसबार यही हमारी पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा भी होगा। केंद्र और राज्य की जो भी योजनाएं चल रही हैं उन्हें बदले की भावना से रोका नहीं जाएगा।
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कांशीराम स्मारक स्थल से मायावती ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी। मायावती ने कहा कि 2022 के चुनाव में यूपी के अंदर बीएसपी की सरकार बनना लगभग तय है। इसके लिए पार्टी के लोगों को अभी से ही बीएसपी विरोधी पार्टियों के साम, दाम, दंड भेद आदि हथकंडों से भी जरुर सावधान रहना है। हालांकि, अभी तक इन्होंने जिन-जिन हथकंडों को भी इस्तेमाल किया है उनके बारे मैं पार्टी के लोगों को समय-समय पर सजग भी करती रही हूं। इस दौरान मायावती ने कहा कि इस समय देश में कुछ ऐसी भी छोटी-छोटी पार्टियां व संगठन आदि है जो अकेले। या गठबंधन करके भी यह चुनाव लड़ सकते है। इनका मकसद चुनाव जीतना नहीं होता है, बल्कि वोट काटना होता है।
पूर्व सीएम मायावती ने कहा, मैं चुनाव आयोग को लिखूंगी कि चुनाव से 6 महीने पहले सभी सर्वे पर रोक लगे। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मामले में ऐसा हुआ था। बीजेपी पार्टी की मशीनरी अपने पक्ष में हवा बनाने की कोशिश कर रही है। वो हिन्दू-मुस्लिम को भड़काने की कोशिश करेगी। लेकिन इससे सजग रहना है। अब सरकार में आंदोलित किसानों पर जुल्म इतना बढ़ गया है की अति हो गई है। लखीमपुर खीरी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।












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