BSP Bihar Strategy: बिहार चुनाव से पहले मायावती का सियासी दांव, आकाश आनंद को दी गई बड़ी जिम्मेदारी
BSP Bihar Strategy: बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू हो चुकी है, हालांकि अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। इस माहौल में बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने बड़ा सियासी कदम उठाते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक बना दिया है।
इस फैसले को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। माना जा रहा है कि मायावती ने यह निर्णय बिहार चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही लिया है, जिससे बीएसपी वहां फिर से जमीन मजबूत कर सके।

रविवार को दिल्ली में हुई बैठक में मायावती ने वरिष्ठ नेताओं के सामने आकाश आनंद को पार्टी के प्रचार, अभियान और समन्वय की कमान सौंपने का ऐलान किया।
अब आकाश सीधे तौर पर पार्टी के तीन राष्ट्रीय समन्वयकों-रामजी गौतम, रणधीर बेनीवाल और राजाराम-को निर्देश देंगे। इनमें से रामजी गौतम बिहार के प्रभारी भी हैं, जिससे यह और स्पष्ट होता है कि आकाश की भूमिका अब बिहार फोकस्ड होगी।
बिहार चुनाव की रणनीति के केंद्र में आकाश
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीएसपी इस बार बिहार में खुद को नए चेहरे और नई ऊर्जा के साथ पेश करना चाहती है। आकाश आनंद का दलित युवा वर्ग में प्रभाव है, और बीएसपी उन्हें चेहरा बनाकर इस वर्ग को फिर से साधने की कोशिश कर रही है।
इस समय बिहार की राजनीति में कांग्रेस के राहुल गांधी, राजद के तेजस्वी यादव और बीजेपी के तमाम बड़े नेता सक्रिय हैं। ऐसे में बीएसपी को एक मजबूत युवा नेता की जरूरत थी, जिसे अब आकाश आनंद के रूप में उतारा गया है।
कुछ ही महीनों पहले हुए थे पार्टी से बाहर
मार्च 2025 में मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया था। उन्होंने उनके व्यवहार को अनुशासनहीन बताया था और यहां तक कह दिया था कि अब उनके जीते-जी पार्टी का कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा।
लेकिन अप्रैल में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती से ठीक पहले आकाश ने सार्वजनिक माफी मांगते हुए पार्टी हित में ससुराल पक्ष को राजनीति से दूर रखने का वचन दिया। इसके कुछ घंटों बाद ही मायावती ने उनकी माफी स्वीकार की और उन्हें फिर से पार्टी में शामिल कर लिया।
संगठन में वापसी के बाद अब बड़ी भूमिका
संगठन में वापसी के बाद अब आकाश आनंद को फिर से प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है। बीएसपी के कई नेता इस कदम को पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में बड़ा संकेत मान रहे हैं।
साथ ही, यह भी साफ हो गया है कि मायावती अब पार्टी के भविष्य को आकाश के हाथों में देने के लिए तैयार हैं। हालांकि इस बारे में उन्होंने कोई औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी संकेत साफ हैं।
बीएसपी के इस फैसले को लेकर जहां कुछ लोग इसे युवा नेतृत्व को मौका देने वाला कदम मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि पार्टी में एक बार फिर परिवारवाद की वापसी हो रही है।
हालांकि पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि आकाश आनंद के पास जमीन से जुड़ा अनुभव और युवाओं को जोड़ने की काबिलियत है, जो आने वाले चुनाव में लाभदायक साबित हो सकती है।












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