UP में हारी हुई सीटों पर सहयोगियों के साथ बाजी पलटने की तैयारी में बीजेपी, जानिए
लखनऊ, 17 फरवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सात चरणों में होना है। इसमें से दो चरण सम्पन्न हो चुके हैं और तीसरा चरण रविवार को होगा। इसको लेकर अब सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने सहयोगी दलों की ताकत का आंकलन करने के लिए नया फार्मूला निकाला है। बीजेपी अब ऐसी सीटों को सहयोगी दलों को पकड़ा रही है जिस वह 2017 के चुनाव में हार गई थी। इस तरह की लगभग एक दर्जन सीटों को बीजेपी ने निषाद पार्टी और अपना दल के बीच बांट दिया है। अब सहयोगी दल इन सीटों पर अपने समीकरण के हिसाब से चुनावी वैतरणी पार करने में जुटे हुए हैं।

पिछली बार अपना दल और सुभासपा को पकड़ाई थी सीटें
यूपी विधानसभा चुनाव में जहां एक एक सीट को लेकर मारामारी मची है वहीं दूसरी ओर बीजेपी लगभग एक दर्जन हारी हुई सीटों को नई रणनीति के तहत सहयोगियों को पकड़ा चुकी है। बीजेपी पिछला चुनाव 384 सीटों पर लड़ी थी। बाकी सीटें उसने सहयोगियों अपना दल और सुभासपा को दे दी थी। सुभासपा इस बार सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। पिछली बार 19 सीटों पर अपना दल और सुभासपा ने चुनाव लड़ा था। इसमें अपना दल को 9 सीटें जबकि सुभासपा को चार सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

इस बार निषाद पार्टी और अपना दल के साथ है गठबंधन
इस बार के चुनाव में बीजेपी ने निषाद पार्टी और अपना दल के साथ गठबंधन किया है। निषाद पार्टी ने 15 सीटों की मांग की थी और उसने अब तक 9 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। इनमें से मात्र दो सीटें ही ऐसी हैं जहां पिछले चुनाव में बीजेपी जीती थी। बाकी सात सीटों पर बीजेपी को हार मिली थी। निषाद पार्टी ने जिन सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं उनपर 2017 के चुनाव में बलिया के बांसडीह से रामगोविंद चौधरी, जौनपुर की शाहगंज सीट से शैलेंद्र यादव ललई, महाराजगंज की नौतनवा से निर्दलीय प्रत्याशी अमनमणित त्रिपाठी, भदोही की ज्ञानपुर से विजय मिश्रा, अम्बेडकरनगर की कटेहरी से लालजी वर्मा, कुशीनगर के तमकुहीराज से अजय कुमार लल्लू और आजमगढ़ के अतरौलिया सीट से संग्राम सिंह जीते थे।

अपना दल ने अब तक 15 सीटें घोषित की हैं
बीजेपी के साथ गठबंधन के तहत अपना दल ने अब तक 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें से चार सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी पिछली बार चुनाव हार गई थी जिनमें प्रयागराज की प्रतापपुर, करछना, हंडिया और गाजीपुर की सैदपुर सीट शामिल हैं। बीजेपी के सूत्रों की माने तो भाजपा ने सहयोगी दलों की राजनीतिक ताकत आजमाने के लिए उन्हें हारी सीटें दी हैं। यदि सहयोगी दलों ने उनपर जीत हासिल कर ली तो इससे बीजेपी की भी उन दलों के साथ ही स्थिति मजबूत हो जाएगी। यदि स्थिति पहले जैसी रही तो ज्यादा नुकसान होने की गुंजाइश भी नहीं है।

बीजेपी को नहीं मिले इन सीटों पर उम्मीदवार
चुनाव में उतरी बीजेपी के सामने यूं तो टिकटों को लेकर मारामारी मची रहती है लेकिन इस बार हारी हुई सीटों पर इनके पास कोई उचित दावेदार नहीं थे। जिन सीटों पर वो पिछली बार हार गए थे वहां उन्होंने अपने उम्मीदवारों पर दांव लगाने की बजाए सहयोगियों के कंधे पर बंदूक रखकर चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश की है। बीजेपी इसमें अपना फायदा देख रही है। बीजेपी को लगता है कि सहयोगी दलों के सहारे उन सीटों पर माहौल बनाया जा सकता है। बीजेपी के नेता बताते हैं कि पहले ही इन सीटों पर हमारे पास उम्मीदवार नहीं हैं लिहाजा सहयोगियों के साथ उतरना एक सेफ जोन है। हारने पर भी हमारे लिए ज्यादा घाटे का सौदा नहीं होगा।












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