मुलायम सिंह के गढ़ आजमगढ़ में बीजेपी ने लगाई सेंध, जानिए अखिलेश से कहां हुई चूक
लखनऊ, 26 जून: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी को पुर्ण बहुमत मिला था। विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने आजमगढ़ लोकसभा सीट की सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमाया था लेकिन तीन महीने बाद ही सपा के सबसे बड़े गढ़ में बीजेपी ने सेंध लगा दी। अखिलेश यादव का प्रचार के लिए न निकलना उनके उपर भारी पड़ गया। आजमगढ़ में बीजेपी की जीत की गूंज लंबे समय तक अखिलेश यादव के कानों में गूंजती रहेगी। हालांकि अभी भी अखिेलश यादव को नहीं समझ में आ रहा है कि उनसे चूक कहां हुई लेकिन बीजेपी ने सधी हुई रणनीति और प्रचारतंत्र के सहारे आजमगढ़ में जीत हासिल कर ही ली।

अखिलेश अपने चचेरे भाई के लिए प्रचार करने क्यों नहीं निकले
आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में सपा को मिली हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिरकार अखिलेश यादव उपचुनाव में प्रचार के लिए क्यों नहीं निकले। राजनीतिक विश्लेषक राजीव रजंन सिंह की माने तो अखिलेश कई मोर्चे पर चूक गए। उपचुनाव लड़ने को लेकर सपा में वो आत्मविश्वास और उत्साह नजर नहीं आया जो विधानसभा चुनाव के दौरान देखने को मिला था। आप देखिए कि एक तरफ नगर निगम का चुनाव भी होता है तो बीजेपी में अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे कद़दावर नेता जाकर प्रचार करते हैं। फिर लोकसभा उपचुनाव को अखिलेश ने कैसे हल्के में ले लिया ये बड़ा सवाल है।

अखिलेश का अति आत्मविश्वास सपा को ले डूबा
समाजवादी पार्टी आजमगढ़ में लोकसभा का उपचुनाव हार गई है। उपचुनाव में हार का ठीकरा तो अखिलेश के सिर ही फूटेगा क्योंकि आजमगढ़ की जमीन उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने सैफई परिवार के लिए कमाई थी। पिता की कमाई हुई राजनीतिक विरासत को अखिलेश ने अपने अतिआत्मविश्वास के चक्कर में लुटा दिया। वो आजमगढ़ जहां बीजेपी को नाकों चने चबाने पड़ते थे वहां असानी से बीजेपी ने मैदान मार लिया और अखिलेश देखते रह गए। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी कहते हैं , '' एक राजनेता के लिए चुनाव हमेशा ही अहम होना चाहिए। चाहे वो लोकसभा का हो या नगर निगम का चुनाव। आप पार्टी चला रहे हैं तो आपको हर स्तर पर प्रचार के लिए उतरना पड़ता है लेकिन अखिलेश ने ऐसा न करके सबसे बड़ी गलती की है जिसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ा है।''

मुस्लिमों का बिखराव नहीं रोक पाए अखिलेश
आजमगढ़ में लोकसभा का उपचुनाव बीजेपी पहले ही दिन से पूरी रणनीति के साथ लड़ रही थी लेकिन अखिलेश में वो आजमगढ़ को जीतने की ललक नहीं दिखाई दे रही थी। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अखिलेश के रणनीतिकारों ने उनको यह समझाया कि आप अगर आजमगढ़ में चुनाव प्रचार करने गए तो वहां मुस्लिम और यादवों के बीच ध्रुवीकरण हो सकता है और उसका लाभ बीजेपी को मिलेगा। आजम के मामले को लेकर मुस्लिमों की नाराजगी से बचने के लिए अखिलेश वहां नहीं गए लेकिन अब उनका ही फैसला उनपर भारी पड़ गया।

विधानसभा में पांचों सीटों पर सपा ने किया था कब्जा
यूपी में तीन महीने पहले ही विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुआ था जिसमें बीजेपी को करारी शिकस्त मिली थी। सपा ने यहां सभी दस सीटों पर कब्जा जमाया था। तब ये सवाल उठा था कि आजमगढ़ में योगी ओर मोदी की लहर नहीं चली। यहां सैफइ परिवार का ही जलवा कायम रहा। इसके बाद अखिलेश ने इस्तीफे देकर यह सीट खाली की जिसपर उपचुनाव हुआ लेकिन अखिलेश यादव एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष की तरह वहां रणनीति बनाते और प्रचार करते नजर नहीं आए। सबकुछ उन्होंने स्थानीय नेताओं के भरोसे छोड़ दिया जिसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ा है।












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