BHU Violence: प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचा छात्राओं पर लाठीचार्ज का मुद्दा

बीएचयू का मुद्दा पहुंचा प्रधानमंत्री मोदी तक, पुलिस के खिलाप सख्त कार्रवाई की मांग, वीसी पर लगाए गंभीर आरोप, अभिव्यक्ति की आजादी का हनन

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में विवाद चल रहा है, वह मामला अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गया है। तकरीबन 40 एक्टिविस्ट ने रविवार को इस मुद्दे को लेकर ना सिर्फ देश के राष्ट्रपति, प्रदेश के मुख्यमंत्री बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मुद्दे का संज्ञान लेने को कहा है। इस पत्र में कहा गया है कि पुलिस ने शनिवार को छात्रावास में छात्राओं पर लाठीचार्ज किया है। यह पत्र एक्टिविस्ट अरुणा रॉय और हर्ष मंदेर समेत कई अन्य एक्टिविस्ट ने मिलकर लिखी है।

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छात्रावास के भीतर घुसकर किया गया लाठीचार्ज

पत्र में कहा गया है कि हम इस मामले में तत्काल कार्रवाई चाहते हैं, पुलिस की बर्बरता के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और इस मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए। साथ ही में यह कहा गया है कि जो छात्रों की मांग है उसे तत्काल स्वीकार किया जाए। एक्टिविस्ट का कहना है कि हम इस पूरी घटना की निंदा करते हैं, हम विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की बर्बरता की आलोचना करते हैं। जो छात्र 22 सितंबर से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे थे, उनपर बर्बरता की गई है। सभी छात्राएं संस्थान के भीतर हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज उठा रही थीं, लेकिन शनिवार की रात उनपर लाठीचार्ज किया गया।

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    भूख हड़ताल पर बैठी छात्राओं को भी नहीं छोड़ा

    पुलिस छात्रावास के भीतर घुसी और लड़कियों को पीटा गया और उन्हें घसीटा गया। लड़कियों पर आंशू गैस के गोले छोड़े गए, रबर बुलेट का इस्तेमाल किया गया और यह सब निहत्थी छात्राओं पर किया गया। यहां तक कि जो छात्राएं भूख हड़ताल पर बैठी थीं उन्हें भी नहीं छोड़ा गया। लेकिन जो सबसे चौंकाने वाली बात है वह यह कि विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस इस बर्बर कार्रवाई की वजह लोगों का उपद्रव बता रही है।

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    छात्राओं को छात्रावास से निकाला गया

    पत्र में लिखा गया है कि बीएयचू के वीसी ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन के खिलाफ जबरन कार्रवाई की और तमाम छात्रावाओं को 2 अक्टूबर तक के लिए बंद कर दिया है, छात्राओं को छात्रावास से बाहर कर दिया गया है। छात्रावास के प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वह तमाम छात्राओं के अभिभावकों को फोन करके बताएं कि छात्रावास बंद हो गया है, ऐसे में अगर कोई छात्रा छात्रावास में रहती है तो अपने जोखिम पर रहेगी। एक्टिविस्ट का कहना है कि जो कुछ भी छात्रावास के भीतर हुआ है वह पूरी तरह से वीसी की विफलता को दर्शाता है, वह छात्राओं को सुरक्षित रखने में पूरी तरह से विफल रहे हैं, उन्होंने छात्राओं की अभिव्यक्ति की आजादी का हनन किया है। पत्र के जरिए पुलिस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है, साथ ही जिले के एसपी, डीआईजी को सस्पेंड करने की भी मांग की गई है।

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