PICS: इसलिए मनाया जाता है भैया दूज, ये है इस परंपरा की पूरी जानकारी
भाई-बहनों के प्यार के इस अनोखे पर्व को प्रदेश भर में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस पर्व की पूरी मान्यता और सटीक जानकारी के लिए आप को ये खबर पढ़नी चाहिए।
वाराणसी। भाई के प्रति बहनों के प्यार का पर्व है भैया दूज, दीपावली की रात को ही इस पारंपरिक पूजन कि नींव रखी जाती हैं। भाई-बहनों के प्यार के इस अनोखे पर्व को प्रदेश भर में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। अपने-अपने भाइयों को दीर्घायु बनाने के लिए कई तरीके से पूजन कि परंपरा के निर्वहन के बाद बहने भाइयों को गालियां देती हैं और इस गलती का पश्याताप करते हुए अपनी जीभ में काटा चुभाकर क्षमा भी मांगती हैं। पूजा का अति प्राचीन इतिहास बताता है कि इस पूजन की शुरुआत इस प्रकार की जाती है, पूजा की शुरुआत शुद्ध माने गए गाय के गोबर से उस स्थान पर लेपन करने के साथ गाय के गोबर से ही यमराज, भाट और भाटीन के प्रतीक आकृतियों को बनाकर शुरू की जाती है।

गाय के गोबर और मिट्टी के विशेष बर्तन से पूजन की है मान्यता
दीपावली के दो दिन बाद गोवर्धन की पूजा की जाती है, इस पूजा में बहनें भाई के दीर्घायु के लिए कामना करती हैं। दीपावली के दिन ही संध्या पूजन के साथ भैया दूज की पूजा शुरू हो जाती है। इसी दिन रात्रि में घरों में बहने अपने भाई के लिए भडेहर (मिट्टी का विशेष प्रकार का बर्तन) भरती हैं।

भाई को गाली के बाद यमराज से भाई की लंबी आयु की प्रार्थना का है विधान
आज की पूजन में इंदू और सावित्री ने बताया कि इसमें रखे गए चने और अन्य चीजे गोदना कूटने के समय पूजा में शामिल किए जाते हैं। दीपावली की पूजा में गणेश लक्ष्मी जी के समक्ष भाई की दीर्घायु का संकल्प लिया जाता है। फिर इन्हीं सामग्रियों को लेकर भैया दूज के दिन बहनें एकत्रित होकर प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए गोवर्धन को साक्षी मानकर पूजा करती हैं।

इसीलिए दी जाती है गाली
सदियों पुरानी इस परंपरा का बखूबी निर्वहन किया जाता है। भैया दूज के दिन बहनें जहां अपने भाई को गाली देने की प्राचीन परंपरा को निभाती हैं और यमराज से भाई के लिए लंबी उम्र का आशीर्वाद भी मांगती है।












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