आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव: अखिलेश ने प्रचार में न जाकर किया धर्मेंद्र के साथ ''विश्वासघात" ?
लखनऊ, 22 जून: उत्तर प्रदेश में रामपुर और आजमगढ़ में लोकसभा उपचुनाव के लिए प्रचार समाप्त हो चुका है। रामपुर और आजमगढ़ सीटें फिलहाल समाजवादी पार्टी के पास थीं और ये सीटों सपा के कद्दावर नेता आजम खान और सपा के चीफ अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद खाली हुईं थीं। आजमगढ़ में अखिलेश ने अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को चुनाव मैदान में उतारा है लेकिन सोशल मीडिया के साथ ही विरोधी भी इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि अखिलेश आखिरकार अपने परिवार के सदस्य धर्मेंद्र यादव के लिए प्रचार करने क्यों नहीं पहुंचे। क्या अखिलेश ने उनके साथ्ज्ञ विश्वासघात किया या फिर जीत को लेकर उनके मन में ओवरकांफिडेंस था इसलिए नहीं गए।

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सपा चीफ अखिलेश को आजमगढ़ में जीता का पूरा भरोसा
आजमगढ़ से सांसद रहे अखिलेश यादव के इस्तीफे की वजह से यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में यहां अब अखिलेश के भाई धर्मेंद्र चुनाव लड़ रहे हैं। काफी कशमकश के बाद अखिलेश ने धर्मेंद्र को चुनाव मैदान में उतारा था। इसको लेकर भी डिंपल यादव का नाम सामने आया था। बहरहाल अखिलेश पूरे प्रचार के दौरान आजमगढ़ नहीं गए। सपा के रणनीतिकारों की माने तो अखिलेश के आजमगढ़ न जाने की दो वजहें हैं। पहली वजह ये की वो यादव और मुस्लिम के बीच आपसी ध्रुवीकरण को रोकना चाहते थे। दूसरी यह कि आजमगढ़ लोकसभा की सभी पांच सीटें सपा के पास हैं लिहाजा उनको विश्वास है कि धर्मेंद्र आसानी से चुनाव जीत जाएंगे।
योगी और आजम की सभाएं लगीं लेकिन अखिलेश नहीं गए
आजमगढ़ में चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए सीएम योगी भी पहुंचे थे। उन्होंने वहां दो सभाएं की। योगी रामपुर भी गए और वहां भी प्रचार किया और अखिलेश यादव के साथ ही आजम खां पर भी जोरदार हमला बोला था। आजम खां हालांकि आजमगढ़ में चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे और उन्होंने मुस्लिम समुदाय से सपा के प्रत्याशी को जिताने की अपील के साथ ही अपने उपर हुए अत्याचार की भी याद दिलाई थी। एक तरफ जहां बीजेपी इन दोनों सीटों पर पूरा जोर लगा रही थी वहीं अखिलेश का आजमगढ़ न जाना काफी लोगों को खटक रहा है। लोग इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि आखिर अखिलेश ने ऐसा कदम क्यों उठाया।
अखिलेश का न जाना क्या सपा की रणनीति का हिस्सा था
आजमगढ़ उपचुनाव में जुटे सपा के नेताओं की माने तो अखिलेश का आजमगढ़ न आना एक रणनीति का हिस्सा था। अखिलेश यहां आकर केवल मुस्लिम हितैषी वाली छवि नहीं बनाना चाहते थे। इससे पार्टी को नुकसान होने की आशंका थी। आजमगढ़ आकर यदि अखिलेश मुस्लिम कॉर्ड और आजम का नाम लेते तो गैर मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण बीजेपी के पक्ष में हो सकता था। एक तरह से सधी हुई रणनीति के तहत अखिलेश आजमगढ़ में प्रचार करने पहुंचे ताकि मुस्लिम और यादव के साथ ही गैर यादव हिन्दू मतों को भी सहेजा जा सके।
बीजेपी ने अखिलेश पर क्यों बोला हमला
आजमगढ़ में अखिलेश के न पहुंचने को लेकर अब बीजेपी उनपर तंज कस रही है। बीजेपी का कहना है कि एक तरफ जहां बीजेपी के उम्मीदवार निरहुआ आजमगढ़ की जनता के बीच डटे हैं वहीं अखिलेश वहां से फरार हो गए हैं। वह जनता के बीच जाकर भी क्या मुंह दिखाएंगे। बीजेपी के प्रवक्ता अवनीश त्यागी कहते हैं, आजमगढ़ की जनता के सामने मुलायम परिवार की कलई खुल चुकी है। उनके पास आजमगढ़ की जनता के सवालों का जवाब नहीं है इसलिए वह वहां से मुंह छिपाकर भाग गए हैं।












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