Ayodhya: अब विदेश में बैठे भारतीय भी राम मंदिर निर्माण में कर सकेंगे सहयोग, गृह मंत्रालय की FCRA को मंजूरी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए विदेश से धन प्राप्त करने की अनुमति दे दी है। माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट एक्स(पूर्व में ट्विटर) पर ट्रस्ट ने कहा कि गृह मंत्रालय (भारत सरकार) के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) सेक्शन ने विदेशी स्रोतों से स्वैच्छिक योगदान स्वीकार करने के लिए ट्रस्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को पंजीकृत किया है।
इसमें कहा गया है कि इस तरह का योगदान केवल निर्दिष्ट बैंक खाते में भेजा जा सकता है। ट्रस्ट की किसी भी शाखा या किसी अन्य बैंक खाते में ऐसा कोई योगदान स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों के मुताबिक, विदेशी फंड प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठन या ट्रस्ट केवल भारतीय स्टेट बैंक, संसद मार्ग शाखा में अपना एफसीआरए खाता खोल सकते हैं। मंदिर निर्माण का काम देख रहे ट्रस्ट ने इसी साल जून में एफसीआरए लाइसेंस के लिए आवेदन किया था।

2020 में गठित, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र देश भर के तीर्थयात्रियों और व्यक्तियों के योगदान के माध्यम से धन एकत्र कर रहा है। लेकिन, अब तक विदेशों में बसे भारतीयों से धन प्राप्त नहीं कर पाया है।
1 जनवरी, 2024 को बनकर तैयार हो जाएगा राम मंदिर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी में कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर 1 जनवरी, 2024 को बनकर तैयार हो जाएगा। मंदिर की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त, 2020 को रखी थी। राम मंदिर का भव्य उद्घाटन अगले साल 21 जनवरी से 24 जनवरी के बीच प्रस्तावित है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि होंगे।
बता दें कि भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 9 नवंबर, 2019 को सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया था कि अयोध्या में वह जमीन जहां बाबरी मस्जिद थी, वह राम लला की है।












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