'कासगंज हिंसा के पीछे आरएसएस, भगवा ने ले ली युवक की जान'

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कासगंज में जिस तरह से 26 जनवरी को हिंसा भड़की उसके बाद बरेली के डीएम का फेसबुक पोस्ट काफी चर्चा का विषय बना था, जिसमे उन्होंने कहा था कि तिरंगा यात्रा मुस्लिम इलाके में निकालकर लोगों को भड़काया गया। इसके बाद एक बार फिर से सहारनपुर में एक अधिकारी तिरंगे के बारे में बयान दिया है जिसको लेकर वह चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा की वजह से यह घटना हुई और इसके पीछे भगवा का हाथ है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं जब इस फेसबुक पोस्ट के बारे में सहारनपुर की डेप्युटि डायरेक्टर (स्टैटिस्टिक) रश्मि वरुण से सफाई मांगी गई तो उन्होंने अपना पोस्ट डीलीट कर दिया।

kasganj

डीलीट किया फेसबुक पोस्ट

अपने बयान पर सफाई देते हुए रश्मि ने कहा कि उन्होंने भगवा शब्द का गलत इस्तेमाल किया था, लेकिन उन्होंने यह गलती जानबूझकर नहीं की थी। उन्होंने कहा कि अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि आखिर कैसे चंदन गुप्ता की मौत हो गई। मैं यह कहना चाहती हूं कि जब भीड़ में लोग गोली चला रहे थे तो किसी की भी गोली चंदन को लग सकती थी और उसकी मौत गई। इस मामले में अभी तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमे मुख्य आरोपी सलीम जावेद और राहत कुरैशी शामिल हैं। राहत को शनिवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि सलीम बुधवार को गिरफ्तार हुआ है, जिसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

रश्मि का फेसबुक पोस्ट

रश्मि ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि तो ये थी कागंज की तिरंगा रैली, कोई नई बात नहीं है ये, अंबेडकर जयंती पर सहारनपुर सड़क दुधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी। जिसमे से अंबेडकर गायब थे, या ये कहिए भगवा रंग में विलीन हो गए थे। कासगंज में भी यही हुआ, तिरंगा तो शवासन में रहा। भगवा ध्वज शीर्ष पर था, जो लड़का मारा गया है उसे किसी दूसरे तीसरे समुदाय ने नहीं मारा। उसे केसरी, सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा। जो नहीं बताया जा रहा है वो ये कि अब्दुल हमीद की मूर्ति या तस्वीर पे तिरंगा फहराने की बजाए इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गई और केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पे लाल रंग भारी पड़ गया।

26 जनवरी को हुई हिंसा

आपको बता दें कि 26 जनवरी को कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान दो गुटों में झड़प हो गई थी, जिसमे चंदन गुप्ता नाम के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया था और भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। यही नहीं यहां किसी भी तरह की अफवाह नहीं फैले उसके लिए इंटरनेट की सेवा को रोक दिया गया था। इस घटना के बाद अगले तीन-चार दिन तक तनाव बरकरार रहा था और उपद्रवियों ने कई गाड़ियों को आग लगा दी थी।

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