UP News: 2024 में छोटे दलों को साधने की फिराक में अखिलेश यादव, जानिए क्या है PDA की रणनीति
Akhilesh Yadav: तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड जीत हासिल हुई थी। इन नतीजों के बाद अब समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में छोटे दलों के साथ गठबंधन करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के रणनीतिकारों की माने तो अपना आधार बढ़ाने की कोशिश में जुटी सपा का फोकस पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्याक) पर रहेगा।

छोटे दलों के साथ गठबंधन की रणनीति का 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा को अच्छा फायदा मिला था। इसने राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, महान दल, अपना दल (कमेरावादी) और जनवादी सोशलिस्ट पार्टी (अब इसका नाम बदलकर जन जनवादी पार्टी) सहित कुछ अन्य पिछड़ा वर्ग-आधारित छोटे दलों के साथ गठबंधन किया था।
यूपी विधानसभा की राज्य की कुल 403 सीटों में से सपा ने 111 सीटें जीती थीं। इस छत्र गठबंधन के साथ, एसपी का वोट शेयर भी 2017 के विधानसभा चुनावों में 21.82 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गया, जब उसने कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ते हुए केवल 47 सीटें जीती थीं।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि,
INDIA गठबंधन की कुछ बड़ी पार्टियां सपा को केवल यूपी में आधार वाली पार्टी बताकर उसकी ताकत को कम कर रही हैं। इसलिए सपा छोटे दलों से हाथ मिलाकर अपनी ताकत बढ़ा रही है। राजस्थान में सपा नेता राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के हनुमान बेनीवाल के संपर्क में हैं। पीडीए गठबंधन को विकसित करने के लिए अखिलेश काम कर रहे हैं. अगर इस फॉर्मूले से लोकसभा चुनाव में सपा की सीटें बढ़ती हैं तो इससे इंडिया ब्लॉक के नेताओं के बीच अखिलेश की स्थिति मजबूत होगी।
पिछले महीने अखिलेश लखनऊ में ओम प्रकाश राजभर के पूर्व सहयोगी महेंद्र राजभर द्वारा स्थापित सुहेलदेव स्वाभिमान पार्टी (एसएसपी) के एक सम्मेलन में मुख्य अतिथि थे। ओम प्रकाश राजभर से नाता तोड़ने के बाद महेंद्र ने अपना अलग संगठन बना लिया। राजभर 2022 के यूपी चुनाव में सपा के सहयोगी थे, लेकिन बाद में वह गठबंधन से बाहर हो गए और इस साल की शुरुआत में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन खेमे में शामिल हो गए।
पिछले सितंबर में हुए घोसी विधानसभा उपचुनाव में, जब ओम प्रकाश राजभर भाजपा उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे थे, तो महेंद्र ने चुनाव जीतने वाले सपा उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया। अपनी पार्टी के सम्मेलन में, महेंद्र ने दावा किया कि राजभर समुदाय को केवल अखिलेश से सम्मान और उनके उचित अधिकार मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने घोसी उपचुनाव में उनकी पार्टी की जीत में राजभरों के योगदान को स्वीकार किया।
दरअसल, हाल ही में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान मौर्य ने सपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया था। हालांकि, उनका गठबंधन वहां कोई सीट नहीं जीत सका। एमपी की जतारा सीट पर सपा उम्मीदवार आरआर बंसल को सिर्फ 15,060 वोट मिले। 2018 में जब उन्होंने एमडी के टिकट पर अलग से चुनाव लड़ा था तो उन्हें 26,600 वोट मिले थे।
सपा प्रवक्ता और राष्ट्रीय सचिव राजीव राय ने वनइंडिया,
अखिलेश यादव समान विचारधारा वाली पार्टियों को एक साथ ला रहे हैं। ये नई पार्टियां हैं जिनका अपना जनाधार है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर अभी कुछ तय नहीं हुआ है लेकिन इन पार्टियों का समर्थन चुनाव में बीजेपी को हराने में मददगार होगा।












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