MLC चुनाव: अखिलेश यादव की बड़ी चूक का लाभ उठा रही BJP, जानिए इसकी वजहें
लखनऊ, 03 अगस्त : उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुभवहीनता का लाभ क्या बीजेपी आसानी से उठा रही है। पिछले चार महीने में कई ऐसे मौके आए जब लगा कि अखिलेश अभी राजनीति के कच्चे खिलाड़ी तो नहीं हैं। ऐसा ही वाकया उस समय आया जब समाजवादी पार्टी की ओर से MLC के लिए जो महिला उम्मीदवार घोषित की गईं थीं उनका पर्चा खारिज हो गया। बताया गया कि उनकी उम्र कम होने की वजह से पर्चा खारिज हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सवाल ये उठता है कि क्या उम्मीदवार घोषित करने से पहले इन सारे पहलुओं को चेक नहीं किया गया था।

राष्ट्रपति चुनाव में सहयोगियों को नहीं संभाल पाए अखिलेश
अखिलेश यादव को अपनी अनुभवहीनता की वजह से सपा को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ा है। राष्ट्रपति चुनाव में वह अपने सहयोगियों एसबीएसपी के ओम प्रकाश राजभर और चाचा शिवपाल यादव को नहीं संभाल पाए। नतीजा ये हुआ कि दोनों वोट करने बीजेपी के पाले में चले गए। इसी तरह रामपुर और आजमगढ़ में हुए लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश प्रचार करने तक नहीं निकले। उनकी अकुशल रणनीति की वजह से बीजेपी ने दोनों सीटों पर जीत हासिल कर ली। ये दोनों सीटें सपा का गढ़ मानी जाती थी। इसी तरह अब एक चूक विधान परिषद में हुई है जब एक ऐसी महिला को उम्मीदवार बना दिया गया जो विधान परिषद की सदस्यता के मानदंड भी नहीं पूरे कर रहीं थीं।
नवरत्नों पर भरोसा अखिलेश को पहुंचा रहा नुकसान
समाजवादी पार्टी के सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव अपने नवरत्नों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं जिनकी वजह से उनकी फजीहत हो रही है। सपा के रणनीतिकारों की चूक की वजह से बीजेपी के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया। सूत्रों की माने तो दरअसल अखिलेश यादव की टीम में पुराने नेताओं की बजाए नए नवरत्न शामिल हो गए हैं जिनकी सलाह पर अखिलेश ये फैसले ले रहे हैं। कीर्ति कोल के नामांकन से पहले उनके जन्मतिथि तक को न चेक करना ये बताता है कि अखिलेश यादव के रणनीतिकारों की रणनीति में काफी झोल है।
कीर्ति कोल के नामांकन रद्द होने से बीजेपी को मिला फायदा
विधान परिषद चुनावों के लिए समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कीर्ति कोल का नामांकन पत्र मंगलवार को अमान्य पाया गया था। सपा की इस चूक का फायदा भाजपा को मिल गया। बीजेपी के दोनों उम्मीदवारों धर्मेंद्र सिंह सैंथवार और निर्मला पासवान के निर्विरोध चुनाव का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया। इसके साथ ही अब राज्य के उच्च सदन में भाजपा की ताकत 75 हो जाएगी।
दरअसल मिर्जापुर की आदिवासी महिला उम्मीदवार कीर्ति कोल ने अपनी उम्र 28 वर्ष बताई है जबकि परिषद चुनाव के लिए योग्यता आयु 30 वर्ष है। सैंथवार और पासवान का नामांकन वैध पाया गया। तीनों उम्मीदवारों ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन करने का आखिरी दिन था। सैंथवार भाजपा के गोरखपुर क्षेत्र के अध्यक्ष हैं, जबकि पासवान काशी क्षेत्र की उपाध्यक्ष हैं।
अहमद हसन और जयवीर सिंह की वजह से खाली हुई हैं दो सीटें
सपा के वरिष्ठ नेता अहमद हसन के निधन के बाद खाली हुई सीट के लिए सैंथवार ने अपनी उम्मीदवारी दाखिल की है, वहीं पासवान यूपी विधानसभा में चुनाव के बाद भाजपा के ठाकुर जयवीर सिंह द्वारा खाली की गई सीट को भरेंगे। राज्य विधानसभा में 273 विधायकों की ताकत को देखते हुए भाजपा अपने उम्मीदवारों के लिए एक आसान जीत सुनिश्चित कर चुकी है। कीर्ति ने हाल ही में यूपी का विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह अपना दल (एस) के राहुल कोल से लगभग 38,000 मतों के अंतर से हार गईं थीं।












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