योगी राज की ये भी है हकीकत, सरकारी योजनाओं से वंचित एक नेत्रहीन गरीब मां
आगरा। न मुफ्त गैस कनेक्शन मिला, न मुफ्त बिजली कनेक्शन और न ही आवास योजना का लाभ मिला, मिली तो सिर्फ सरकारी दफ्तरों से दुत्कार। ये दास्तान उस 80 वर्षीय नैनी देवी की है जो सरकारी योजनाओं के इन्तजार में अपनी आंखों की रोशनी गंवा चुकी है। नैनी देवी अपने परिवार के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। मामला आगरा के ब्लॉक पिनाहट के गांव मोदीपुरा का है जहां 80 वर्षीय नैनी देवी का परिवार मिट्टी की झोपड़ी में रहता है।

टूटी हुई झोपड़ी में रहता है नैनी देवी का परिवार
घास फूस से बनी छत, कच्ची मिट्टी की दीवारें, बांस बल्लियों का लेंटर। यही 10 फुट का नैनी देवी का आशियाना है, जिसे आप झोपड़ी के रूप में देख रहे है। इस झोपड़ी में एक चारपाई और कच्ची मिट्टी के बर्तन और दो मीटर रस्सी पर लटके कपड़े नैनी देवी का खजाना है जिसमें वो अपने दो बेटों के साथ रहती है। नैनी देवी के बेटों का परिवार भी इसी झोपड़ी में गुजर-बसर करता है।

आंखों की रोशनी गंवा चुकी नैनी देवी
दरअसल आगरा के ब्लॉक पिनाहट के गांव मोदीपुरा की रहने वाली नैनी देवी जन्म से अंधी नही है। सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते नैनी देवी नेत्रहीन तो जरूर हो गई लेकिन उसे सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला। मां की आंखों की रोशनी जाने के बाद उसके बेटों ने सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिये कई साल से लगातार प्रार्थना पत्र दिये। यहां तक कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री तक को पत्र के माध्यम से यह परिवार अपनी वेदना बता चुका है लेकिन अब तक यह परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है।

योगी सरकार के दावे हवा-हवाई!
80 वर्षीय बुजुर्ग नैनी देवी के दो बेटे हैं जो मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सरकारी नियमों की मानें तो नैनी देवी को मुफ्त गैस कनेक्शन, मुफ्त बिजली कनेक्शन और सरकारी योजनाओं से आवास मिलना था लेकिन न जाने ऐसी कौन सी अपात्रता है जिससे शिकायती पत्रों का गठ्ठर लिये यह परिवार आज भी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। वहीं सरकार से योजनाओं के लाभ की राह देख रहा है। कहने को तो केन्द्र से लेकर उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल करने वाली बीजेपी ने बड़े-बड़े दावे किये थे। वे दावे भी हवा-हवाई साबित हुए हैं। यही वजह है कि न जाने कितनी ऐसी नैनी देवी हैं जिनके परिवार पात्र होते हुए भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। यह इस बात को साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर तैनात अधिकारी सरकारी योजनाओं की बलि चढ़ाने में लगे हैं।

सरकारी अधिकारियों ने अावेदन पर नहीं की कार्रवाई
नैनी देवी ने बताया कि यहां करीब 12-14 वर्ष हो गये रहते-रहते, कोई आवास नहीं मिला, कोई सुनवाई नहीं करता है, कई बार दरखास्त दिए गये लेकिन कुछ नहीं हुआ। नैना देवी के बेटे ने बताया कि डीएम, सीडीओ, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री तक को पत्र लिख चुका हूं, कोई सुनवाई नही हुई है। मैं चाहता हूं कि मुझे एक आवास मिल जाये जिसमें मैं अपनी मां और परिवार के साथ रह सकूं। मेरे प्रार्थना पत्र की जांच करने पंचायत सचिव आता है लेकिन अपने स्तर से उल्टा-सीधा रिपोर्ट लगा वापस भेज देता है। यहां तक कि मुझे शौचालय भी नहीं मिला है। फटी और टूटी इस घास फूस की झोपड़ी में अपनी बूढ़ी मां के साथ जीवन यापन कर रहा हूं।












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