गजब का फर्जीवाड़ा! एक पिता के 5 बच्चे, 2 OBC और 3 SC; एक ने तो आरक्षित सीट पर चुनाव भी जीता
यूपी के गाजियाबाद में सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए एक परिवार ने ऐसा हैरान कर देने वाला फर्जीवाड़ा किया, जिसे देख अधिकारीयों का भी सर चकरा गया। यहां एक पिता ने अपनी पांच संतानों में दो का SC यानी अनुसूचित जाति और 3 का OBC यानी पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाणपत्र बनवा लिया। हद तो तब हो गई जब इन्हीं में से एक ने भाजपा के टिकट पर एससी का प्रमाणपत्र लगाकर पार्षदी का चुनाव भी जीत लिया।
दरअसल, हाल ही में हुए निकाय चुनाव 2023 में गाजियाबाद के विजयनगर वार्ड-26 सुंदरपुरी में पार्षदी की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। जिसके चलते यहां के निवासी राजकुमार पुत्र गोकुलचंद ने एससी का प्रमाणपत्र लगाकर भाजपा के टिकट पर पार्षद पद के लिए नामांकन कर दिया। इसके बाद राजकुमार चुनाव जीतकर पार्षद भी बन गए। पोल तब खुली जब चुनाव जीतने के बाद डीएम से किसी ने इस मामले की शिकायत कर दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता का कहना था कि राजकुमार ने चुनाव में अपनी जाति कोरी बताई है, जबकि वे मल्लाह हैं। इसपर डीएम राकेश कुमार सिंह ने एसडीएम से इस मामले की जांच करने को कहा। एसडीएम की रिपोर्ट में सामने आया कि राजकुमार ने कोरी जाति का प्रमाणपत्र लगाया है, जो यूपी में अनुसूचित जाति मानी गई है। उधर, भारतीय शिक्षा संस्थान जूनियर हाईस्कूल गाजियाबाद से प्राप्त टीसी के अनुसार राजकुमार की जाति मल्लाह थी।
इसके बाद राजकुमार का एससी वाला जाति प्रमाणपत्र निरस्त किया गया। दूसरी ओर आरोपी पार्षद राजकुमार के भाई वेद प्रकाश और हरबंश लाल ने मल्लाह जाति का प्रमाणपत्र बनवाया है। जो यूपी में पिछड़ा वर्ग मानी जाती है। इसके अलावा राजकुमार के एक भाई मदनलाल ने खुद को कोरी बताकर जाति प्रमाणपत्र बनवाया है। राजकुमार की बहन सीमा पत्नी पवन कुमार ने हरियाणा के अंबाला कैंट से जाति प्रमाणपत्र बनवाया। इसमें भी उनकी जाति कोरी बताई गई है।
इसके बाद इनके पैतृक गांव की जानकारी मांगी गई। इसपर राजकुमार के भाई वेद प्रकाश ने खुद का जन्म बाराबंकी जिले के मल्लापुरवा गांव में होना बताया। हालांकि अभी भी इस परिवार के सदस्य अपनी अलग-अलग जातियां बता रहे हैं। एसडीएम ने फिलहाल गाजियाबाद की तहसील सदर से जारी राजकुमार का प्रमाणपत्र निरस्त करने की आख्या डीएम को भेज दी है।
एसडीएम सदर विनय कुमार सिंह के अनुसार डीएम के आदेश पर प्रमाणपत्र की जांच की गई थी। जांच में सामने आया कि यह प्रमाणपत्र गलत दस्तावेज देकर बनवाए गए थे। फिलहाल उसे निरस्त करते हुए आख्या डीएम को भेजी गई है।
वहीं गाजियाबाद के सहायक निर्वाचन अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि चुनाव जीतने के बाद यदि प्रत्याशी का जाति प्रमाणपत्र गलत पाया जाता है तो मामला कोर्ट में चला जाता है। अदालत उसके निर्वाचन पर फैसला सुनाती है।
गौरतलब है कि गाजियाबाद के कुल 25 वार्डों के मामले कोर्ट में पहले से ही विचाराधीन हैं। अब वार्ड 26 का मामला भी कोर्ट भेजा जाएगा। यहां ज्यादातर मामले फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने के ही हैं।












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