Bandhabgarh Tiger Reserve: जवान शावकों का बाघिनों के प्रति बढ़ रहा आकर्षण, टैरिटरी की भी तलाश
Bandhavgarh Tiger Reserve : बांधबगढ़ टाइगर रिजर्व में वयस्क हो रहे बाघ शावकों को अपने-अपने टैरिटरी की तलाश है। लगभग 2 वर्षों की उम्र के बाघ शावक अपने अड्डे से अलग होकर अपना नया ठिकाना बनाते हैं। उन्हें आजादी का आभाष होता है। वह किसी से भी नहीं डरते। यह वयस्क बाघ शावक जंगल के अलग-अलग इलाकों में अपना कब्जा जमाते हैं। इस दौरान उन्हें कई बार दूसरे वयस्क बाघों से वर्चस्व की लड़ाई में जान भी चली जाती है। तो कई बार वह बूढ़े हो चुके बाघों पर हमला कर उन्हें ही मार डालते हैं।

कई बार बूढ़े बाघ मारे जाते हैं
इस तरह एरिया की लड़ाई में पशु संग्राम शुरू हो जाता है। इस पशु संग्राम में कई बार वयस्क बाघों पर भी मौत का खतरा बना रहता है और कई बार बूढ़े बाघ मारे जाते हैं। वयस्क नर एवं मादा बाघ एक दूसरे की तलाश में अपने अड्डे से अलग होकर अपने आप को आजादी महसूस करते हैं। इनके अलग होने का मुख्य कारण भी यही होता है कि, यह एक दूसरे की तलाश में रहते हैं। अपना अपना टेरिटरी और एरिया बनाने के लिए अन्य बाघों पर हमला करते हैं। चाहे वह बूढ़े बाघ हो या फिर वयस्क बाघों में भी उनसे कमजोर बाघ हो।

बाघिनों के प्रति बढ़ता आकर्षण
पशु संग्राम का सबसे ज्यादा डर उन नन्हें वयस्क बाघों को होता है, जो अभी वयस्क बाघों की तुलना में कम महीने के होते हैं। साथ ही उनकी ताकत इतनी नहीं होती कि, वह इन नए वयस्क बाघों से खतरा मोल ले सकें। नर वयस्क बाघों का मादा वयस्क बाघिनों के प्रति बढ़तआ आकर्षण इन छोटे बाघ शावकों के मृत्यु की वजह भी होता है। नर वयस्क बाघ मादा वयस्क बाघिनों के समीपत्य को चाहता है। ऐसी स्थितियों में नर वयस्क बाघ पहले छोटे वयस्क सावक पर अटैक करते हैं और उन्हें मारने की कोशिश करते हैं।

टाइगर रिजर्व के बाघों की संख्या
आज की स्थिति में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में स्पाटी बाघिन के 3 शावक हैं। जिनकी आयु 30 महीने की है। इसी तरह दररहा बाघिन के 3 शावक 28 महीने के हैं। डाटी बाघिन के चार शावक 26 महीने के तो डाभाडोल फीमेल के 2 शावक 28 महीने के हैं। तारा के चार शावक 30 महीने के हैं। चटाईपाक के तीन शावक 30 महीने के हैं। इसी तरह चक्रधरा के तीन शावक 25 महीने के हैं। बफर के दो शावक 26 महीने के हैं। इसके अलावा भी कई शावक जो दो वर्ष के हो चुके हैं।

रॉ के पीछे बजरंग दीवाना
टाइगर रिजर्व में कुछ महीने पहले एक अनोखी प्रेम कहानी की भी चर्चा थी यहां के बाघ -बाघिन की प्रेम कहानी खूब सुर्खियां बटोरी थी इस कहानी के किरदार रॉ और बजरंग थे। रॉ, टाइगर रिजर्व की बाघिन थी, जबकि बजरंग बाघ। बजरंग के प्यार में रॉ भद्रशिला तालाब और उसके आसपास आना-जाना बदस्तूर जारी था। इस क्षेत्र में सक्रिय बजरंग यहां रॉ के शावकों के आने जाने में भी खलल नहीं डाल रहा था,












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