महाकाल लोक की मूर्तियां गिरने का लोकायुक्त ने लिया संज्ञान, निशाने पर तत्कालीन कांग्रेस की कमलनाथ सरकार
महाकाल लोक में तेज आंधी-हवा से सप्तऋषि की 6 मूर्ति गिरने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अभी तक नगरी प्रशासन मंत्री इसमें हुए भ्रष्टाचार की खबर को नकार रहे थे, लेकिन अब लोकायुक्त की टीम इस मामले में जांच करेगी।

उज्जैन नगरी में स्थित महाकाल मंदिर में तेज आंधी तूफान के चलते भव्य महालोक परिसर में सप्त ऋषि की 6 मूर्तियां गिरकर खंडित हो गई थी। अब इस मामले में नया मोड़ ले लिया है। अब तक कांग्रेस शिवराज सरकार पर श्री महाकाल महालोक के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही थी, लेकिन अब लोकायुक्त की 3 सदस्य टीम इस मामले में कांग्रेस की तत्कालीन कमलनाथ सरकार के खिलाफ 3 जून से जांच करेगी।
बता दे इससे पहले कांग्रेस विधायक ने जब लोकायुक्त भ्रष्टाचार की शिकायत की थी तब कुछ अधिकारियों को नोटिस थमाया गया था बाद में यह मामला दब गया था। उस समय जांच हुई तो लोकायुक्त की प्रथम दृष्टया जांच में आरोप सही पाए जाने की बात भी सामने आई थी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी इसके दावे किए गए हैं। बताया गया कि तीन आईएएस तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अध्यक्ष आशीष सिंह, उज्जैन स्मार्ट सिटी के तत्कालीन कार्यपालक निदेशक क्षितिज सिंघल और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता समेत 15 अफसरों को नोटिस जारी किया गया था। लेकिन अब लोकायुक्त संगठन ने नई शिकायत दर्ज की है। लोकायुक्त की तीन सदस्य तकनीकी टीम 3 जून को जांच के लिए उज्जैन रवाना होगी। तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय योजना की मंजूरी और बजट आवंटन संबंधी पत्रावलियों का अवलोकन करेगी।
लोकायुक्त यहां पर निर्माण कार्य से जुड़े दस्तावेज भी लेगी। इसमें तकनीकी निविदा और वित्तीय निविदा से जुड़े कागजात भी लिया जाएंगे। बता दे मूर्तियां गिरने के बाद मामले में राजनीति तेज हो गई है कांग्रेस की 5 सदस्य टीम ने बुधवार को उज्जैन पहुंच कर महाकाल लोक में निर्माण कार्यों की गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
महाकाल महालोक के निर्माण के लिए कमलनाथ सरकार ने 300 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे और कार्यादेश 7 मार्च 2019 को जारी किया था। भाजपा प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जबरिया राजनीति कर महाकाल लोक के मामले में प्रदेश को बदनाम कर रही है।
लोकायुक्त इन बिंदुओं पर करेगी जांच
महाकाल लोक में मूर्तियां एफआरपी (फाइबर रीइनफोर्स प्लास्टिक) की लगेंगी यह निर्णय किस स्तर पर लिया गया था? क्या संबंधित सप्लायर ने मूर्तियां प्रस्तावित मानक के अनुसार बनाई है? जहां मूर्तियां स्थापित की गई थी क्या वहां का आधार कमजोर था? मूर्तियों की स्थापना में किसी तरह का भ्रष्टाचार तो नहीं हुआ?












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