इस बार मानसून के दिनों गुजरात में ज्‍यादा निकले विषधर, एक ही शहर से पकड़े गए 1 हजार सांप

सूरत। गुजरात में लोगों को इस साल ज्‍यादा सांप नजर आए। यहां एक ही शहर सूरत से इस साल 15 जून से 15 सितंबर के बीच विभिन्न क्षेत्रों से 1 हजार से ज्‍यादा सांपों को रेस्‍क्‍यू किया गया। जो सांप पकड़े गए, उनमें एक से एक जहरीले सांप थे। स्‍नेक एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि, सूरत में जहरीले सांपों में कोबरा और रसेल वाइपर के अलावा, सोस्कल वाइपर और ब्लैक स्नेक पाए गए। जिनमें 3 सोस्केल वाइपर थे। वहीं, गैर विषैले सांपों के अलावा धामन, देंडवो, केकायु, आंधली चाक्रन, रूपसुंदरी और वुल्फ स्नेक आदि शामिल थे।

15 जून से 15 सितंबर तक बचाए गए 1 हजार से ज्‍यादा सांप

15 जून से 15 सितंबर तक बचाए गए 1 हजार से ज्‍यादा सांप

सूरत स्थित प्रयास संगठन के दर्शनभाई ने बताया कि, इस साल शहर के विभिन्न क्षेत्रों से सांपों के संदर्भ में लोगों के 1 हजार से ज्‍यादा कॉल आए। इतने सांपों को 15 जून से 15 सितंबर के बीच शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पकड़ा गया। उन्‍होंने कहा कि, पिछले साल की तुलना में इस साल सांपों के देखे जाने की संख्या में 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। उन्‍होंने कहा कि, मानसून के मौसम की शुरुआत के साथ ही शहरों में सरीसृपों की घटना बढ़ने लगती है। कई बार रिहायशी इलाकों में सर्पदंश के मामले भी सामने आ जाते हैं।

इस साल गुजरात में मानसून के दौरान निकले ज्‍यादा विषधर

इस साल गुजरात में मानसून के दौरान निकले ज्‍यादा विषधर

वहीं, स्‍नेक एक्‍सपर्ट् नीरज ने कहा कि, सांप ठंडे खून वाली प्रजातियां हैं इसलिए वे ठंड से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसलिए सांप सर्दियों में भूमिगत रहते हैं, लेकिन गर्मी और मानसून के दौरान, उनके संभोग के मौसम और जन्म देने के मौसम में, इसलिए इस दौरान वे जमीन से ऊपर आ जाते हैं। उन्‍होंने बताया कि, सर्दियों में सांपों को जमीन पर उतरने के लिए अधिक भोजन की आवश्यकता होती है, इसलिए सांप और उनके बच्चे भोजन की तलाश में निकल जाते हैं और मानसून के दौरान रिहायशी इलाकों में मिल जाते हैं।

पिछले साल करीब 900 सांपों को बचाया गया था

पिछले साल करीब 900 सांपों को बचाया गया था

वन्यजीव विभाग की ओर से कहा गया कि, गुजरात में कई प्रकार के विषैले सांप रहते हैं। किंग कोबरा भारत में पाया जाने वाला नाग है, जो बेहद जहरीला होता है। हैरत की बात यह है कि, पिछले साल की तुलना में इस साल तीन महीने में सांपों की 12 से 13 प्रजातियां देखी गई हैं। पिछले साल पूरे सीजन में करीब 850-900 सांपों को बचाया गया था। उन्‍होंने कहा कि, मानसून के दिनों सूबे में इस साल अधिक संख्या में दिखे।' एक रिपोर्ट के मुताबिक, आमजन की ओर से सांपों के बचाव के 1116 कॉल आए। हैं।

सांप बचाव संगठनों के मुताबिक, सूबे में बिना विसवाले सांपों में ब्रोन्स बैक ट्री सांप, लीलापन और गुखरी जैसे दुर्लभ सांप भी देखे गए हैं। इस साल सांपों के देखे जाने की संख्या में 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। जिसमें सोस्कल वाइपर और क्रेट जैसे विषैले सांपों को भी रेस्‍क्‍यू किया गया।

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