एशियन गेम्स में ट्रायल विवाद पर साक्षी मलिक ने तोड़ी चुप्पी, सरकार की ओर से आए फोन को लेकर किया बड़ा खुलासा

Asian Games 2023: एशियन गेम्स में ट्रायल के बिना सीधे ही दो पहलवानों के चयन को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में सोशल मीडिया पर खास खिलाड़ियों के चयन को लेकर जारी विरोध के बीच ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

पहलवान साक्षी मलिक ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, 'मुझे 3-4 दिन पहले सरकार की तरफ से फोन आया था कि हम बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को एशियन्स गेम के लिए भेज रहे हैं, आप भी मेल कर दो आपको भी भेज देंगे। मैंने साफ मना कर दिया। मैं कभी भी बिना ट्रायल के किसी टूर्नामेंट में न ही गई हूं और न जाना चाहती हूं।

sakshi malik

साक्षी मलिक ने इससे पहले सरकार की मंशा को लेकर एक बड़ा आरोप लगाते हुए ट्वीट कर लिखा, 'सरकार ने एशियन गेम्स में सीधे नाम भेजकर पहलवानों की एकता को तोड़ने का काम किया है। मैं न कभी बिना ट्रायल खेलने गई हूं और न ही इसका समर्थन करती हूं।'

उन्होंने आगे लिखा कि, 'सरकार की इस मंशा से विचलित हूं। हमने ट्रायल्स की डेट आगे बढ़वाने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने हमारी झोली में यह बदनामी डाल दी है।'

वहीं दूसरी ओर पहलवानों के चयन को लेकर अंतरराष्ट्रीय पहलवान योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने भी इस पर अपनी बड़ी प्रतिक्रिया दी है। योगेश्वर दत्त ने दिल्ली में भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) तदर्थ पैनल द्वारा एशियाई खेलों 2023 में सीधे प्रवेश के लिए पहलवान बजरंग पुनिया और विनेश फोगट को दी गई छूट के विरोध में प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि, 'पहली बार भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को इतने सारे खिलाड़ी मिले हैं, ये खिलाड़ी उम्मीदों के साथ आए हैं और गलत घटनाएं आगे नहीं बढ़नी चाहिए, आईओए चर्चा करेगा कि ट्रायल कैसे आयोजित किया जाए।'

प्रदर्शनकारियों ने पहलवानों को सीधे तौर पर दी गई छूट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, 'पत्र में उल्लेख किया गया है कि दो वजन श्रेणियों के तहत पहलवानों को सीधे प्रवेश मिलेगा। यह अनुचित है, यह पहलवानों की आत्महत्या है। यह पहलवानों के बीच सरासर भेदभाव है।

दरअसल, पहलवान विनेश फोगाट (53 किलोग्राम) और बजरंग पुनिया (65 किलोग्राम) को आईओए की एडहॉक कमेटी ने एशियन गेम्स के लिए बिना किसी ट्रायल सीधी एंट्री दी थी, जिसके बाद ट्रायल में छूट के मुद्दे पर कई राष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने आईओए के एडहॉक पैनल के फैसले को अनुचित करार दिया। इसके खिलाफ उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारी पहलवानों की मांग है कि प्रत्येक भार वर्ग में ट्रायल्स होना चाहिए।

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