Reetika Hooda Exclusive Interview: 'मैं भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाऊंगी', रितिका हुड्डा ने भरी हुंकार

Reetika Hooda Exclusive Interview: ओलंपिक हो या कॉमनवेल्थ कुश्ती में हरियाणा के पहलवानों ने हमेशा अपना दमखम दिखाया है। पुरिष ही नहीं यहां कि महिला पहलवान भी पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ने में सफल रही है। हैवीवेट कैटेगरी में इस साल पहली बार भारत के लिए एक महिला पहलवान ने क्वालीफाई किया है। 76 किलोग्राम भार वर्ग कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व हरियाणा की रितिका हुड्डा करती नजर आएंगी।

बचपन में हैंडबॉल खेलती थीं रितिका

ओलंपिक को लेकर वनइंडिया हिंदी ने रितिका हुड्डा से बातचीत कर उनके विचार जानने की कोशिश की है। रोहतक के खरकड़ा गांव की रहने वाली रितिका बचपन में हैंडबॉल खेलती थीं, लेकिन बाद में उसके पिता के कहने के बाद उसने कुश्ती को अपना लिया। वह 72 किलोग्राम वेट कैटेगरी में कुश्ती खेलती थी, लेकिन ओलंपिक में यह भार वर्ग नहीं होने के कारण उन्होंने 76 किलोग्राम वेट कैटेगरी में हिस्सा लिया।

Reetika Hooda 1

तैयारी को लेकर कही ये बात

रितिका हुड्डा ने कहा कि ओलंपिक के लिए तैयारी अच्छी रही है। नेशनल कैंप नहीं हो रहे थे तो हम अपने लोकल लेवल पर ही तैयारी करते थे। ओलंपिक से पहले दो महीने तक रोजना तीन से चार घंटे तक मैदान पर तैयारी की है। ओलंपिक में सभी खिलाड़ी एक्सपीरियंस वाले हैं, सबसे यंग मैं ही हूं। ऐसे में मुझे अपना बेस्ट परफॉर्मेंस देना होगा।

पिता के कहने पर आई कुश्ती में...

रितिका ने बताया कि पहले वह टीम गेम का हिस्सा हुआ करती थीं। लंबे समय तक वह हैंडबॉल खेल चुकी हैं। लेकिन पिता ने सुझाव दिया कि व्यक्तिगत खेल में अधिक मौके मिलते हैं। इसलिए उन्होंने आगे कुश्ती की तरफ अपना ध्यान मोड़ने का काम किया। रितिका ने कहा कि पेरिस उनका पहला ओलंपिक है और वह वहां से खाली हाथ नहीं लौटना चाहती हैं। उनकी ख्वाहिश है कि जब वह देश आए तो उनके गले में ओलंपिक का मेडल हो।

ओलंपिक में खेलना बड़ी बात

भारत के 140 करोड़ आबादी में से कुश्ती में पहली बार पांच महिला पहलवानों ने क्वालीफाई किया है। घर-परिवार के अलावा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ने काफी मदद की। खेलो इंडिया से बहुत फर्क पड़ा। खेलो इंडिया की वजह से एक नेशनल प्लेटफॉर्म मिला और इससे आगे की राह आसान हुई है। रितिका को भरोसा है कि वह भारत के लिए ओलंपिक में गोलड मेडल जीतकर लाएंगी।

कुश्ती के अलावा कुछ सोच नहीं सकती

अपने पिता की सलाह पर अमल करते हुए रितिका ने 2015 में कुश्ती की ओर रुख किया। रितिका ने बताया कि मेरे पिता मुझे छोटू राम अखाड़े में ले गए। मेरे कोच मंदीप ने मुझे एक खास आक्रमण करने को कहा और मेरे प्रदर्शन से खुश हुए, इसलिए उन्होंने मुझे इसमें शामिल कर लिया। अब कुश्ती ही मेरे लिए सबकुछ है। मैं इसके बारे में सोचती हूं और इसके सपने देखती हूं, मैं इसके अलावा कुछ और सोच ही नहीं सकती।

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