जिसने बनाया डी गुकेश को चेस का वर्ल्ड चैंपियन, उसी ने पूरा किया था धोनी-सचिन का सबसे बड़ा सपना

Gukesh D's Paddy Upton Factor: डोमराजू गुकेश ने शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। उन्होंने 18 साल की उम्र में दुनिया के सबसे युवा शतरंज चैंपियन बनने का कीर्तिमान स्थापित किया। इस जीत के साथ गुकेश ने भारतीय शतरंज के महान ग्रैंडमास्टर गैरी कास्पारोव को भी पीछे छोड़ दिया है। डी गुकेश की इस सफलता के पीछे माइंड गुरु पैडी अप्टन का बड़ा हाथ रहा है।

कौन हैं पैडी अप्टन

साउथ अफ्रीका के रहने वाले पैडी अप्टन क्रिकेट कोचिंग के अलावा खिलाड़ियों की मेंटल कंडिशनिंग के लिए जाने जाते हैं। पैडी अप्टन को भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का खास मित्र और सहयोगी माना जाता है। खासकर जब धोनी भारत के कप्तान थे तो वह पैडी अप्टन से काफी चट में रहा करते थे। अप्टन एक मेंटल एंड कंडिशनिंग कोच के रूप में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ जुड़े थे। साल 2008 से 2011 तक जब भारत ने धोनी की कप्तानी में कई बड़ी सफलता हासिल की तो अप्टन का योगदान अहम था।

D Gukesh

धोनी-सचिन का सपना हुआ था पूरा

साल 2008 से 2011 के दौरान अप्टन का ध्यान भारतीय टीम की मानसिकता को मजबूत करने में था। वह खिलाड़ियों को दबाव में कैसे प्रदर्शन करना है, इसका मार्गदर्शन करते थे और टीम को मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार करते थे। इस दौरान भारत ने 2007 में टी20 विश्व कप और 2011 में वनडे विश्व कप और 2010-2011 में एशिया कप जैसी बड़ी उपलब्धियां हासिल की थीं। सचिन तेंदुलकर का साल 2011 आखिरी वनडे वर्ल्ड कप था, ऐसे में अप्टन ने सचिन और धोनी के वर्ल्ड कप जीतने के सपने को पूरा किया था।

भारतीय हॉकी टीम के लिए किया ये काम

इसके अलावा पैडी अप्टन ने भारतीय हॉकी टीम को भी मानसिक रूप से सशक्त बनाने में योगदान दिया। उन्होंने भारतीय हॉकी टीम को अपनी खोई हुई विरासत को वापस पाने के लिए मानसिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन किया। उनका काम भारतीय खिलाड़ियों को मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास और खेल के प्रति सही दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता था।

गुकेश से ऐसे हुई थी मुलाकात

गुकेश का परिचय अप्टन से संदीप सिंघल ने कराया था जो विश्वनाथन आनंद के साथ वेस्टब्रिज आनंद शतरंज अकादमी के सह-संस्थापक हैं। पैडी अप्टन ने गुकेश के पहले विश्व शतरंज चैंपियनशिप बनने पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह से गुकेश ने खुद को संभाला, मैं उस पर बेहद गर्व करता हूं। 18 साल की उम्र में अपने पहले विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने खुद को परिपक्व तरीके से संभाला है। हमने कभी नहीं सोचा था कि वह हर चाल में सही चाल खेलेंगे या हर खेल में सही खेलेंगे या 14 खेलों के लिए सही टूर्नामेंट खेलेंगे।

आसान नहीं था गुकेश का सफर

शतरंज बुद्धि, रणनीति और हिम्मत की लड़ाई मानी जाती है। इस खेल में गलती की गुंजाइश बहुत कम है। अपने पहले विश्व चैम्पियनशिप मैच में एक खिलाड़ी द्वारा सामना किया जाने वाला दबाव बहुत अधिक होता है, क्योंकि मैग्नस कार्लसन जैसे अनुभवी चैंपियन ने भी इस तरह के उच्च-दांव वाले मैचों में अपने डेब्यू के दौरान घबराहट का अनुभव किया था। गुकेश के लिए यह कार्य और भी कठिन था क्योंकि उनका मुकाबला मौजूदा विश्व चैंपियन डिंग लिरेन से था। डिंग लिरेन के पास दशकों का अनुभव और कई पुरस्कार पाने का रिकॉर्ड रहा है।

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