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डी गुकेश की शतरंज जीत से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच छिड़ी जंग, अपना बताने में जुटे दोनों राज्य

गुरुवार को वर्ल्ड शतरंज चैंपियनशिप में गुकेश डोमराजू (Gukesh Dommaraju) की जीत ने न केवल शतरंज की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है, बल्कि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच श्रेय लेने की तीखी जंग भी छेड़ दी है।

गुकेश को अपना बताने की होड़
18 वर्षीय गुकेश की शानदार जीत ने उन्हें सबसे कम उम्र का निर्विवाद विश्व शतरंज चैंपियन बना दिया है, लेकिन जैसे-जैसे उनकी सफलता की खबर फैली, वैसे-वैसे दोनों राज्यों के दावे भी सामने आए, जिनमें से प्रत्येक ने गुकेश को अपना बताने की होड़ लगाई।

Gukesh Dommaraju

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने किया की पोस्ट
राज्य प्रतिद्वंद्विता में पहला ट्वीट तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने किया। गुरुवार को शाम 7:25 बजे, स्टालिन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें गुकेश को उनकी 'उल्लेखनीय उपलब्धि' के लिए बधाई दी गई और घोषणा की कि इस जीत ने चेन्नई की 'वैश्विक शतरंज राजधानी' के रूप में स्थिति को मजबूत किया है। स्टालिन के ट्वीट में गुकेश के गले में स्वर्ण पदक डालते हुए उनकी एक तस्वीर शामिल थी, जिसमें उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु को आप पर गर्व है।'

'तमिलनाडु को आप पर गर्व है'
स्टालिन ने लिखा कि, '18 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन बनने पर गुकेश को बधाई! आपकी उल्लेखनीय उपलब्धि भारत की समृद्ध शतरंज विरासत को जारी रखती है और चेन्नई को एक और विश्व स्तरीय चैंपियन देकर वैश्विक शतरंज राजधानी के रूप में अपनी जगह बनाने में मदद करती है। तमिलनाडु को आप पर गर्व है।'

'हमारा अपना तेलुगु लड़का'
हालांकि, स्टालिन के संदेश पोस्ट करने के तुरंत बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी गुकेश को 'हमारा अपना तेलुगु लड़का' बताते हुए ट्वीट किया।

नायडू ने एक्स पर पोस्ट किया कि, 'सिर्फ 18 साल की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के शतरंज चैंपियन बनकर सिंगापुर में इतिहास रचने पर हमारे अपने तेलुगु लड़के, भारतीय ग्रैंडमास्टर गुकेश को हार्दिक बधाई! पूरा देश आपकी अविश्वसनीय उपलब्धि का जश्न मना रहा है। आने वाले दशकों में आपको और भी कई जीत और प्रशंसा की शुभकामनाएं।'

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दरअसल, 14 दिनों तक चले रोमांचक मुकाबले में गुकेश की जीत ने न केवल एक दशक से भी अधिक समय से चल रहे सपने को पूरा किया, बल्कि शतरंज में भारत की समृद्ध विरासत को भी उजागर किया। उनकी जीत के बयान ने न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के लिए इस उपलब्धि के महत्व को दर्शाया। गुकेश की जीत उनके दृढ़ संकल्प और उस समर्थन प्रणाली का प्रमाण है जिसने आंध्र प्रदेश में पारिवारिक जड़ों से लेकर तमिलनाडु के पोषण शतरंज के माहौल तक की उनकी पूरी यात्रा में उनका साथ दिया।

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