Javelin: जैवेलिन का कितना होता है वजन? जानिए किस चीज से बनता है और खेल के नियम क्या हैं
All You Need to About Javelin: ओलंपिक में जैवेलिन थ्रो गेम में दो राउंड होते हैं, पहले क्वालिफिकेशन और बाद में फाइनल होता है। दोनों ही राउंड में अलग-अलग चांस भी दिए जाते हैं। भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक में नीरज चोपड़ा ने धांसू अंदाज में जीत दर्ज करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया था।
पेरिस ओलंपिक में कुल 12 एथलीटों ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है और नीरज चोपड़ा भी उनमें शामिल हैं। नीरज चोपड़ा ने पहले ही प्रयास में डायरेक्ट क्वालीफाई कर लिया और अगले दोनों प्रयासों में हिस्सा नहीं लिया। नीरज से जुड़े इस खेल के बारे में कुछ चीजें जानना जरूरी है।

भाले का आकार और वजन
भाले का आकार बेलन की तरह होता है। इसे बेलनाकार शेप में बनाया जाता है और इसके तीन भाग होते हैं। एक हेड जो आगे से तीखा होता है, इसके बाद शाफ्ट और नाल। पुरुषों के सीनियर इवेंट्स में इस्तेमाल होने वाले भाले का वजन कम से कम 800 ग्राम होता है। और इसका माप 2.6 मीटर से लेकर 2.7 मीटर होना चाहिए। महिलाओं के लिए न्यूनतम वजन 600 ग्राम होना चाहिए जबकि भाले की लंबाई 2.2 मीटर से 2.3 मीटर के बीच हो सकती है।
भाला किससे बनता है
भाले का मुख्य हिस्सा या शाफ्ट धातु (एल्युमिनियम, स्टील या कार्बन फाइबर) से बनी होती है और अन्य हिस्सा भी ठोस सामग्री से बना होता है। यह ठोस या खोखला हो सकता है लेकिन इसकी सतह उबड़-खाबड़ नहीं होनी चाहिए और न ही इसमें कोई छेड़ या खुरदरापन होना चाहिए। इसके अलावा इसमें चिकनापन भी होता है।
जैवेलिन फेंकने का क्षेत्र
भाला फेंकने से पहले एथलीट कुछ दूर से दौड़ते हुए आते हैं, इसे रनवे कहते हैं। इसकी लम्बाई 30 मीटर होनी चाहिए। अगर कंडीशंस परमिट करे, तो इसे बढ़ाकर 36.50 मीटर तक किया जा सकता है। इसकी चौड़ाई 4 मीटर होनी चाहिए। अंत में एक लाइन बनी होती है, इसे फाउल लाइन कहते हैं। यहाँ अगर पाँव या शरीर का कोई हिस्सा टच होता है, तो स्कोर काउंट नहीं होता और इसे फाउल करार दिया जाता है।
भाला फेंकने का नियम
इसे पकड़ते समय दोनों हाथों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और हाथों में ग्लव्स भी नहीं पहन सकते। थ्रो में अगर कोई अतिरिक्त सपोर्ट नहीं मिले, तो उँगलियों पर टैप लगाई जा सकती है। दो और ज्यादा उँगलियाँ एक साथ टैप नहीं की जा सकती। जहाँ जैवेलिन ने पहले टप्पा खाया, वहीँ से दूरी काउंट की जाती है। थ्रो फेंकने तक भाले को कंधे से ऊपर रखना होता है। थ्रो फेंकने से लेकर रिलीज तक एथलीट को लाइन के अंदर रहना होता है।












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