कल कह रहे थे Rishabh Pant को निकालो, आज कह रहे सुपर हीरो

ये तो कोई बात नहीं हुई। पल में सिर पर बैठा लिया, पल में जमीन पर फेंक दिया। कुछ तो धीरज रखना चाहिए। एक महीना पहले ऋषभ पंत को टीम से निकालने की मांग हो रही थी।

स्पोर्ट्स डेस्क, 20 जुलाई: ये तो कोई बात नहीं हुई। पल में सिर पर बैठा लिया, पल में जमीन पर फेंक दिया। कुछ तो धीरज रखना चाहिए। एक महीना पहले ऋषभ पंत को टीम से निकालने की मांग हो रही थी। आज उन्हें टीम का सुपर हीरो कहा जा रहा है। उन्हें मैच विजेता खिलाड़ी कहा जा रहा है। भारत के पूर्व क्रिकेटर अरुण लाल पंत को रोहित शर्मा का उत्तराधिकारी मानते हैं। ऋषभ पंत नि:संदेह असाधारण प्रतिभा वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपनी लाजवाब बैटिंग से भारत को टेस्ट श्रृंखला जीतने में मदद की थी। उनकी 89 और 97 रनों की पारी भला कौन भूल सकता है। लेकिन भारत में क्रिकेट की दीवानगी बिल्कुल एकपक्षीय है। एक नाकामी दस कामयाबियों पर भारी पड़ जाती है।

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IPL और अफ्रीका सीरीज में नहीं चले थे पंत

IPL और अफ्रीका सीरीज में नहीं चले थे पंत

आइपीएल 2022 में ऋषभ पंत कप्तान और बल्लेबाज के रूप में सफल नहीं रहे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज में उन्हें संयोग से भारत की कप्तानी मिल गयी। इस बार भी पंत का बल्ला नहीं चला। फिर तो उन्हें टीम से निकालने की मांग होने लगी। पंत में सौ नुक्स निकाले जाने लगे। लेकिन टीम का चयन जनभावनाओं से नहीं होता। पंत इंग्लैंड दोरे के ले चुने गये। उन्होंने एजबेस्ट टेस्ट (146) में शतक लगाया। आखिरी एक दिवसीय मैच में शतक लगा कर भारत की जीत में अहम भूमिका निभायी। अब फिर उनकी जयजयकार शुरू है। ऐसा क्यों होता है ? पल में तोला, पल में माशा। क्या कभी सोचा है कि जज्बात की इस नाइंसाफी से किसी खिलाड़ी का करियर खत्म हो सकता है?

थोड़ा चूके क्या, सब कुछ भुला दिया

थोड़ा चूके क्या, सब कुछ भुला दिया

चाहे कोई कितना भी महान खिलाड़ी क्यों न हो, हमेशा नहीं जीत सकता। अगर सफलता है तो असफलता भी है। धैर्य के साथ बुरे दौर के गुजरने का इंतजार करना चाहिए। प्रतिभावन खिलाड़ी जरूर वापसी करता है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चार टी-20 मैचों में ऋषभ का बल्ला खामोश रहा था। उन्होंने दिल्ली में 29, कटक में 5, विशाखापट्टनम में 6 और राजकोट में 17 रन बनाये। ऋषभ पंत की योग्यता और क्षमता क्या है, इस बात पर विचार किये बिना लोग उनके पीछे पड़ गये। उन्हें टीम से निकालने की मांग होने लगी। कहा जाने लगा कि पंत खराब शॉट खेल कर अपना विकेट गंवा रहे हैं।

वसीम जाफर ने दिया था बड़ा बयान

वसीम जाफर ने दिया था बड़ा बयान

भारत के पूर्व क्रिकेटर वसीम जाफर ने कहा, ऋषभ की फॉर्म भारत के लिए चिंता का कारण बन गयी है। वे सीमित ओवरों के मैच में टेस्ट की सफलता दोहराने में सक्षम नहीं रहे हैं। वे एक ही तरीके से बार-बार आउट हो रहे हैं। जब केएल राहुल लौटेंगे तो पंत अपनी जगह बरकरार नहीं रख पाएंगे क्यों कि वे एक विकेटकीपर भी हैं। अगर दिनेश कार्तिक का खेलना (टी-20) पक्का है तो पंत के लिए मुश्किल होगी। लेकिन ये सारे अनुमान धरे के धरे रह गये। पंत ने टेस्ट और वनडे में शतक लगा कर आलोचकों की बोलती बंद कर दी।

पहले कहा, कप्तान बनने लायक नहीं

पहले कहा, कप्तान बनने लायक नहीं

जब केएल राहुल के घायल होने के बाद ऋषभ पंत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए कप्तान बनया गया तो सोशल मडिया पर उनके खिलाफ जोरदार अभियान चलाया गया। उन्हें कप्तानी के लिए अयोग्य करार दिया गया। कुछ लोग इतने पक्षपाती हो गये कि उन्होंने सीरीज का भविष्य भी तय कर दिया। एक सज्जन ने ट्वीट किया था, भारत यह सीरीज हारने वाला है। एक सज्जन ने लिखा, क्या कप्तानी म्यूजिकल चेयर गेम है? भाग्य से जिसके सामने कुर्सी आयी, वही बैठ गया। क्या ऋषभ पंत भारत के कप्तान बनने के लिए डिजर्व करते हैं? उन्हें अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।

रणनीति पर भी उठाए गए सवाल

रणनीति पर भी उठाए गए सवाल

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी-20 में पंत ने अक्षर पटेल को 13वें ओवर में बैटिंग के लिए भेज दिया था। जब कि दिनेश कार्तिक जैसे विस्फोटक बल्लेबाज बैठे रहे। पंत का यह दांव काम न आया। अक्षर केवल 10 रन बना कर पवेलियन लौट गये। डेथ ओवरों मे हर्षल पटेल अच्छी बॉलिंग करते हैं। दक्षिण अफ्रीका को पांच ओवरों में 34 रन बनाने थे। इस समय रन रोकना जरूरी था। लेकिन पंत ने 16 वां ओवर यजुवेन्द्र चहल को दे । इस ओवर में 23 रन बने और मैच भारत के हाथ से निकल गया। कुछ लोगों की नजर में ऋषभ पंत की कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों खराब थी।

अब कह रहे रोहित का विकल्प हैं पंत

अब कह रहे रोहित का विकल्प हैं पंत

अब पूर्व क्रिकेटर अरुण लाल का कहना है, पंत रोहित को रिप्लेस करने की क्षमता रखते हैं। कप्तान क्या करता है? वह आगे बढ़कर चुनौतियां उठाता है। अगर बल्लेबाज है तो वह अपनी बैटिंग से टीम को प्रेरित करता है। टीम संकट में हो तो उसे बाहर निकालने की क्षमता और साहस रखता हो। पंत ने कुछ ही दिनों में ये सारी खूबियां दिखा दीं हैं। अगर लोग थोड़ धीरज रख लेते तो शायद ये जली-कटी बातें नहीं कहनी पड़ती। एक महीना बाद ही उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी क्षमता क्या है?

विपरित परिस्थियों में टेस्ट सेंचुरी बनायी। वह भी सिर्फ 89 गेंदों पर। वे विदेश में चार टेस्ट शतक बनाने वाले भारत के पहले विकेटकीपर बल्लेबाज बने। अंतिम वनडे में रोहित और कोहली जैसे दिग्गज फेल हो गये तो पंत ने ही शतक बना कर भारत को जीत दिलायी। लोग भावनाओं के आधार पर बोलते हैं। लेकिन चयनकर्ता हकीकत की जमीन पर, हालात को भांप कर, जरूरत को देख कर, टीम का चयन करते हैं। ऋषभ पंत ने इंग्लैंड में चयन की सार्थकता साबित कर दी। एक दो सीरीज की नाकामी एक बुरा वक्त है। ये वक्त भी गुजर जाता है। बस, भरोसा रखना चाहिए।

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