शुभमन गिल के विवादित तरीके से कैच आउट होने में सॉफ्ट सिग्नल का नियम काम क्यों नहीं कर पाया?
शुभमन गिल के मामले में थर्ड अंपायर ने फैसला लेते हुए सॉफ्ट सिग्नल का नियम काम क्यों नहीं कर पाया, जबकि ये एक विवादित कैच था जिसने क्रिकेट जगह में एक्सपर्ट्स को भी हैरान कर दिया है।
WTC Final 2023: शुभमन गिल (Shubman Gill) वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल मुकाबले के चौथे दिन जिस तरह से आउट हुए, वह काफी विवादित मामला रहा। हर किसी के होठों पर एक ही सवाल था कि 'सॉफ्ट सिग्नल आउट' (Soft Signal Out) यहां पर क्यों प्रभावी साबित नहीं हुआ?
गिल स्कॉट बोलैंड की गेंद पर कैमरन ग्रीन के हाथों गली में लपके गए। इस लंबे ऑलराउंडर ने अपनी बाईं ओर डाइव लगाते हुए एक हाथ से लो-कैच पकड़ा। अगर आप कैच को पहली बारी में देखेंगे, तो इतना शक पैदा होता है कि बल्लेबाज को आउट देने का मन नहीं करता।

गौर से देखने पर भी पता चलता है कि मामला बहुत संदिग्ध है, लेकिन टीवी अंपायर रिचर्ड केटलबोरो ने कई एंगल से देखने के बाद यह पाया कि कैमरन ग्रीन की उंगली गेंद के नीचे आ गई थी, लेकिन फिर भी पूरे विश्वास के साथ यह नहीं कहा जा सकता कि यह क्लीन कैच था।
आखिरकार लंबे समय तक विभिन्न कैमरा कोणों से देखने के बाद टीवी अंपायर ने गिल को आउट करार दे दिया। इस फैसले ने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। गिल के चेहरे पर निराशा तौर पर देखी जा सकती थी। वे तब 18 रन बनाकर खेल रहे थे।
सॉफ्ट सिग्नल आउट के तहत बल्लेबाज को संदेह का लाभ देते हुए अगर अंपायर नॉट आउट करार देता तो फिर टीवी अंपायर भी कंफ्यूजन की स्थिति में इसको ही बरकरार रखने वाला था। लेकिन जून के पहले सप्ताह में ही आईसीसी की कमेटी ने सॉफ्ट सिग्नल के नियम को हटा दिया है।
अब किसी कंफ्यूजन की स्थिति में मैदानी अंपायर सीधे टीवी अंपायर को रेफर करता है और जो फैसला टीवी अंपायर फैसला करता है वही अंतिम होता है। सॉफ्ट सिग्नल को हटाने का फैसला जिस कमेटी में लिया गया था, उसमें भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी एक मेंबर थे। 1 सप्ताह पहले इंग्लैंड और आयरलैंड के बीच पहला टेस्ट मैच था, जिसमें सॉफ्ट सिग्नल हटाने का नियम लागू हो गया था और अब आने वाले समय में यही रहेगा।












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