WTC Final 2023: पहले दिन भारत ने की क्या गलती, पूरे मैच पर भारी पड़ सकता है कौन सा 'ब्लंडर'

WTC Final के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया ने बढ़िया क्रिकेट खेला या फिर भारतीय खेमें से कुछ गलतियां और ब्लंडर देखने को मिले? कैसा रहा मैच का पहला दिन और कहा हो गई टीम इंडिया से चूक-

WTC Final 2023:

WTC Final 2023 in Hindi: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल मैच का पहला दिन पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के नाम रहा जब कंगारू ने टॉस हारने के बावजूद पहले बल्लेबाजी करते हुए 85 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 327 रन बना दिए।

दूसरी और भारतीय टीम से कुछ ऐसी गलतियां हुई जिनके चलते ऑस्ट्रेलिया को अपने पांव पसारने का मौका मिल गया। आइए देखते हैं इस मैच में पहले दिन क्या-क्या भारत के पक्ष में गलत घटित होता चला गया।

भारत का टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी में रिकॉर्ड ही बुरा है-

भारत ने टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया लेकिन अगर टीम इंडिया के ट्रैक रिकॉर्ड को उठाकर देखेंगे तो भारत टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए 57 टेस्ट मैचों में केवल 9 मैच ही जीत पाया है। अब भारत को ओवल के मैदान पर चौथी पारी में बल्लेबाजी करनी होगी और टेस्ट क्रिकेट में कहते हैं कि किसी भी स्थिति में चौथी पारी में बैटिंग करना आपके लिए बहुत फायदे का सौदा साबित नहीं होता। शायद रोहित शर्मा एंड टीम मैनेजमेंट ने ओवल के चेज रिकॉर्ड को देखते हुए यह फैसला लिया।

जल्दी विकेट लेने के बाद क्या गलत किया-

पहले गेंदबाजी करन के बाद भी भारतीय टीम ने शुरुआती ओवरों में पहले सेशन में जल्द जल्द जल्द विकेट चटकाने का काम किया और टीम अपने फैसले को सही साबित करती हुई दिखाई दी। उस्मान ख्वाजा को बगैर खाता खोले आउट कर दिया गया। डेविड वॉर्नर को भी लंच से पहले आउट किया और लंच के तुरंत बाद लाबुशेन भी 26 रन पर चलते बने।

भारतीय गेंदबाज यहां पर अपना दबाव बना सकते थे लेकिन ट्रेविस हेड और स्टीव स्मिथ को आसानी से सिंगल दिए गए। जब इन दोनों बल्लेबाजों पर दबाव बनाया जा सकता था तो भारतीय फील्डिंग द्वारा आसानी से रन दिए जाने से दोनों को ही अपने पांव जमाने का मौका मिला।

बॉलिंग की लेंथ कंगारूओं के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हुई-

इसके अलावा भारतीय टीम ने मैच के पहले दिन अधिकतर समय शार्ट ऑफ द लेंथ गेंदबाजी की। यह बॉलिंग ना तो बाउंसर थी और ना ही गुडलैंथ थी। जबकि हमने देखा है कि मोहम्मद शमी ने बहुत खूबसूरत तरीके से गेंद को आगे रखकर लाबुशेन को बोल्ड किया था।

तेज गेंदबाजों ने अधिकतर समय वार्नर और हेड जैसे बल्लेबाजों को ऑफ स्टंप पर छोटी गेंद रखकर खुलकर कट करने का मौका दिया। इन बल्लेबाजों को आसानी से बाउंड्री लगाने दी गई। यह केवल दिन का अंत था जब शमी ने ट्रेविस हेड पर कुछ अच्छी बाउंसर ट्राई की और इस बल्लेबाज को खेलने में थोड़ी दिक्कत भी हुई। भारतीय गेंदबाज थोड़ी गुड लेंथ बोलिंग करके अटैकिंग क्रिकेट खेल सकते थे।

गलतियों से बड़ें ब्लंडर ये थे-

यह थी कुछ गलतियां जो भारत से पहले दिन हुई। अब बात करते हैं इस मैच में हुए ब्लंडर की जो पूरे मुकाबले में टीम इंडिया को भारी पड़ सकती है। इस मैच की प्लेइंग इलेवन में रविचंद्रन अश्विन जैसे गेंदबाज का ना होना किसी को समझ में नहीं आया है।

अश्विन 474 टेस्ट विकेट ले चुके हैं और ऐसे बॉलर को आप क्रिकेट की किसी भी कंडीशन में खिलाना चाहेंगे जैसे आस्ट्रेलिया नाथन लियोन को खिलाता है। भारतीय टीम रविचंद्रन अश्विन को जिस तरह से ओवरसीज हालातों में अंडरएस्टीमेट करती है, यह टीम पर भारी पड़ सकता है।

रवींद्र जडेजा उस तरह के क्लासिक स्पिनर नहीं है जो अकेले दम पर विपक्षी बल्लेबाज को तंग कर पाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के पास बाए हाथ के बल्लेबाजों की भरमार को देखते हुए रविंचद्रन को बाहर करना चूक के सिवा कुछ नहीं है।

उमेश यादव की जगह उनादकट विविधता ला सकते थे-

दूसरी बड़ी चूक उमेश यादव को लेना साबित हो सकता है। यादव के स्थान पर जयदेव उनादकट आ सकते थे। उनादकट ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से पहले बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान अपनी बाएं हाथ की अपनी गेंदबाजी से बहुत प्रभावित किया था। वे अपने जीवन के टॉप फॉर्म में चल रहे हैं। उन्होंने डोमेस्टिक क्रिकेट में प्रभावित किया है और सबसे बड़ी बात यह कि दाएं हाथ की गेंदबाजी वाले भारतीय अटैक में जयदेव की बॉलिंग एक नई विविधता जोड़ देती है क्योंकि उनादकट बाएं हाथ के बॉलर हैं।

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