WPL 2023: 47 साल पहले ट्रेन की जनरल बोगी में सफर, बदमाश तंग करते तो जंजीर खींच कर रोकती थीं ट्रेन

महिला प्रीमियर लीग का पहला सीजन उत्साहित करने वाला होगा, महिला क्रिकेटरों ने इस सफर को पूरा करने के लिए काफी संघर्ष किया है।

WPL

WPL 2023: 4 मार्च 2023, दिन शनिवार। महिला क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक दिन। महिला आइपीएल की शुरुआत, एक नये युग का श्रीगणेश है। अब भारतीय महिला क्रिकेट में क्या नहीं है ? दौलत है, शोहरत है और पुरुष क्रिकेटरों के बरावर वेतन भी। स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा, जेमिमा रोड्रिग्ज, शेफाली वर्मा, पूजा वस्त्रकार, ऋचा घोष, हरमनप्रीत कौर, रेणुका सिंह, यास्तिका भाटिया जैसी खिलाड़ी आइपीएल के कारण करोड़पति हो चुकी हैं। लेकिन आज से 47 साल पहले ऐसी बात नहीं थी। तब महिला क्रिकेटरों को बहुत मुश्किल परिस्थियों में मैच खेलना पड़ता था। न दाम था न नाम था। बस उनका एक ही जब्बा था कि कैसे भारत के लिए क्रिकेट खेलें।

उज्जैन में विराट कोहली बोले 'जय महाकाल' और वीडियो जंगल में लगी आग की तरह फैला
तब महिला क्रिकेटरों के पास साइकिल भी नहीं

भारत का पहला महिला टेस्ट मैच अक्टूबर 1976 में खेला गया था। यह टेस्ट मैच बेंगलुरू में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था। शांता रंगास्वामी भारतीय टीम की कप्तान थीं। उन्होंने एक इंटव्यू में बताया था, तब मेरे पास साइकिल भी नहीं थी। लेकिन जब मैंने न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक लगाया तो इनाम के तौर मुझे स्कूटर मिला था। ये मेरी जिंदगी की पहली गाड़ी थी। मालूम हो कि शांता रंगास्वामी भारत की पहली महिला क्रिकेटर हैं जिन्होंने टेस्ट मैच में शतक लगाया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा था, अपने 22 साल के क्रिकेट करियर में मैंने खेल से एक पैसा भी नहीं कमाया। वो तो गनीमत थी कि खेल कोटा से बैंक में उनकी नौकरी लग गयी वर्ना घर चलाना मुश्किल हो जाता। लेकिन उन्हें इस बात का कोई अफसोस नहीं क्यों कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने देश के लिए खेलना बहुत बड़े गौरव की बात है।

जनरल बोगी में सफर, बदमाशों से भी पड़ता था पाला

उस समय महिला क्रिकेट का नियंत्रण बीसीसीआइ के अधीन नहीं था। सुविधा की बात तो दूर रही, घनघोर असुविधा के बीच खेलना पड़ता था। उस समय महिला क्रिकेट नॉकआउट प्रारूप में खेला जाता था। जो टीम हारी उसे बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ता था। इसकी वजह से ट्रेन में रिजर्वेशन भी नहीं कराया जाता था। कब किस टीम का पत्ता कट जाए, मालूम नहीं। पूरी महिला टीम और स्टाफ को जनरल बोगी में बैठ कर आना पड़ता थी। भीड़ बहुत अधिक होने पर टायलेट के पास बैठना पड़ता था। कई बार बदमाशों से भी पाला पड़ जाता था। वे बदसलूकी करने की कोशिश करते तो हमें खुद ही निबटना होता। तब हम लोग जंजीर खींच कर ट्रोन को रोक देते थे। फिर बदमाशों को बोगी से बाहर निकालत देते थे। ट्रेन के जनरल बोगी में जाने की बात पूर्व कप्तान मिथाली राज ने स्वीकर की है। मिथाली तो आधुनिक दौर की खिलाड़ी हैं। यानी 20 साल पहले भी महिला क्रिकेट बहुत नहीं बदला था।

तब केवल जुनून था, आज जुनून और पैसा दोनों है

शांता रंगास्वामी के मुताबिक, ये हमारा खेलने का जुनून था वर्ना कुछ भी हमारे हक में नहीं था। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के मैच खेलने के लिए जब हम किसी शहर में जाते थे तो वहां के स्कूल में हमे ठहरा दिया जाता था। अगर स्कूल नहीं मिला तो डोरमेट्री में रुकते थे। शांता रंगास्वामी के साथ खेल चुकी डायना इडुलजी ने भी एक इंटरव्यू में इस सच को स्वीकार किया था। शांता रंगास्वामी ने भले पैसा नहीं कमाया लेकिन उन्हें दो उपलब्धियों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। वे भारत की पहली महिला क्रिकेट कप्तान हैं। ये कौन भूल सकता है कि उन्होंने भारत के लिए पहला टेस्ट शतक लगाया है।

Recommended Video

    Smriti Mandhana Net Worth: Mandhana की कितनी है संपत्ति, कितने करोड़ की मालकिन हैं ! वनइंडिया हिंदी

    1977 के विदेश दौरे पर हर खिलाड़ी को केवल 10 हजार

    शांता रंगास्वामी के साथ क्रिकेट खेल चुकीं डायना इडुलजी ने भी अपने संघर्ष के दिनों को कुछ इसी तरह याद किया है। डायना इडुलजी के मुताबिक कई बार प्रतियोगिता के आयोजन स्थल तक पहुंचने के लिए ट्रेन भी बदलनी पड़ती थी। सफर लंबा होता था। जनरल बोगी में सफर करने के कारण आंखें नींद से बोझिल रहती थीं। ट्रेन बदलने के लिए जब हम किसी स्टेशन पर उतरे थे तब वेटिंग रूम में कुछ देर के लिए सो पाते थे। इतने कष्ट से यात्रा करने के बाद हमें अगले दिन मैच भी खेलना होता था। 1977 में हम पहली बार न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गये थे। यह हम लोगों की पहली विदेश यात्रा थी। इस दौरे पर मैच खेलने के लिए प्रत्येक खिलाड़ी को केवल 10-10 हजार रुपये दिये गये थे। इस टीम में मेरे सहित महाराष्ट्र से चार खिलाड़ी शामिल थे। ये हम लोगों की खुशनसीबी थी कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एआर अंतुले के सौजन्य से राज्य सरकार ने हमसब का खर्चा उठाया था। लेकिन आज ऐसा नहीं है। अब भारतीय महिला क्रिकेट एक नयी उंचाई पर पहुंच चुकी है।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+