टूटे हाथ पर चढ़ा था प्लास्टर, एक हाथ से बैटिंग कर साथी का शतक पूरा कराया, फिर झटके 7 विकेट
इस महान गेंदबाज की रफ्तार, लाइन-लेंथ, बाउंसर और यॉर्कर का पूरी दुनिया में खौफ था। उनके नाम से बड़े बड़े बल्लेबाज डरते थे। 1984 में वेस्टइंडीज की टीम इंग्लैंड के दौरे पर गयी थी तब ये अदम्य साहस की यादगार कहानी घटित हुई।

तब क्रिकेट में पैसा कम था लेकिन समर्पण ज्यादा था। खिलाड़ी अपनी टीम के लिए जान लगा देते थे। 1984 के एक टेस्ट मैच की ही बात ले लीजिए। टीम का तूफानी तेज गेंदबाज फील्डिंग करते समय घायल हो गया। टूटे हाथ पर प्लास्टर चढ़ाना पड़ा। लेकिन टीम के लिए उसकी प्रतिबद्धता लाजवाब थी। आखिरी बल्लेबाज के रूप में उसने एक हाथ सै बैटिंग कर अपने साथी खिलाड़ी का शतक पूरा कराया। फिर दर्द को भुला कर ऐसी खौफनाक गेंदबाजी की कि टीम जीत के दरवाजे पर पहुंच गयी। फौलादी इरादों की शायद ही ऐसी कोई मिसाल हो।

साहस और समर्पण वाले क्रिकेटर
साहस, समर्पण और प्रतिभा की यह अदभुत कहानी है वेस्टइंडीज के खौफनाक तेज गेंदबाज मैलकम मार्शल की। उनकी रफ्तार तो बेहद तेज थी ही, लाइन-लेंथ भी बिल्कुल सटीक थी। उनके बाउंसर और यॉर्कर का पूरी दुनिया में खौफ था। उनके नाम से बड़े बड़े बल्लेबाज डरते थे। 1984 में वेस्टइंडीज की टीम इंग्लैंड के दौरे पर गयी थी। क्लाइव लॉयड की कप्तानी वाली इस टीम का विश्व क्रिकेट में दबदबा था। वेस्टइंडीज, इंग्लैंड से दो टेस्ट मैच जीत चुका था। लीड्स में तीसरा टेस्ट था। इंग्लैंड ने पहले बैटिंग कर 270 रन बनाये। एलेन लैंब ने शतक लगाया। फील्डिंग करते समय मैलकम मार्शल गली में खड़े थे। इंग्लैंड के ओपनर क्रिस ब्रॉड ने एक तेज शॉट खेला। मार्शल ने गली में गेंद तो रोक ली लेकिन उनका अंगूठा बुरी तरह घायल हो गया। वे दर्द से हाथ नहीं उठा पा रहे थे। वे छह ओवर ही गेंद डाल पाये थे कि ये घटना हो गयी। अस्पताल जाने के बाद पता चला कि मार्शल का अंगूठा दो जगहों से टूट गया है। उनके पंजे पर प्लास्टर चढ़ाया गया। उन्हें आराम करने की सलाह दी गयी। पहले दिन इंग्लैंड का स्कोर था 6 विकेट पर 237 रन। दूसरे दिन इंग्लैंड की पारी 270 पर खत्म हुई। वेस्ट ने दूसरे दिन स्टंप तक 7 विकेट पर 239 रन बनाये थे। इस तरह मार्शल को करीब दो दिनों तक आराम मिल गया।

9वां विकेट गिरा तो गोम्स 96 पर नाबाद थे
तीसरे दिन वेस्टइंडीज की बैटिंग शुरू हुई। लौरी गोम्स 79 और माइकल होल्डिंग ने 28 रन से पारी आगे बढ़ायी। दोनों के बीच 8वें विकेट के लिए 82 रनों की साझेदारी हुई। होल्डिंग ने धुआंधार पारी खेली। 54 गेंदों पर 59 रन बनाये जिसमें 3 चौके और 5 छक्के शामिल थे। 288 पर होल्डिंग के रूप में 8वां विकेट गिरा। दो रन बाद ही जोएल गार्नर रन आउट हो गये। 9वां विकेट गिरा तब गोम्स 96 रनों पर नाबाद थे। अब आखिरी विकेट के रूप में मार्शल बचे थे। लेकिन उनके हाथ पर प्लास्टर चढ़ा था। उन्हें आराम की हिदायत थी। फिर वे बैट को दोनों हाथों से पकड़ भी नहीं सकते थे। लेकिन मार्शल को गोम्स के शतक की फिक्र थी।

एक हाथ से 16 मिनट तक बैटिंग
किसी भी लिहाज से मार्शल बैटिंग के लायक नहीं थे। लेकिन उन्होंने गोम्स के शतक के लिए मैदान पर उतरने का फैसला कर लिया। किसी के रोके नहीं रुके। एक हाथ में बल्ला थामे मैदान पर उतरे तो इंग्लैंड के खिलाड़ी हैरत से उनका मुंह देखने लगे। वे तो मान रहे थे कि मार्शल अब मैच खेलने की स्थिति में नहीं हैं। मार्शल ने एक हाथ से 16 मिनट तक बैटिंग की। गोम्स ने दो चौके मार कर अपना स्कोर 104 पर पहुंचाया। मार्शल की जिद पूरी हो चुकी थी। गोम्स शतक मार चुके थे। दोनों अंतिम विकेट के लिए 12 रन जोड़ चुके थे। इंग्लैंड के कप्तान डेविड गोवर को ये बात रास नहीं आयी। उन्होंने मार्शल के खिलाफ अपने सबसे तेज गेंदबाज डेरिक प्रिंगल को मोर्च पर लगाया। एक हाथ से बैटिंग कर रहे मार्शल ने तेज गेंद को रोकने के लिए बल्ला लगाया। लेकिन गेंद बैट का बाहरी किनारा लेकर स्लीप में खड़े बॉथम के हाथों में चली गयी। वे 4 रन बना कर आउट हुए।

चमत्कारी बॉलिंग
मैलकम मार्शल शरीर और इरादों से कितने मजबूत थे, अब जरा इसका नमूना देख लीजिए। इंग्लैंड के खिलाड़ी मन ही मन खुश थे कि मार्शल ने किसी तरह बैटिंग तो कर ली लेकिन हाथ टूटने के बाद वे बॉलिंग नहीं कर सकते। दो टेस्ट मैच हार चुका इंग्लैंड राहत की सांस लेने लगा। लेकिन जब इंग्लैंड की दूसरी पारी शुरू हुई तो उसके बल्लेबाज मार्शल को मैदान पर देख कर बूत बन गये। वे आवाक थे कि ये कैसे मुमकिन है। मार्शल का बायां हाथ टूटा था। वे दाहिने हाथ से बॉलिंग कर रहे थे। विपरित परिस्थितियों ने मार्शल को और खतरनाक बना दिया था। उनकी रफ्तार पहले से भी तेज थी। इंग्लैंड का स्कोर अभी 10 रन था कि मार्शल ने क्रिस ब्रॉड को 2 रनों पर आउट कर दिया।

एक हाथ टूटा फिर भी लिये 7 विकेट
पहला विकेट गिरने के बाद इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने मार्शल की गेंदबाजी का विरोध कर दिया। उन्होंने अंपायर से शिकायत की कि मार्शल के दूसरे हाथ में लगे उजले प्लास्टर से उनका ध्यान भंग हो रहा है। इसलिए उन्हें गेंदबाजी से रोका जाए। दरअसल वे मार्शल के खौफ से बचना चाहते थे। तब इस सवाल से बचने के लिए मार्शल ने अपने प्लास्टर को इलास्टोप्लास्ट (चिपकने वाली पट्टियां) से ढक लिया। फिर तो उन्होंने इंग्लैंड की बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया। 26 ओवर में 9 मेडन रखते हुए 53 रन दे कर 7 विकेट लिये। उनका दर्द जुनून बन कर गेंदों में उतर आया था। इंग्लैंड की टीम 159 पर लुढ़क गयी। अब वेस्टइंजीड को जीत के लिए 128 रन चाहिए थे जो उसने दो विकेट खो कर बना लिये। यह टेस्ट मैच मैलकम मार्शल के अदम्य साहस की यादगार कहानी है।
(Photos Credit- Cricket West Indies/ Wisden)












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