कब और क्यों पाकिस्तानी टीम ने नहीं खेला एशिया कप? अपनी सेना का दिया था साथ, क्या है पूरी कहानी
Asia Cup: एशिया कप का आयोजन इस बार भारत के पास है। बीसीसीआई की मेजबानी में इवेंट सितम्बर में खेला जाएगा। हालांकि इवेंट की मेजबानी भारत के पास होने के बावजूद टूर्नामेंट बाहर खेला जाएगा। भारत से बाहर इवेंट का जाना फैन्स के लिए निराश करने वाला है।
पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर होने के बाद सवाल उठे रहे हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत को मैच क्यों खेलना चाहिए। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर काफी उबाल देखने को मिला है। पाक के खिलाफ खेलना बहिष्कार करने की मांग उठ रही है।

बीसीसीआई ने फ़िलहाल तो ऐसा कुछ नहीं किया है लेकिन एक कहानी ऐसी है, जिसमें पाकिस्तानी टीम ने खेलने से मना कर दिया था। ऐसा एशिया कप में ही देखने को मिला था और वह इवेंट भारत में खेला गया था। पाकिस्तानी टीम उस दौरान खेलने के लिए नहीं आई थी।
कब नहीं खेला पाकिस्तान ने Asia Cup
साल 1990 के एशिया कप के दौरान पाक टीम ने भारत में खेलने से मना कर दिया था। पाकिस्तानी टीम उस पूरे इवेंट से ही हट गई थी। पाक टीम के बगैर ही वह टूर्नामेंट खेला गया था। एक तरह से पाकिस्तानी टीम ने अपनी आर्मी का समर्थन करने के लिए यह स्टेप उठाया था। मामला राजनीतिक था लेकिन आर्मी का पूरा रोल था।
क्या थी इसकी प्रमुख वजह
भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ मुद्दों को लेकर तनाव था। उनमें दो मुद्दे प्रमुख थे। पहला तो 1984 का सियाचिन संघर्ष था। उस समय भारत की सेना ने पाकिस्तान की प्लानिंग को फेल करते हुए सियाचिन पर भारतीय झण्डा फहरा दिया था। उस ग्लेशियर में आज भी भारत की मौजूदगी है और पाकिस्तानी सेना कब्जा नहीं कर पाई थी। इसके अलावा कश्मीर का मामला तो उस समय भी चल ही रहा था। इसे देखते हुए पाकिस्तानी टीम ने भारत में खेलने से मना किया था।
उस समय कितनी टीमों के साथ हुआ Asia Cup
उस एशिया कप में भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमें ही शामिल थीं। कोलकाता के ईडन गार्डंस में भारत और श्रीलंका के बीच टूर्नामेंट का फाइनल मैच खेला गया था। भारतीय टीम ने 7 विकेट से फाइनल जीतकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली थी।
क्या था सियाचिन मामला
1984 में पाकिस्तान ने 20000 फीट से ऊँचे सियाचिन ग्लेशियर को कब्जे में लेने का प्लान बनाया था। भारत को इसकी भनक लग गई, इसके बाद भारत ने तेजी दिखाते हुए इसे अपने नियंत्रण में लेने की योजना बनाई और पाकिस्तानी फ़ौज से पहले अपने सैनिकों को वहां उतार दिया और पाकिस्तान को कब्जा नहीं करने दिया। इसे 'ऑपरेशन मेघदूत' कहा जाता है। अब हर मौसम में वहां भारतीय सेना रहती है।
बीसीसीआई को क्या करना चाहिए
जब पाकिस्तानी टीम ने 1990 में खेलने से मना कर दिया था, तो बीसीसीआई को भी कोई ऐसा कदम उठाने में झिझक नहीं होनी चाहिए। बोर्ड के पास मेजबानी है लेकिन वह इसे ठुकरा भी सकता है। आयोजन नहीं कराने का निर्णय भी लिया जा सकता है या किसी अन्य बोर्ड को मेजबानी देकर खुद अलग हो सकता है। जनभावना तो यही कह रही है कि बोर्ड को पीछे हटना चाहिए।












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