IPL 2025: चेन्नई सुपर किंग्स के The End का कौन है जिम्मेदार? Thala की टीम को ले डूबे ये 5 गलत फैसले!

आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का 2025 सीजन बेहद निराशाजनक रहा। पंजाब किंग्स से मिली हार के बाद अब 'येलो आर्मी' का प्लेऑफ सपना भी टूट चुका है। जिस टीम को हमेशा स्ट्रक्चर (structure), अनुभव (experience) और धोनी की कप्तानी (Dhoni's leadership) की मिसाल माना गया, वो इस सीजन बुरी तरह बिखर गई।

ऐसे में सवाल ये है कि गलती कहां हुई? आइए जानते हैं वो 5 फैसले (decisions) जिन्होंने इस बार चेन्नई को प्लेऑफ से दूर रखने में अहम भूमिका निभाई।

MS Dhoni

पुराने फॉर्मूले पर ही भरोसा, अटैकिंग माइंडसेट की कमी
जब बाकी टीमें 220+ रन को सामान्य मान चुकी थीं, CSK की बल्लेबाजी वही पुराना रुख अपनाए रही। बिना जोखिम के रन बनाओ वाली रणनीति ने टीम को समय से पीछे धकेल दिया। शिवम दुबे और एमएस धोनी के अलावा किसी में पावर-हिटिंग का जज्बा नहीं दिखा। यहां तक कि चेन्नई पूरे सीजन में एक बार भी पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 200 का आंकड़ा पार नहीं कर पाई। फॉर्मेट की मांग के हिसाब से टीम का माइंडसेट तैयार नहीं था।

फ्लॉप रहा मेगा ऑक्शन प्लान
55 करोड़ की भारी-भरकम पर्स लेकर उतरी CSK ने न तो कोई बड़ा धमाका किया और न ही भविष्य के लिए नई दिशा तय की। रचिन रवींद्र, डेवोन कॉनवे, राहुल त्रिपाठी जैसे नाम भरोसेमंद तो थे, लेकिन गेमचेंजर साबित नहीं हो सके। गेंदबाज़ी में भी माथीशा पथिराना (जब फिट रहे) और नूर अहमद के अलावा कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाया। टीम में स्टार पावर और स्ट्रैटेजिक शार्पनेस दोनों की कमी दिखी।

कप्तानी में अस्थिरता ने बढ़ाई दिक्कत
शुरुआत में कप्तानी ऋतुराज गायकवाड़ को मिली, लेकिन चोट ने उन्हें बाहर कर दिया और धोनी को दोबारा कमान संभालनी पड़ी। लेकिन इस बार थाला का जादू नहीं चला। टी20 के नए टेम्पो और तेज सोच की जरूरत थी, जो इस बदलती कप्तानी से गायब दिखी। सीजन के बीच में विजन बदलना किसी भी टीम की लय को तोड़ देता है- और यही CSK के साथ हुआ।

सीनियर्स की नाकामी
CSK का DNA अनुभव पर टिका है, लेकिन 2025 में वो अनुभव ही टीम का सबसे बड़ा बोझ बन गया। रविचंद्रन अश्विन को 9.75 करोड़ में खरीदा गया, लेकिन 7 मैच में सिर्फ 5 विकेट ही ले सके। रवींद्र जडेजा का बल्ला और गेंद दोनों खामोश रहे। उन्होंने 10 मैच में 183 रन और 7 विकेट लिए।

युवाओं पर भरोसे में देरी
जब बाकी टीमें 18-19 साल के खिलाड़ियों को खुलकर मौके दे रही थीं, CSK अनुभव की छांव से बाहर निकलने को तैयार नहीं दिखी। शेख रशीद और आयुष म्हात्रे को आखिर में मौका मिला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अंडरडॉग्स का सीजन चल रहा था- लेकिन CSK ने युवाओं की आंधी को पहचानने में देर कर दी।

चेन्नई के लिए ये सीजन सबक है कि T20 में अब बीते फॉर्मूलों से ट्रॉफी नहीं मिलती। नई सोच, तेज रणनीति और युवा खिलाड़ियों पर तुरंत भरोसा- यही आज की जरूरत है। चार मैच बचे हैं, लेकिन कहानी खत्म हो चुकी है। 2026 में लौटने से पहले थिंक टैंक' को दोबारा खुद को खोजना होगा।

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