World Cup 2023 क्वालीफायर से बहुत पहले ही शुरू हो गई थी वेस्टइंडीज क्रिकेट की बर्बादी की कहानी
West Indies Cricket Team: वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम इस साल भारत में होने वाले वर्ल्ड कप 2023 टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। कैरेबियाई क्रिकेट टीम जिंबाब्वे में हो रहे वर्ल्ड कप क्वालीफायर में जिंबाब्वे, नीदरलैंड्स और स्कॉटलैंड से हार के बाद अब क्वालीफाई करने के समीकरणों से बाहर हो चुकी है।
वेस्टइंडीज क्रिकेट का डाउनफॉल आज का नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत 90 के दशक के अंत के अंत तक आते-आते होने लगी थी। जमैका, बारबाडोस, गुयाना, एंटीगुआ, त्रिनिदाद एंड टोबैगो जैसे छोटे द्वीपों ने मिलकर वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का निर्माण किया था, और 70 के दशक की महान कैरेबियाई टीम ने शुरुआती दो वर्ल्ड कप भी जीते। (Image- Social Media)

खराब वित्तीय स्थिति से जूझता हुआ वेस्टइंडीज बोर्ड
तत्कालीन ब्लैक vs व्हाइट गतिरोध ने भी उस समय टीम भावना में अपना योगदान दिया था। लेकिन, जिस भावना से उस टीम का निर्माण हुआ था और जिस जज्बे से उस वक्त के खिलाड़ी खेलते थे वह धीरे-धीरे समाप्त होती गई, क्योंकि 2000 के दशक से अब तक क्रिकेट जितनी तेज गति से बदला है, वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने उस हिसाब से खुद को नहीं ढाला है। बढ़ते हुए टी20 लीग के जमाने ने बेहतर पैसे की ललक में कैरेबियाई स्टार्स को खूब आकर्षित किया। यह भी सच है कि बीसीसीआई को छोड़कर दुनिया के बाकी क्रिकेट बोर्ड के सामने लुभावनी लीगों के आगे टिकने की चुनौती है। लेकिन इनमें भी वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड की दयनीय वित्तीय स्थिति ने चीजों को और मुश्किल किया।
टी20 फॉर्मेट कल्चर ने वनडे और टेस्ट क्रिकेट में टीम का पतन तेज किया-
इसने वेस्टइंडीज क्रिकेट के फर्स्ट क्लास ढांचे पर भी काफी असर डाला और इसका असर कैरेबियाई टेस्ट क्रिकेट में आए तेज पतन के जरिए महसूस किया गया। अधिकांश कैरेबियाई खिलाड़ी अधिक पैसे की ललक में फ्रेंचाइजी क्रिकेट के लिए फिट होने के लिए टी20 के पैंतरों में महारथ हासिल करने में उलझे हुए थे। हालांकि इसका फायदा वेस्टइंडीज को क्रिस गेल, आंद्रे रसेल, ड्वेन ब्रावो, डेरेन सैमी, सुनील नरेन जैसे टी20 सितारों के रूप में मिला।
बड़े खिलाड़ी वेस्टइंडीज की ओर से खेलने का वो क्रेज नहीं रखते
वेस्टइंडीज ने 21वीं सेंचुरी में दो बार टी20 वर्ल्ड कप जीता है। लेकिन टी20 खिलाड़ियों की गोल्डन खेंप भी अब वेस्टइंडीज क्रिकेट से विदाई ले चुकी है। अधिकांश खिलाड़ी विदा हो चुके हैं और सुनील नरेन जैसे अनुभवी वेस्टइंडीज के लिए और नहीं खेलना चाहते। फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते विस्तार के चलते लगभग सभी कैरेबियाई स्टार नेशनल टीम से ज्यादा टी20 लीग में खेलना चाहते हैं।
क्रिकेट बोर्ड में व्याप्त राजनीति ने चीजों को और मुश्किल किया
इसके पीछे वेस्टइंडीज क्रिकेट में व्याप्त राजनीति भी जिम्मेदार है जिसने बोर्ड और खिलाड़ियों के गतिरोध को और बढ़ावा दिया है। ब्रावो 2015 में इसके बारे में खुलकर बोल चुके हैं। वीरेंद्र सहवाग के ताजा ट्वीट में इस राजनीति का जिक्र है। विंडीज बोर्ड के पास खिलाड़ियों को आकर्षित करने के लिए कंपटिटिव वेतन भी नहीं है। जिसके चलते अधिकांश खिलाड़ी नियमित तौर पर नेशनल टीम से नहीं खेलते। पिछले साल टी20 वर्ल्ड कप में आंद्रे रसेल ने खेलने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन बोर्ड के साथ उनकी बात नहीं बनी। इन सब चीजों के चलते कैरेबियाई टीम एक जुट नहीं हो पाती।
बड़े खिलाड़ियों का मौके पर प्लॉप होना
कप्तान शाई होप का साफ कहना है कि वेस्टइंडीज टीम क्वालीफायर टूर्नामेंट खेलने बगैर तैयारी के आ गई। बड़े खिलाड़ियों ने अहम मैचों में योगदान नहीं दिया। होप और निकोलस पूरन जैसे खिलाड़ी जिम्बॉब्वे व स्कॉटलैंड के खिलाफ नहीं चल पाए, जबकि टीम को ये मैच जीतने चाहिए थे।
ऐसे ही पूरी टीम फील्डिंग साइड के तौर पर फेल हुई, जहां लीग स्टेज में 10 के करीब कैच छोड़े गए और कोच डेरेन सैमी ने भी बिफर कर कहा कि क्वालीफायर की सबसे खराब फील्डिंग टीमों में इस समय हम हैं।












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