'उसने मेरे साथ जो किया मैं वो जिंदगी भर', अपने जिगरी यार तेंदुलकर को लेकर कांबली का बड़ा खुलासा
Vinod Kambli On Sachin Tendulkar: पूर्व भारतीय क्रिकेटर विनोद कांबली ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सचिन तेंदुलकर और अपनी हेल्थ के बारे में खुलकर बातें कीं। वह सचिन के साथ अपनी दोस्ती के बारे में भावुक होकर बताया कि कैसे दोनों का रिश्ता बचपन से ही गहरा रहा। कांबली ने कहा कि सचिन के साथ उनके रिश्ते में कभी कोई दूरी नहीं आई, चाहे वक्त जैसा भी रहा हो।
सचिन बने थे कांबली का सहारा
उन्होंने यह भी बताया कि उनका दोस्ती का ये अनमोल रिश्ता सिर्फ मैदान तक ही सीमित नहीं था, बल्कि जीवन के हर पहलू में सचिन उनका सहारा बने रहे हैं। कांबली ने यह भी बताया कि सचिन के साथ उनकी दोस्ती का एक खास पहलू यह था कि सचिन हमेशा उनका उत्साह बढ़ाते थे और अच्छे वक्त में भी बुरे वक्त में साथ देते थे। उनका कहना था कि सचिन के साथ बिताए गए वह पल बहुत यादगार थे, खासकर जब वे क्रिकेट के मैदान पर एक साथ खेलते थे।

दोनों की दोस्ती रही है मजबूत
कांबली ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में भी बात की और बताया कि कैसे उन्होंने कई मुश्किलों का सामना किया। वह इस बात को लेकर खुश थे कि सचिन जैसे दोस्त ने हमेशा उनका साथ दिया और उनकी मदद की। इस खुलासे से यह जाहिर हुआ कि क्रिकेट के मैदान से बाहर भी दोनों का रिश्ता उतना ही मजबूत और सच्चा था।
कांबली की दो सर्जरी का खर्च सचिन ने था उठाया
शुरुआत में विनोद कांबली को ऐसा लग रहा था कि सचिन ने उनकी मदद नहीं की, जिससे वह निराश हो गए थे। लेकिन समय के साथ कांबली को यह समझ में आया कि सचिन ने हमेशा उनके लिए बहुत कुछ किया है। साल 2013 में कांबली की दो सर्जरी के खर्च को सचिन ने उठाया, जिससे उनकी दोस्ती और भी मजबूत हो गई। कांबली ने कहा कि सने मेरे साथ जो किया मैं वो जिंदगी भर नहीं भूल सकूंगा।
कांबली ने 9 बार किया कमबैक
कांबली ने अपने क्रिकेट करियर के उतार-चढ़ाव के बारे में बात करते हुए कहा कि सचिन तेंदुलकर ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। कांबली ने यह भी स्वीकार किया कि क्रिकेट एक चुनौतीपूर्ण खेल है, जिसमें खिलाड़ी शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से प्रभावित होते हैं। जब वह आउट होते हैं, तो यह उनके लिए भी एक कठिन अनुभव होता है। हालांकि, कांबली ने यह भी बताया कि उन्होंने कुल 9 बार कमबैक किया, जो यह बताता है कि खेल में कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हमेशा वापसी की। क्रिकेट में लगातार गिरावट और उछाल आते रहते हैं और कांबली ने अपने इस अनुभव को एक सबक के रूप में लिया।












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