IND vs NZ: एकदम्मे बदल गया है T-20, अब तो बवाल काट रहे स्पिनर्स
भारत और न्यूजीलैंड के बीच लखनऊ में दूसरा टी20 मैच खेला गया था और स्पिनरों के खिलाफ वहां दोनों टीमों को परेशानी हुई थी।

IND vs NZ: लखनऊ टी-20 मुकाबले में स्पिनरों का जादू सिर चढ़ कर बोला। भारत और न्यूजीलैंड के कुल 40 में से 30 ओवर स्पिनर ने डाले। टी-20 के इतिहास में स्पिन गेंदबाजी का यह नया रिकॉर्ड है। इस मैच में तेज गेंदबाजों ने पूरे दस ओवर भी नहीं फेंके। तेज गेंदबाजी में भारत की तरफ से हार्दिक ने 4, अर्शदीप ने 2 और शिवम मावी ने एक ओवर डाला। न्यूजीलैंड ने तो तेज गेंदबाजों को और भी तवज्जो नहीं दी। किवी टीम की तरफ से जैकब टफी 1, लौकी फर्गुसन 1 और ब्लेयर टिकनर ने 0.5 ओवर डाले। उसने स्पिनरों पर ज्यादा भरोसा किया। फिरकी गेंदबाज सैंटनर, ब्रेसवेल, ग्लेन फिलिप्स और ईश सोढ़ी ने 4-4 ओवर डाले। टी-20 में एक दिन स्पिनर भी बवाल काटेंगे, किसी ने सोचा नहीं था। सचमुच कितना बदल गया है टी-20 क्रिकेट।
100 रन बनाने में भी छूट गये भारत के पसीने
लखनऊ के इकाना स्टेडियम में वो हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ। स्पिनरों ने जैसे बल्लेबाजों के पांव में जंजीर बांध दी थी। जो भारत स्पिन को खेलने में माहिर माना जाता है उसे 100 रन के टारगेट को पाने के लिए 20वें ओवर की पांचवीं गेद तक इंतजार करना पड़ा। हैरत की बात ये है कि न्यूजीलैंड के किसी गेंदबाज ने एक भी मेडन ओवर नहीं फेंका फिर भी रन नहीं बन रहे थे। लोग सोच रहे थे कि भारत के धाकड़ बल्लेबाज 12-13 ओवर में सौ रन बना कर आसानी से मैच जीत जाएंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। न्यूजीलैंड के स्पिनरों के सामने भारतीय बल्लेबाजों के हाथ-पांव फूल गये। सूर्या जैसे विस्फोटक बल्लेबाज सिंगल -डबल लेने पर मजबूर हो गये। उनके बल्ले से एक भी छक्का नहीं निकला। वे 31 गेंदों में 26 रन बना सके जिसमें सिर्फ एक चौका आया। अगर छक्कों की बात करें तो पूरे मैच में किसी टीम की तरफ से कोई छक्का नहीं लगा। एकाना स्टेडियम की पिच स्पिनरों के लिए स्वर्ग साबित हुई।
टी-20 में सभी 10 विकेट स्पिनरों को
ऐसा नहीं है कि टी-20 में पहली बार स्पिनरों ने जलवा दिखाया है। इसके पहले 2022 के एक टी-20 मैच में स्पिन गेंदबाजों ने सभी 10 विकेट लेकर नया इतिहास बनाया था। यह मैच पिछले साल अगस्त में भारत और वेस्टइंडीज के बीच अमेरिका के लॉडरहिल में खेला गया था। वेस्टइंडीज को जीत के लिए 189 रन बनाने थे लेकिन वह केवल 100 रनों पर आउट हो गया था। इस मैच में अक्षर पटेल ने 3, कुलदीप यादव ने 3 और रवि विश्वनोई ने 4 विकेट लिये थे। यानी सभी 10 विकेट स्पिनरों को मिले थे। तेज गेंदबाज के रूप में अर्शदीप सिंह, आवेश खान और हार्दिक पांड्या ने 2-2 ओवर किये थे लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था। टी-20 के इतिहास में पहली बार स्पिनरों ने सभी 10 विकेटों पर कब्जा जमाया था। यह टी-20 के बदलते स्वरूप का पुख्ता प्रमाण है।
टी-20 में स्पिनरों का दबदबा बढ़ा
तेज गेंदबाज आएंगे, यॉर्कर-बाउंसर मारेंगे और विपक्षी टीम हो जाएगी धाराशायी। स्पिनर रहेंगे तो रन लुटाएंगे। टी-20 में पहले यही सोचा जाता था। लेकिन समय बदला। रिस्ट स्पिनरों का जमाना आया। उनकी कामयाबी ने इस सोच को बदल दिया। फिर तो सभी देश टी-20 टीम में एक रिस्ट स्पिनर रखने लगे। इंग्लैंड अगर एकदिवसीय और टी-20 क्रिकेट का विश्व विजेता बना तो इसमें फिरकी गेंदबाज आदिल रशीद की खास भूमिका रही। टी-20 विश्वकप के फाइनल में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ चार ओवर में एक मेडन रखते हुए 22 रन देकर 2 विकेट लिये थे। यह कमाल उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की तेज पिच पर किया था। पाकिस्तान के शादाब खान ने भी इंग्लैंड के बल्लेबाजों को खुल कर नहीं खेलने दिया था। उनके चार ओवर में सिर्फ 20 रन बने थे और एक विकेट भी लिया था।
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अजंता मेंडिस टी-20 के अबूझ स्पिनर
उच्च कोटि के स्पिनर पहले भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाते रहे हैं। किसी काबिल स्पिन गेंदबाज को खेलना, किसी तेज गेंदबाज से ज्यादा मुश्किल होता है। श्रीलंका के स्पिनर अजंता मेंडिस को रहस्यमयी स्पिनर कहा जाता था। टी-20 में उन्हें खेलना बहुत कठिन था। उनके दो बॉलिंग प्रदर्शन पर गौर कीजिए। 2012 में उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ 4 ओवर में 2 मेडन रखते हुए 8 रन देकर 6 विकेट लिये थे। इसके पहले 2011 में ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उन्होंने 4 ओवर में एक मेडन रखते हुए 16 रन दे कर 6 विकेट लिये थे। लेकिन उस समय एक्का दुक्का स्पिनर ही ऐसी गेंदबाजी करते थे। अब तो दुनिया की हर टी-20 टीम में स्पिनरों का दबदबा बढ़ गया है।












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