T-20 World Cup : बदले हुए तेवर में है दक्षिण अफ्रीका, 30 अक्टूबर को भारत के सामने होगी कठिन चुनौती
भारत भी टी-20 विश्वकप का एक प्रमुख दावेदार है। लेकिन मंजिल आसान नहीं। जीत की राह में कठिन चुनौतियां हैं। पाकिस्तान रास्ते का सबसे रोड़ा है। लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका ने भी भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत टी-20 की घरेलू सीरीज जीत चुका है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में यह टीम बिल्कुल बदली हुई है। न्यूजीलैंड के खिलाफ वार्म अप मैच में दक्षिण अफ्रीका ने बॉलिंग और बैटिंग में कमाल का प्रदर्शन किया। भारत के खिलाफ शतक ठोकने वाले रिली रूसो ने न्यूजीलैंड की गेंदबाजी को तहस नहस कर दिया। दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में से एक लॉकी फर्गुसन के 3 ओवरों में 36 रन बने। रूसो ने 32 गेंदों पर 54 रन ठोके। उनकी यह पारी टीम इंडिया के लिए एक तरह से चेतावनी है। दूसरी तरफ कैगिसो रबादा, वेन पर्नेल और मार्को जेनसन ने अपनी तेज गेंदों से न्यूजीलैंड को पस्त कर दिया। केशव महाराज की स्पिन का भी न्यूजीलैंड के पास कोई जवाब नहीं था। किवी टीम केवल 98 रन पर लुढ़क गयी। भारत और दक्षिण अफ्रीका का मैच 30 अक्टूबर को पर्थ में है। दुनिया की सबसे तेज पिच में शुमार पर्थ में अब भारत को अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा।

रिली रूसो का तूफान भारत के लिए चेतावनी
इस महीने के शुरू में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच इंदौर में टी-20 का मुकाबला हुआ था। तीन मैचों की सीरीज में भारत पहले ही दो मुकाबले जीत चुका था। दक्षिण अफ्रीका सीरीज हार चुका था। उसे इंदौर का तीसरा मैच जीत कर कम से अपनी प्रतिष्ठा बचानी थी। इस मैच में रिले रूसो ने एक तूफानी पारी खेली थी। मात्र 48 गेंदों पर शतक पूरा कर लिया था। इस पारी में उन्होंने 8 करारे छक्के और 7 चौके मारे थे। उनका स्ट्राइक रेट दो सौ से ऊपर था। इस लाजवाब बैटिंग के चलते भारत यह मैच हार गया था। रूसो का यह प्रचंड फॉर्म ऑस्ट्रेलिया में भी बरकरार है। दक्षिण अफ्रीका की टीम अब उन पर ज्यादा भरोसा करने लगी है। वे पहले मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करते थे। लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ वार्म अप मैच में रूसो को सलामी बल्लेबाज के रूप में उतारा गया था। इस भूमिका में भी उन्होंनो जबर्दस्त पारी खेली। वे 54 रन बना कर नाबाद रहे।

दक्षिण अफ्रीका के अब नये तेवर
घरेलू श्रृंखला जीतने के कारण भारत को किसी मुगालते में नहीं रहना चाहिए। दक्षिण अफ्रीका टीम का नजरिया अब बदल चुका है। वह नये माइंड सेट के साथ विश्व कप प्रतियोगिता में उतरी है। रिले रूसो के रूप में उसे एक मैच विजेता खिलाड़ी मिल चुका है। क्वांटन डि कॉक, रेजा हेनरिक्स, एडम मार्करम , डेविड मिलर और हेनरिक क्लासनेन दक्षिण अफ्रीका की बैटिंग को और भी मजबूत बनाते हैं। आस्ट्रेलिया की तेज पिच पर इस टीम की गेंदबाजी भी निखर गयी है। न्यूजीलैंड जैसी टीम पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल सकी। 17.1 ओवर में उसका पुलिंदा बंध गया और 100 रन का आंकड़ा भी नहीं छू सकी। गप्टिल 26, ग्लेन फिलिप्स 20 और ब्रेसवेल ने 11 रन बनाये। इसके अलावा कोई अन्य बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सका।

क्या कहते हैं रिकॉर्ड ?
हालांकि टी-20 विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत का पलड़ा भारी है। दोनों ने अब तक पांच मैच खेले हैं जिनमें भारत को चार में जीत मिली है। पहला टी-20 विश्वकप दक्षिण अफ्रीका में हुआ था जिसमें भारत ने मेजबान देश को हराया था। इसके बाद भारत ने 2010, 2012 और 2014 के विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका को मात दी थी। दक्षिण अफ्रीका को केवल 2009 के विश्वकप में जीत मिली थी। 2007 में भारत टी-20 का विश्व विजेता बना था। 2014 में वह फाइनल में पहुंचा था जहां श्रीलंका के हाथों उसे हार झेलनी पड़ी थी। 2012 के विश्वकप में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को केवल 1 रन से हराया था। यह मैच कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेला गया था।

विश्वकप में जब 1 रन से जीता भारत
भारत ने पहले बैटिंग कर 150 रन बनाये थे। सुरेश रैना ने सबसे अधिक 45 रन बनाये थे। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में 151 रन ही बना सकी थी। दक्षिण अफ्रीका को अंतिम ओवर में जीत के लिए 14 रन चाहिए थे। 19वें ओवर की समाप्ति पर दक्षिण अफ्रीका का स्कोर था 8 विकेट पर 139 रन। भारत की तरफ से लक्ष्मीपति बालाजी 20वां ओवर फेंक रहे थे। पहली गेंद पर एल्बी मोर्केल ने छक्का जड़ दिया। दूसरी गेंद पर वे आउट हो गये। तीसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना। चौथी गेंद पर मोर्ने मोर्केल ने छक्का मार दिया। पांचवीं गेंद पर मोर्ने मोर्केल भी आउट हो गये। इस तरह दक्षिण अफ्रीका 151 के स्कोर पर ऑलआउट हो गया और 1 रन से मैच हार गया। लक्ष्मीपति बालाजी का यह ओवर हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गया।












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