भारतीय क्रिकेट के लिए ईश्वर का उपहार हैं सूर्या, इन्हें टेस्ट में भी तो मौका दीजिए !
सूर्य कुमार यादव भी मानते हैं कि पिछले एक साल में उनकी जिंदगी एकदम से बदल गयी है। वे कहते हैं, मैं तो वही हूं लेकिन मेरा समय बदल गया है।

सूर्य कुमार यादव की विशिष्ट प्रतिभा को देखते हुए क्या उन्हें टेस्ट टीम में शामिल नहीं कर लेना चाहिए ? भारतीय क्रिकेट के लिए ईश्वर का उपहार हैं सूर्या। उनके नये अवतार ने क्रिकेट के परम्परागत तौर-तरीकों को बिल्कुल बदल दिया है। ईश्वर के इस उपहार का अधिकतम उपयोग होना चाहिए। सूर्या ने मंगलवार को रणजी ट्राफी में हैदराबाद के खिलाफ धमाकेदार पारी खेली। उन्होंने 80 गेंदों पर 90 रन बनाये। यह प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि वे रेड बॉल क्रिकेट में भी रंग जमा सकते हैं। अगर कोई बल्लेबाज रेड बॉल क्रिकेट में भी सौ या उससे अधिक के स्टाइक रेट से खेले तो इसमें बुरा क्या है ? वैसे भी अब टेस्ट क्रिकेट में विव रिचर्ड्स, एडम गिलक्रिस्ट, ब्रेंडन मैकुलम, एबी डिविलियर्स और क्रिस गेल की आक्रामक शैली देखने को नहीं मिलती। इन विस्फोटक बल्लेबाजों ने क्रिकेट के हर प्रारूप में अपनी बैटिंग का लोहा मनवाया। इनकी वजह से ही टेस्ट क्रिकेट रोमांचक का तड़का लगा था।
अब मैं टेस्ट खेलने के बिल्कुल नजदीक- सूर्या
सूर्य कुमार यादव भी मानते हैं कि पिछले एक साल में उनकी जिंदगी एकदम से बदल गयी है। वे कहते हैं, मैं तो वही हूं लेकिन मेरा समय बदल गया है। पिछले छह महीने में जो मेरा प्रदर्शन है उससे मैं टेस्ट खेलने के बिल्कुल नजदीक पहुंच गया हूं। मुझे लाल गेंद खेलने का अनुभव है क्यों कि राष्ट्रीय क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में इससे ही शुरुआत होती है। हां, टेस्ट क्रिकेट में परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होती हैं लेकिन इन चुनौतियों के मुताबिक ढल कर सफलता पायी जा सकती है। ये दिमाग का खेल है। यानी सूर्या टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए बिल्कुल तैयार है। उन्हें केवल व्हाइट बॉल क्रिकेट का महारथी नहीं समझा जाना चाहिए। सूर्य कुमार यादव ने 2010 में ही मुम्बई की तरफ से दिल्ली के खिलाफ अपना पहला रणजी मैच खेला था। अपने डेब्यू रणजी मैच में सूर्या ने 73 रनों की आकर्षक पारी खेली थी। रणजी खेलते हुए उन्हें 12 साल हो गये। ऐसे में कोई कैसे कह सकता है कि उन्हें लाल गेंद खेलने का अनुभव नहीं है ?
टेस्ट में फास्टेस्ट सेंचुरी का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं सूर्या
विव रिडर्ड्स, एबी डिबिलियर्स, ब्रैंडन मैकुलम, एडम गिलक्रिस्ट, क्रिस गेल टेस्ट क्रिकेट में भी अपनी धुआंधार बल्लेबाजी के लिए विख्यात थे। रिचर्ड्स ने 1986 में केवल 56 गेंदों पर टेस्ट शतक लगाया था। उनका यह रिकॉर्ड 30 साल तक महफूज रहा। 2016 में मैकुलम ने केवल 54 गेंदों पर शतक बना कर इस रिकॉर्ड को तोड़ा था। गिलक्रिस्ट ने 57 गेंदों पर टेस्ट सेंचुरी मारी थी। गेल ने 70 तो डिविलियर्स ने 75 गेंदों पर टेस्ट शतक लगाया था। भारत में भी एक से बढ़ कर एक बल्लेबाज हुए लेकिन इस सूची में उनका नाम बहुत पीछे हैं। भारत की तरफ से फास्टेस्ट सेंचुरी का रिकॉर्ड कपिल देव और अजहरुद्दीन के नाम पर दर्ज है। कपिल ने 1987 में श्रीलंका के खिलाफ 74 गेंदों पर सैकड़ा बनाया था। अजहरुद्दीन ने भी इतने ही गेंदों पर 1997 में सौ रन (विरूद्ध द. अफ्रीका) बनाये थे। सूर्य कुमार यादव की बल्लेबाजी इन सभी दिग्गजों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने ऐसे-ऐसे शॉट्स इजाद किये हैं जिनके बारे में ये पुराने धुरंधर सोच भी नहीं सकते थे। इनमें वह काबिलियत है कि वे मैकुलम के रिकॉर्ड को तोड़ सकें। सूर्या अपनी विस्मयकारी योग्यता से टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज शतक का नया रिकॉर्ड बना सकते हैं।
क्या सूर्या को टेस्ट टीम में मौका मिलेगा ?
32 साल के सूर्या अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेल रहे हैं। यह उनका स्वर्ण काल है। इसलिए यही वह उपयुक्त समय है जब उन्हें टेस्ट खेलने का मौका दिया जाय। पहले भारत में टेस्ट मैच की इंट्री रणजी ट्राफी के दरवाजे से ही होती थी। रणजी ट्राफी में ग्रुप मैच चार दिनों के और नॉक आउट मैच पांच दिनों के होते हैं। यह प्रतियोगिता लाल गेंद से खेली जाती है। यानी इस प्रतियोगिता का ढांचा एक हद तक टेस्ट मैच से मिलता-जुलता है। रणजी में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकतर खिलाड़ी टेस्ट में भी कामयाब होते थे। सूर्या अभी मुम्बई की टीम से रणजी खेल रहे हैं। हैदराबाद के खिलाफ उनकी शानदार बल्लेबाजी शायद भारतीय चयनकर्ताओं का ध्य़ान अपनी तरफ खींच सके। फरवरी 2023 में भारत को ऑस्ट्रेलिया खिलाफ चार टेस्ट मैच खेलने हैं। क्या सूर्या को टेस्ट टीम में मौका मिलेगा ?












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