OTD: आंखों में आंसू और दिल में गर्व! जब सचिन तेंदुलकर की मां ने विदाई मैच में पहली बार बेटे को लाइव खेलते देखा
On This Day In 2013: भारत के क्रिकेट का वो नाम, जो जब जुबान से निकले, तो एक सम्मान का स्वर सुनाई देता है। क्रिकेट के इस भगवान ने न सिर्फ अपने खेल से दुनिया को हैरान किया, बल्कि एक नई पीढ़ी को प्रेरित भी किया है। हम बात कर रहे हैं महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की।
जिन्होंने 15 नवंबर 1989 को भारत के लिए डेब्यू किया था। उनके शानदार करियर का समापन 16 नवंबर 2013 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के साथ हुआ।
जब सचिन ने भारत के लिए खेला 200वां टेस्ट
यह मैच भारत के लिए उनका 200वां टेस्ट मैच था। अपने पूरे करियर के दौरान, सचिन ने कई रिकॉर्ड बनाए और क्रिकेट में एक दिग्गज स्टार बन गए। उन्होंने 1996, 2003 और 2011 में भारत के वर्ल्ड कप अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लगातार टीम के लिए टॉप स्कोर करने वाले खिलाड़ी के रूप में उभरे। उनकी उपलब्धियों में सौ अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाले पहले और एकमात्र खिलाड़ी होना और टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड रखना शामिल है।

जब मां ने पहली बार बेटे को लाइव खेलते देखा
सचिन के लंबे क्रिकेट करियर के बावजूद उनकी मां रजनी तेंदुलकर ने उन्हें सिर्फ़ एक बार लाइव खेलते हुए देखा। वह मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में उनके विदाई मैच में शामिल हुई थीं। सचिन ने बीसीसीआई से अनुरोध किया था कि यह अंतिम मैच मुंबई में आयोजित किया जाए ताकि उनकी मां उन्हें पहली बार लाइव खेलते हुए देख सकें।
सचिन ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि, 'इसलिए उन्होंने (बीसीसीआई) मुंबई में आखिरी मैच की मेजबानी करने के लिए विनम्रतापूर्वक सहमति व्यक्त की, और यह एकमात्र ऐसा अवसर था जब उन्होंने मुझे 24 वर्षों में लाइव खेलते हुए देखा।'
सचिन ने आखिरी मैच में कितने रन बनाए?
सचिन अपने आखिर मैच में 74 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने दो ओवर फेंके, लेकिन एक भी विकेट नहीं चटका पाए। तेंदुलकर का अंतिम मैच भारत के लिए एक शानदार जीत के साथ समाप्त हुआ।
मां ने बताया क्यों सिर्फ हाइलाइट्स देखना था पसंद
इस विदाई मैच से पहले सचिन के बड़े भाई अजीत को छोड़कर उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने उन्हें लाइव खेलते हुए नहीं देखा था। 2000 के दशक की शुरुआत में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में रजनी तेंदुलकर ने स्टेडियम में अपनी अनुपस्थिति के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि सचिन को टेलीविजन पर खेलते हुए देखकर उन्हें बहुत तनाव होता था और वे मैच के बाद हाइलाइट्स देखना पसंद करती थीं।
सचिन ने दुनियाभर के फैंस का जीता दिल
सचिन का करियर दो दशकों से ज़्यादा लंबा रहा, जिसके दौरान उन्होंने अपने प्रदर्शन से दुनिया भर के फैंस को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई पूर्व क्रिकेट दिग्गज और अन्य खेलों के एथलीट उनके बेहतरीन प्रदर्शन के दौरान उन्हें बल्लेबाजी करते हुए देखने आते थे।
क्रिकेट में सचिन का बेमिसाल योगदान
भारतीय क्रिकेट में मास्टर ब्लास्टर का योगदान बेमिसाल है। वह एमएस धोनी की अगुआई वाली टीम का हिस्सा थे जिसने 2011 में विश्व कप ट्रॉफी जीती थी। उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियां वैश्विक स्तर पर महत्वाकांक्षी क्रिकेटरों को प्रेरित करती रहती हैं।
सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं। उनके रिकॉर्ड और समर्पण ने खेल पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके अंतिम मैच में उनकी मां की मौजूदगी ने उनके असाधारण करियर में एक मार्मिक स्पर्श जोड़ा।
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सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट करियर
सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर में 200 टेस्ट और 463 वनडे मैच खेले थे। टेस्ट क्रिकेट में 15,921 और वनडे में 18,426 रन बनाने का रिकॉर्ड उनके नाम है। टेस्ट में उनके नाम 51 और वनडे में 49 शतक जड़ने का भी रिकॉर्ड है।












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