अर्जुन के शतक के बाद सचिन तेंदुलकर ने दी प्रतिक्रिया, 'बेटे को रखना होगा अभी दबाव से दूर'
सचिन तेंदुलकर ने अर्जुन तेंदुलकर के पहले फर्स्ट क्लास शतक के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। वे जानते हैं दबाव बेटे को बिखेर देगा इसलिए अर्जुन को फ्री होकर खेलते देखना चाहते हैं।

सचिन तेंदुलकर ने रणजी ट्रॉफी में अपने बेटे अर्जुन के पहले शतक पर रिएक्ट किया है। अर्जुन तेंदुलकर एक ऐसी शख्सियत के पुत्र होने का भार अपने ऊपर लेकर चल रहे हैं जो भारत में क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। अर्जुन इस समय जिस उम्र पर हैं तब तक सचिन भारत के सीनियर और बेस्ट बल्लेबाज बन चुके थे। जाहिर है अर्जुन अब कुछ भी कर लें उनको पिता जैसी शोहरत और उपलब्धि हासिल नहीं होगी। शायद इसलिए ही उन्होंने पिता के नक्शेकदम पर चलने की जगह अपनी राह खुद खोजने की कोशिश की और एक तेज गेंदबाज बनने का फैसला किया। लेकिन यहां भी लंबी नाकामयाबी थी क्योंकि उनको आईपीएल तक का एक मैच खेलने का मौका नहीं मिला।

अर्जुन ने करियर का पहला शतक लगाया
फिर मुंबई की टीम में लगातार उनकी अनदेखी हुई जो सचिन और अर्जुन की होम टीम है। ऐसे में 23 साल के अर्जुन के लिए मौजूदा रणजी ट्रॉफी सीजन में गोवा की ओर से खेलने का ऑप्शन मौजूद था जिसके लिए उन्होंने पहले ही एमसीए में एनओसी मांग लिया था। अब गोवा की ओर से अर्जुन ने करियर का पहला शतक लगाया है। मजेदार बात ये है कि गेंदबाजी जो उनका मुख्य काम है वहां वे शुरुआती ओवरों में 7 रन प्रति ओवर की दर से पिटे लेकिन बाद में दो विकेट लेकर आंकड़ों में काफी सुधार कर लिया। नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते हुए, बाएं हाथ के अर्जुन हालांकि शतक लगाने समय पिता की बराबरी करने में कामयाब रहे। सचिन ने 1988 में गुजरात के खिलाफ अपना पहला रणजी शतक बनाया था। 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले सचिन ने लोगों से अर्जुन पर अनावश्यक दबाव नहीं डालने का आग्रह किया।

अर्जुन ने किसी भी तरह से 'सामान्य बचपन' नहीं बिताया
सचिन ने कहा कि एक लोकप्रिय क्रिकेटर का बेटा होने के नाते, 23 वर्षीय अर्जुन ने किसी भी तरह से 'सामान्य बचपन' नहीं बिताया है।
सचिन ने इंफोसिस से बात करते हुए कहा, "अर्जुन ने सामान्य बचपन नहीं बिताया है, एक क्रिकेटर का बेटा होना जो काफी समय से है, यह इतना आसान नहीं है और यही एकमात्र कारण है जब मैं सेवानिवृत्त हुआ और मुंबई में मीडिया ने मुझे सम्मानित किया तो उनको मेरा संदेश यही था- अर्जुन को क्रिकेट से प्यार करने दो, उसे वह मौका दो।

मुझ पर कभी भी मेरे माता-पिता का दबाव नहीं था
उन्होंने कहा, "उनके प्रदर्शन के बाद आप कुछ बयान देख सकते हैं। लेकिन उन पर दबाव न डालें क्योंकि मुझ पर कभी भी मेरे माता-पिता का दबाव नहीं था।"
मेरे माता-पिता ने मुझे बाहर जाने और खुद को व्यक्त करने की आजादी दी, अपेक्षाओं का कोई दबाव नहीं था। यह केवल मोटिवेशन और समर्थन था, हम कैसे जा सकते हैं और खुद को बेहतर बना सकते हैं और यही मैं चाहता था कि अर्जुन भी यही करें। मैं उससे कहता रहा कि यह चुनौतीपूर्ण होने वाला है।"

बातचीत का भी खुलासा किया जो अर्जुन से की थी
सचिन ने उस बातचीत का भी खुलासा किया जो उन्होंने अर्जुन से की थी। तब अर्जुन को नाइटवॉचमैन के तौर पर भेजा गया था। सचिन ने बताया कि अर्जुन ने उनसे पूछा कि कितना स्कोर यहां पर सही रहेगा। तब गोवा के 5 विकेट 210 पर जा चुके थे। अर्जुन को सचिन ने बताया कि टीम के लिए 375 तो कम से कम करने ही होंगे। इसके लिए अर्जुन को शतक लगाना होगा। सचिन ने कहा- मैंने उससे कहा, तुमको वहां शतक लगाना होगा। क्या तुम्हें यकीन है कि 100 कर सकते हो?
अर्जुन तेंदुलकर ने गोवा के लिए 120 रनों की पारी खेली जिसके चलते उनकी टीम ने नौ विकेट के नुकसान पर 547 रन बनाए। बाद में अर्जुन ने गेंदबाजी के दौरान भी 14 ओवर में 77 रन देकर 2 विकेट हासिल कर लिए थे।












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